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पोरबंदर में बनेगा फर्नीचर पार्क, 200 एकड़ जमीन चिन्हित: अर्जुनभाई मोढवाडिया

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नई दिल्ली,08 अक्टूबर  2026  (यूटीएन)।  गुजरात सरकार पोरबंदर में आधुनिक फर्नीचर पार्क विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए करीब 200 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है, जबकि भविष्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए अतिरिक्त 800 एकड़ जमीन भी उपलब्ध है। गुजरात के वन एवं पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने गुरुवार को फिक्की के विकसित भारत फर्नीचर कॉन्क्लेव 2026 में यह जानकारी दी।

मंत्री ने कहा कि गुजरात सरकार राज्य में फर्नीचर निर्माण को संगठित और आधुनिक औद्योगिक गतिविधि के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। पोरबंदर में प्रस्तावित फर्नीचर पार्क को ऐसी सुविधाओं के साथ विकसित करने की योजना है, जिससे फर्नीचर उद्योग से जुड़े निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, एमएसएमई और अन्य कारोबारियों को एक ही स्थान पर आवश्यक औद्योगिक सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने कहा कि भारत तेजी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से शहरी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण, बढ़ती आय, मध्यम वर्ग के विस्तार और आधुनिक जीवनशैली के कारण फर्नीचर और इंटीरियर उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में फर्नीचर विनिर्माण क्षेत्र में देश के सामने रोजगार, निवेश, निर्यात और उद्यमिता के बड़े अवसर मौजूद हैं।

पोरबंदर में 200 एकड़ जमीन चिन्हित

अर्जुनभाई मोढवाडिया ने बताया कि प्रस्तावित फर्नीचर पार्क के लिए करीब 200 एकड़ भूमि की पहचान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त लगभग 800 एकड़ जमीन भी उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में उद्योगों के विस्तार और संबंधित गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि गुजरात की औद्योगिक क्षमता और मजबूत बुनियादी ढांचे को देखते हुए राज्य फर्नीचर निर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए आकर्षक स्थान बन सकता है। पोरबंदर में प्रस्तावित पार्क के जरिए फर्नीचर निर्माण से जुड़े विभिन्न उद्योगों को एक साझा औद्योगिक इकोसिस्टम उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

फर्नीचर उद्योग में लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, ग्लास, फोम, कपड़ा, हार्डवेयर, फिटिंग, पैकेजिंग और डिजाइन सहित कई प्रकार के कच्चे माल और सेवाओं की जरूरत होती है। ऐसे में फर्नीचर पार्क के विकसित होने से प्रत्यक्ष उद्योगों के साथ-साथ सहायक एवं ancillary उद्योगों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

विकसित गुजरात इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 के तहत योजना

मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित फर्नीचर पार्क को विकसित गुजरात इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। पार्क में केंद्र सरकार की भव्या योजना के तहत प्रस्तावित सुविधाओं को भी शामिल किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि भव्या योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान से देशभर में 100 विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाने हैं। प्लग-एंड-प्ले मॉडल के तहत उद्योगों को जमीन के साथ आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और तैयार औद्योगिक वातावरण उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, ताकि कंपनियां कम समय में अपनी उत्पादन गतिविधियां शुरू कर सकें।

इस तरह की औद्योगिक व्यवस्था विशेष रूप से एमएसएमई और नए उद्यमियों के लिए उपयोगी हो सकती है। उन्हें बुनियादी ढांचे के विकास में शुरुआती निवेश और समय कम करने का लाभ मिल सकता है।

गुजरात में निवेश के लिए उद्योग जगत को न्योता

मोढवाडिया ने उद्योग जगत को गुजरात में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए राज्य की मजबूत लॉजिस्टिक्स और समुद्री कनेक्टिविटी को प्रमुख ताकत बताया। उन्होंने कहा कि देश के करीब 42 प्रतिशत पोर्ट लॉजिस्टिक्स का संचालन गुजरात के समुद्री बंदरगाहों से होता है।

