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पुरा महादेव मेले में व्यस्तता : बदली राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की तिथि

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खेकड़ा,31 जुलाई 2026 (यूटीएन)। पुरा महादेव श्रावणी कांवड़ मेले के दौरान स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यस्तता को देखते हुए जनपद में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (नेशनल डी-वॉर्मिंग डे) की तिथि में परिवर्तन किया गया है। पहले यह अभियान 10 अगस्त को प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे 14 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। वहीं, किसी कारणवश दवा लेने से वंचित रह जाने वाले बच्चों को 18 अगस्त को आयोजित होने वाले मॉप-अप दिवस पर एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी।

अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को खेकड़ा ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) पर प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में अभियान के संचालन, दवा वितरण की प्रक्रिया, बच्चों की आयु के अनुसार सही खुराक तथा दवा खिलाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी गई।

सीएचसी अधीक्षक डॉ. ताहिर ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य पहल है। इसके तहत एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को वर्ष में दो बार एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाती है। इसका उद्देश्य पेट में होने वाले कृमि संक्रमण को समाप्त करना तथा बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को बेहतर बनाना है।

उन्होंने बताया कि कृमि संक्रमण के कारण बच्चों में खून की कमी, कुपोषण, कमजोरी, पेट दर्द, भूख कम लगना, पढ़ाई में ध्यान न लगना तथा शारीरिक विकास प्रभावित होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। समय-समय पर एल्बेंडाजोल की दवा खिलाने से इन समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

आरबीएसके के ब्लॉक नोडल अधिकारी डॉ. दीपक धामा ने बताया कि पुरा महादेव श्रावणी कांवड़ मेले में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन और स्वास्थ्य विभाग की व्यापक ड्यूटी को देखते हुए अभियान की तिथि में बदलाव किया गया है, ताकि दोनों व्यवस्थाओं का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके और बच्चों तक दवा सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सके।

उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाध्यापकों से कहा कि विद्यालयों में अभियान के दिन सभी बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का प्रयास करें। यदि कोई बच्चा किसी कारणवश अनुपस्थित रहता है तो उसे मॉप-अप दिवस पर दवा अवश्य उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा अभियान से वंचित न रहे।

प्रशिक्षण में शिक्षकों को बताया गया कि एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों की आयु के अनुसार निर्धारित मात्रा में ही दी जाएगी। छोटे बच्चों को आवश्यकता अनुसार गोली चबाकर या कुचलकर दी जाएगी, जबकि बड़े बच्चे इसे चबाकर खा सकेंगे। दवा खिलाने के बाद बच्चों पर कुछ समय तक निगरानी रखने और किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग को देने के निर्देश भी दिए गए।

अधिकारियों ने बताया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही है। अभिभावकों से अपील की गई कि वे किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें तथा अपने बच्चों को कृमिनाशक दवा अवश्य दिलाएं।

अभियान के दौरान सरकारी एवं निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, मदरसों तथा स्कूल से बाहर रहने वाले पात्र बच्चों तक भी एल्बेंडाजोल की दवा पहुंचाई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग तथा बाल विकास एवं पुषाहार विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।

अभियान की निगरानी आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश, डीसीपीएम नौशाद तथा डीईआईसी मैनेजर डॉ. अनुज गेरा करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि सभी स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के बीच समन्वय स्थापित कर अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अभियान के दौरान अपने बच्चों को विद्यालय अथवा आंगनबाड़ी केंद्र अवश्य भेजें और कृमि मुक्ति कार्यक्रम में सहयोग करें। विभाग का कहना है कि नियमित कृमिनाशक दवा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण स्तर और पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

 







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