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103 साल की विरासत में इस बार दिखेगा आधुनिक रामलीला का रंग

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नई दिल्ली,18 सितम्बर  2026  (यूटीएन)। दिल्ली की 103 साल पुरानी रामलीला परंपरा इस बार आधुनिक मंचीय तकनीक, नए रंग-रूप और रचनात्मक प्रयोगों के साथ दर्शकों के सामने आने की तैयारी में है। श्री धार्मिक लीला कमेटी ने ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोजन की औपचारिक शुरुआत 20 सितंबर को सुबह 11 बजे भूमि पूजन समारोह के साथ होगी। भूमि पूजन कार्यक्रम में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया जा रहा है।

कमेटी के महासचिव धीरजधर गुप्ता और अन्य पदाधिकारियों की ओर से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों, दिल्ली सरकार के मंत्रियों, महापौर और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को समारोह का निमंत्रण भेजा गया है। कमेटी की ओर से आने वाले दिनों में देश की अन्य प्रमुख हस्तियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

भूमि पूजन के साथ ही रामलीला के मंच, पंडाल, प्रकाश व्यवस्था, कलाकारों की तैयारियों और अन्य व्यवस्थाओं का काम गति पकड़ लेगा। कमेटी इस बार आयोजन को भव्य बनाने के साथ उसकी ऐतिहासिक परंपरा और धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है।

लालकिला मैदान में फिर सजेगा रामलीला का मंच

कमेटी के सचिव प्रदीप शरण ने बताया कि इस वर्ष भी रामलीला का मंचन लालकिला मैदान स्थित माधवदास पार्क में किया जाएगा। ऐतिहासिक लालकिले की पृष्ठभूमि में होने वाला यह आयोजन दिल्ली की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में विशेष स्थान रखता है।

उन्होंने बताया कि इस बार रामलीला की प्रस्तुति को आधुनिक मंचीय तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। भगवान श्रीराम के जीवन की प्रमुख घटनाओं को नाटकीय रूप में प्रस्तुत करने के साथ मंच पर नए तकनीकी और रचनात्मक प्रयोग किए जाएंगे।

मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रभाव और दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से रामकथा के विभिन्न प्रसंगों को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है। उद्देश्य यह है कि दर्शकों को रामलीला केवल संवाद और अभिनय के माध्यम से ही नहीं, बल्कि आधुनिक मंचीय माध्यमों के जरिए भी जीवंत अनुभव के रूप में दिखाई दे।

परंपरा के साथ आधुनिकता का मेल

कमेटी का मानना है कि समय के साथ दर्शकों की अपेक्षाएं और मनोरंजन के माध्यम बदल रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों को नई पीढ़ी तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए मंचन की शैली में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

हालांकि आधुनिक तकनीक और नए प्रयोगों के बावजूद रामलीला की मूल धार्मिक और सांस्कृतिक भावना को केंद्र में रखा जाएगा। रामायण के मूल प्रसंगों, पात्रों और धार्मिक भावनाओं के साथ किसी प्रकार का समझौता न करते हुए प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों के अनुकूल बनाने की कोशिश की जाएगी।

कमेटी पदाधिकारियों के अनुसार, आधुनिकता का उद्देश्य परंपरा को बदलना नहीं बल्कि उसे नए दर्शकों तक नए माध्यमों से पहुंचाना है।

युवा पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश

रामलीला के आयोजकों का विशेष ध्यान युवा पीढ़ी पर भी है। मोबाइल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से युवाओं को जोड़ना आयोजकों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार मंचन में ऐसे तकनीकी और रचनात्मक प्रयोग किए जाने की तैयारी है, जो युवाओं को रामकथा के प्रसंगों से जोड़ सकें। भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, त्याग, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को प्रभावी मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

103 वर्षों की यात्रा को आगे बढ़ाने की तैयारी

श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला केवल एक वार्षिक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि दिल्ली की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। 103 वर्षों की यात्रा में आयोजन ने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं।

बदलते शहर, बदलती तकनीक और बदलती दर्शक अपेक्षाओं के बीच रामलीला की परंपरा का लगातार जारी रहना अपने आप में इसकी सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है। आयोजकों का प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत को उसी उत्साह के साथ पहुंचाया जाए।