फर्नीचर जैसे उत्पादों के निर्माण में कच्चे माल की आवाजाही और तैयार उत्पादों को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में समुद्री बंदरगाहों की उपलब्धता और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क गुजरात को विनिर्माण और निर्यात के लिहाज से प्रतिस्पर्धी बढ़त दे सकता है।

फर्नीचर पार्क के जरिए तैयार उत्पादों को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के साथ विदेशों में निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ाया जा सकता है। गुजरात की समुद्री स्थिति को देखते हुए निर्यात आधारित फर्नीचर उद्योग के विस्तार की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।

कुशल श्रम पर सरकार का जोर

मंत्री ने कहा कि फर्नीचर पार्क के लिए पर्याप्त और कुशल श्रम उपलब्ध कराना भी राज्य सरकार की प्राथमिकता है। आधुनिक फर्नीचर उद्योग में पारंपरिक कारीगरी के साथ-साथ मशीन संचालन, डिजाइन, कंप्यूटर आधारित डिजाइनिंग, उत्पादन प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे कौशल की जरूरत होती है।

उन्होंने बताया कि गुजरात में करीब 300 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई हैं। इन संस्थानों की क्षमता का इस्तेमाल उद्योगों की कौशल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें फर्नीचर निर्माण और उससे जुड़े उद्योगों में रोजगार के लिए तैयार किया जा सकता है।

सरकार और उद्योग के बीच कौशल विकास का बेहतर तालमेल बनने से कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिल सकता है, जबकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और करियर के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

फर्नीचर उद्योग में रोजगार की बड़ी संभावनाएं

फर्नीचर उद्योग केवल कारखानों में उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसमें डिजाइन, कच्चे माल की आपूर्ति, मशीनरी, निर्माण, फिनिशिंग, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग, परिवहन, वेयरहाउसिंग, रिटेल, ई-कॉमर्स और इंस्टॉलेशन जैसे अनेक क्षेत्र जुड़े हुए हैं।

पोरबंदर में फर्नीचर पार्क विकसित होने पर इन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबारी, कारीगर और सेवा प्रदाता भी औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ सकते हैं।

इसके अलावा फर्नीचर क्षेत्र में स्टार्टअप और छोटे उद्यमों के लिए भी नए अवसर विकसित हो सकते हैं। कस्टम फर्नीचर, मॉड्यूलर फर्नीचर, ऑफिस फर्नीचर, होटल और हॉस्पिटैलिटी फर्नीचर, स्कूल-कॉलेज फर्नीचर तथा घरेलू इंटीरियर उत्पादों की मांग को देखते हुए नए व्यवसाय मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।

2047 तक भारत को वैश्विक फर्नीचर शक्ति बनाने का लक्ष्य

फिक्की फर्नीचर समिति के चेयर रुद्र चटर्जी ने कहा कि फर्नीचर उद्योग विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को दुनिया का सबसे बड़ा फर्नीचर उपभोक्ता बनने के साथ-साथ सबसे बड़ा फर्नीचर निर्यातक बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार है और देश में फर्नीचर की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि घरेलू मांग के साथ उत्पादन क्षमता, डिजाइन, गुणवत्ता और निर्यात क्षमता को मजबूत किया जाए तो भारत वैश्विक फर्नीचर बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा सकता है।

उनके अनुसार, फर्नीचर उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने के लिए तकनीक, गुणवत्ता, डिजाइन और सप्लाई चेन पर समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

भारत के सामने वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने का अवसर

फिक्की फर्नीचर समिति के सह-अध्यक्ष आंद्रे एकहोल्ट ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के साथ फर्नीचर उद्योग के सामने वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने का बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में फर्नीचर की मांग और उत्पादन के पैटर्न में बदलाव हो रहे हैं। ऐसे समय में भारत अपने बड़े घरेलू बाजार, युवा कार्यबल और उत्पादन क्षमता का लाभ उठाकर वैश्विक कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण विनिर्माण केंद्र बन सकता है।

