नई दिल्ली, 20 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। पंजाब में राजनीतिक नेताओं के काफिलों पर कथित हमलों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के काफिले पर बटाला के पास अंडे, टमाटर और पत्थर फेंके जाने के आरोपों के बाद भाजपा ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाए हैं। इसी घटनाक्रम को लेकर भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा है।
कपूर ने आरोप लगाया कि पंजाब में राजनीतिक विरोध को लेकर जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, उनसे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक नेता के काफिले को निशाना बनाया जाता है तो सबसे पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि हमले के पीछे कौन लोग थे, उनका उद्देश्य क्या था और उन्हें मौके तक पहुंचने तथा विरोध करने की अनुमति किस स्तर पर मिली।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अंडे-पत्थर फिंकवाने के बाद वाहनों की पहचान को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक विरोध के नाम पर ऐसी रणनीति अपनाई जा रही है, जिसमें पहले किसी वाहन को निशाना बनाया जाए और बाद में उसे किसी दूसरे नेता की गाड़ी बताकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया जाए। कपूर ने इसे लेकर अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान से जवाब मांगा।
बिट्टू के काफिले पर हमले को लेकर भाजपा का हमला
रवनीत सिंह बिट्टू ने 18 सितंबर को आरोप लगाया था कि बटाला के पास घसीतपुर इलाके में उनके काफिले पर अंडे, टमाटर और पत्थर फेंके गए। बिट्टू उस समय अमृतसर से पठानकोट की ओर जा रहे थे, जहां भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ से जुड़े कार्यक्रम में उन्हें शामिल होना था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बिट्टू ने दावा किया कि काफिले में शामिल कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचा और उनकी सुरक्षा टीम ने कुछ लोगों को पकड़ा।
बिट्टू ने इस घटना के लिए आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए थे। हालांकि आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों से इनकार किया है। एआईपी की ओर से यह भी कहा गया कि उसके कार्यकर्ता शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे और विवाद की शुरुआत भाजपा पक्ष से हुई। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
‘राजनीतिक विरोध की भी एक मर्यादा होनी चाहिए’
प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को विरोध और प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन किसी नेता के काफिले को रोकना, वाहनों पर वस्तुएं या पत्थर फेंकना और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।
उन्होंने पंजाब पुलिस से मांग की कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि काफिले की गतिविधियों की जानकारी प्रदर्शनकारियों तक कैसे पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई या नहीं।
‘हमलावरों की पहचान सामने आए’
कपूर ने कहा कि घटना को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग पुलिस को तथ्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने वास्तव में पत्थर, अंडे या अन्य वस्तुएं फेंकी हैं तो उसकी पहचान की जानी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल या उसके कार्यकर्ता की संलिप्तता सामने आती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए, लेकिन केवल राजनीतिक आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति या संगठन को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक, निष्पक्ष जांच ही पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।
राघव चड्ढा और संदीप पाठक की गाड़ी को लेकर भी सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने राघव चड्ढा और संदीप पाठक से जुड़ी गाड़ियों को लेकर उठ रहे सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी वाहन पर अंडे या पत्थर फेंकने के बाद उसकी पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। कपूर ने सवाल किया कि आखिर किस वाहन पर हमला हुआ, उसमें कौन सवार था और घटना के समय वाहन का वास्तविक रूट क्या था।
उन्होंने मांग की कि पुलिस घटनास्थल से प्राप्त वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट करे कि किस वाहन को निशाना बनाया गया था। इससे राजनीतिक आरोपों के बजाय तथ्य सामने आ सकेंगे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
बिट्टू के काफिले पर कथित हमले के बाद राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों में बिट्टू की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताए जाने और पंजाब पुलिस से जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि किसी भी राज्य में राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की होती है। उन्होंने कहा कि सत्ता में कोई भी दल हो, राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की संवैधानिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
अगले दिन बिट्टू ने मान के काफिले के सामने किया प्रदर्शन
घटनाक्रम ने अगले दिन नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। 19 सितंबर को रवनीत सिंह बिट्टू ने लुधियाना स्थित पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के बाहर मुख्यमंत्री भगवंत मान के काफिले के गुजरने के दौरान प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के अनुसार बिट्टू अपने साथ अंडे और टमाटर लेकर पहुंचे और उन्होंने इसे पिछले दिन अपने काफिले पर कथित रूप से फेंकी गई चीजों के जवाब के रूप में पेश किया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
इस घटनाक्रम से पंजाब में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होता दिखाई दिया। बिट्टू ने अपने प्रदर्शन को राजनीतिक विरोध का जवाब बताया, जबकि पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्होंने राजनीतिक विरोध को दबाने का आरोप लगाया।
‘सत्ता बदलती रहती है, जवाबदेही बनी रहती है’
प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध चाहे किसी भी दल के खिलाफ हो, उसे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
कपूर ने कहा कि पंजाब पुलिस को पूरे मामले को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय कानून के अनुसार जांच करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि घटना में शामिल लोगों की पहचान, उनकी राजनीतिक संबद्धता, मौके पर उनकी भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक की जांच की जाए।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच निष्पक्ष जांच की मांग
भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है। एक तरफ भाजपा नेताओं ने काफिले पर हमले के लिए AAP से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए हैं, वहीं AAP ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ऐसे में अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि बटाला के पास वास्तव में क्या हुआ, प्रदर्शन में कौन लोग शामिल थे, काफिले पर किस तरह की वस्तुएं फेंकी गईं, वाहनों को कितना नुकसान हुआ और मौके पर तैनात पुलिस की क्या भूमिका रही।
कपूर ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को हिंसक टकराव या अराजकता में बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने पंजाब पुलिस से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी भूमिका होती है। विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान कानून का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी तरह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और किसी भी घटना की निष्पक्ष जांच कराए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर तथ्यों को सामने लाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल के नेता या कार्यकर्ता के साथ ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