मंच पर दिखेंगे नए दृश्य प्रयोग

इस बार मंचन में दृश्य प्रभावों और तकनीकी साधनों के इस्तेमाल की तैयारी है। रामकथा के अलग-अलग प्रसंगों को दर्शकों के सामने अधिक प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था को विशेष रूप से तैयार किया जा सकता है।

वनवास, पंचवटी, सीता हरण, हनुमान जी का लंका गमन, लंका दहन, राम-रावण युद्ध और अयोध्या वापसी जैसे प्रमुख प्रसंग रामलीला के पारंपरिक आकर्षण का हिस्सा रहते हैं। आयोजकों की कोशिश है कि इन प्रसंगों की प्रस्तुति में तकनीक का उपयोग इस प्रकार किया जाए कि धार्मिक भाव और नाटकीय प्रभाव दोनों कायम रहें।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी बढ़ेगा दायरा

कमेटी के प्रवक्ता रवि जैन ने बताया कि रामलीला मंचन के साथ इस बार सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी है। रामलीला के मंच को केवल नाट्य प्रस्तुति तक सीमित रखने के बजाय इससे जुड़े अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी प्रमुखता देने की योजना है।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, लोक कला और सामाजिक मूल्यों को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इससे रामलीला परिसर पूरे आयोजन काल में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन सकता है।

भक्ति के साथ सामाजिक सहभागिता

रामलीला के आयोजन में हर वर्ष बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय लोगों, कलाकारों, स्वयंसेवकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों की सहभागिता भी रहती है।

कमेटी के अनुसार 103 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाने में समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। आयोजन के दौरान विभिन्न स्तरों पर लोगों की सहभागिता इसे सामुदायिक आयोजन का स्वरूप देती है।

कलाकारों की तैयारियां भी होंगी तेज

भूमि पूजन के बाद रामलीला के मंचन से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम की तैयारियां तेज होने की संभावना है। संवाद, अभिनय, वेशभूषा, संगीत, मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था के लिए अलग-अलग स्तर पर काम किया जाएगा।

रामलीला जैसे बड़े आयोजन में कलाकारों के अभिनय के साथ मंच के पीछे काम करने वाली टीम की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। एक दृश्य को प्रभावी बनाने के लिए मंच सज्जा, ध्वनि, प्रकाश, वेशभूषा और समयबद्ध प्रस्तुति के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक होता है।

धार्मिक स्वरूप रहेगा केंद्र में

आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक प्रस्तुति का उद्देश्य रामलीला के धार्मिक स्वरूप को कमजोर करना नहीं है। रामकथा की मूल भावना, भगवान श्रीराम के आदर्श और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को केंद्र में रखते हुए तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाएगा।

रामलीला की परंपरा में कथा और धार्मिक भावनाओं का विशेष महत्व है। इसलिए नए प्रयोगों के साथ परंपरागत स्वरूप और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन

लालकिला क्षेत्र में होने वाली रामलीला दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। पुराने दिल्ली क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में रामलीला की विशेष भूमिका रही है।

हर वर्ष रामलीला के दौरान दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से लोग आयोजन स्थल तक पहुंचते हैं। इससे यह आयोजन धार्मिक गतिविधि के साथ शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी हिस्सा बन जाता है।

बदलती पीढ़ी के लिए बदलेगा प्रस्तुति का अंदाज

आयोजकों के अनुसार आज की पीढ़ी दृश्य माध्यमों से तेजी से जुड़ती है। इसलिए रामलीला की कथा को उसके मूल स्वरूप में रखते हुए प्रस्तुति के तरीके में आधुनिकता लाने का प्रयास किया जा रहा है।

डिजिटल तकनीक, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और बेहतर ध्वनि प्रभावों के माध्यम से कथा के भावनात्मक प्रसंगों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि इसका इस्तेमाल कहानी और धार्मिक भावना के अनुरूप रखने पर जोर रहेगा।

आयोजन व्यवस्था पर भी रहेगा ध्यान

बड़े धार्मिक आयोजनों में दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय होते हैं। रामलीला मैदान में मंचन के दौरान बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रवेश, निकास, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और अन्य सुविधाओं की तैयारी भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

कमेटी और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय के माध्यम से आयोजन स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

प्रकाश और ध्वनि से जीवंत होंगे प्रसंग

रामलीला के पारंपरिक मंचन में संवाद और अभिनय की प्रमुख भूमिका होती है। इस बार प्रकाश और ध्वनि के आधुनिक प्रयोगों के माध्यम से विभिन्न प्रसंगों को अधिक प्रभावशाली बनाने की तैयारी है।

युद्ध के दृश्यों में अलग प्रकार की प्रकाश व्यवस्था, भावनात्मक प्रसंगों में संगीत और संवाद के अनुरूप ध्वनि प्रभाव तथा विभिन्न स्थानों को दर्शाने के लिए मंच सज्जा के प्रयोग दर्शकों के अनुभव को नया रूप दे सकते हैं।

धार्मिक पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा

दिल्ली में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रभाव केवल स्थानीय दर्शकों तक सीमित नहीं रहता। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोग ऐसे आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। ऐतिहासिक लालकिला क्षेत्र में होने वाली रामलीला धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुरानी दिल्ली के अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के साथ रामलीला का आयोजन शहर की सांस्कृतिक यात्रा का हिस्सा बन सकता है।

परंपरा को दस्तावेज के रूप में सहेजने की जरूरत

103 वर्ष पुरानी परंपरा के कारण रामलीला से जुड़ी स्मृतियां, पुराने कलाकार, मंचन की शैलियां और आयोजन की तस्वीरें भी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं। ऐसे में आयोजन के साथ इसकी ऐतिहासिक यात्रा को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने की दिशा में भी प्रयास किए जा सकते हैं।

पुरानी पीढ़ी से जुड़ी यादों और नई पीढ़ी की आधुनिक प्रस्तुति के बीच संवाद स्थापित करना इस परंपरा को भविष्य तक पहुंचाने में उपयोगी हो सकता है।

महिला और युवा सहभागिता पर भी बढ़ सकता है जोर

आधुनिक सामाजिक परिवेश में सांस्कृतिक आयोजनों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। रामलीला से जुड़े आयोजन में भी विभिन्न स्तरों पर नई पीढ़ी की सहभागिता बढ़ाने से परंपरा को व्यापक सामाजिक आधार मिल सकता है।

आयोजन प्रबंधन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वयंसेवी गतिविधियों और दर्शक सुविधाओं में युवाओं की भागीदारी आयोजन को नई ऊर्जा दे सकती है।

विरासत और तकनीक का संतुलन बनेगा पहचान

इस बार की रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यही हो सकती है कि एक ओर 103 वर्षों की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत होगी तो दूसरी ओर आधुनिक मंचीय तकनीक और प्रस्तुति के नए प्रयोग दिखाई देंगे।

आयोजकों की कोशिश है कि तकनीक कथा पर हावी न हो, बल्कि कथा को अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम बने। इस दृष्टिकोण से परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन रामलीला के नए संस्करण की पहचान बन सकता है।

भूमि पूजन से शुरू होगा तैयारियों का सिलसिला

20 सितंबर को होने वाले भूमि पूजन समारोह के साथ रामलीला आयोजन की तैयारियां औपचारिक रूप से गति पकड़ेंगी। इसके बाद मंच निर्माण, सजावट, तकनीकी व्यवस्था, कलाकारों की रिहर्सल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा।

कमेटी आने वाले दिनों में रामलीला मंचन और अन्य कार्यक्रमों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जारी करेगी। इससे दर्शकों को आयोजन की तारीखों, प्रमुख प्रसंगों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि 103 वर्षों की परंपरा को बनाए रखते हुए इस बार रामलीला को ऐसा नया कलेवर देने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धा, संस्कृति, तकनीक और आधुनिक मंचीय प्रस्तुति का संतुलित समावेश दिखाई दे।

लालकिला मैदान का माधवदास पार्क एक बार फिर रामकथा के मंचन का केंद्र बनेगा और दिल्ली की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा नए रंग-रूप में दर्शकों के सामने आएगी।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







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