इसके लिए भारत को उत्पादन लागत के साथ गुणवत्ता, डिजाइन, टिकाऊ उत्पादन और समय पर आपूर्ति पर भी ध्यान देना होगा। वैश्विक कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जरूरत होगी।

उपभोक्ता की जरूरत के अनुसार हो उत्पाद विकास

आईकेईए स्वीडन के रेगुलेटरी अफेयर्स मैनेजर एवं फर्नीचर समिति के सह-अध्यक्ष जेंस एकवाल ने कहा कि उत्पाद विकास में अंतिम उपभोक्ता की जरूरत को केंद्र में रखना जरूरी है। उन्होंने बेहतर डिजाइन और प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला पर जोर दिया।

फर्नीचर उद्योग में उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। छोटे शहरों में भी मॉड्यूलर, स्पेस-सेविंग और आधुनिक डिजाइन वाले फर्नीचर की मांग बढ़ रही है। ऐसे में निर्माताओं को ग्राहकों की बदलती जरूरतों को समझते हुए उत्पाद तैयार करने होंगे।

डिजाइन और कार्यक्षमता के साथ उत्पाद की गुणवत्ता, टिकाऊपन और कीमत भी उपभोक्ता के खरीद निर्णय को प्रभावित करती है। इसलिए उद्योग के लिए उपभोक्ता-केंद्रित उत्पाद विकास आने वाले समय में महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक कारक बन सकता है।

भारत में मौजूद हैं मजबूत आधार

फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा कि बड़ा घरेलू बाजार, बढ़ता मध्यम वर्ग, तेजी से हो रहा शहरीकरण, मजबूत कारीगर परंपरा, उद्यमी एमएसएमई और युवा कार्यबल भारत को वैश्विक फर्नीचर विनिर्माण केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं।

भारत में सदियों पुरानी कारीगरी और हस्तशिल्प परंपरा मौजूद है। अलग-अलग राज्यों में लकड़ी, बांस, धातु और अन्य सामग्रियों से फर्नीचर और सजावटी उत्पाद बनाने की विशिष्ट परंपराएं हैं। आधुनिक तकनीक के साथ इन पारंपरिक कौशल को जोड़कर भारतीय फर्नीचर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान दिलाई जा सकती है।

एमएसएमई क्षेत्र भी फर्नीचर उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छोटे निर्माता और कारीगर स्थानीय मांग को पूरा करने के साथ विशेष डिजाइन और कस्टम उत्पाद तैयार कर सकते हैं। यदि इन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, वित्त, बाजार और आधुनिक मशीनरी तक बेहतर पहुंच मिले तो इनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।

गुजरात और मध्य प्रदेश फोकस राज्य

फिक्की के विकसित भारत फर्नीचर कॉन्क्लेव 2026 में गुजरात और मध्य प्रदेश को फोकस राज्यों के रूप में रखा गया। दोनों राज्यों की औद्योगिक क्षमता, संसाधन, कारीगर परंपरा और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को देखते हुए फर्नीचर क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

फोकस राज्यों के रूप में चर्चा का उद्देश्य उद्योग और राज्य सरकारों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना तथा निवेशकों को उपलब्ध अवसरों और सुविधाओं की जानकारी देना रहा। फर्नीचर विनिर्माण के साथ-साथ कच्चे माल, डिजाइन, मशीनरी, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।

गुणवत्ता और प्रमाणन पर भी जोर

कॉन्क्लेव के दौरान फिक्की-ओमेगा क्यूएमएस फर्नीचर क्यूसीओ हैंडबुक का विमोचन भी किया गया। इस हैंडबुक का उद्देश्य उद्योग जगत को फर्नीचर क्षेत्र में प्रमाणन प्रक्रिया और उससे संबंधित आवश्यकताओं को समझने में मदद करना है।

फर्नीचर उद्योग के विस्तार के साथ उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का महत्व भी बढ़ रहा है। घरेलू बाजार के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश के लिए कंपनियों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।

हैंडबुक के माध्यम से निर्माताओं और उद्योग से जुड़े अन्य हितधारकों को आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। इससे कंपनियों को गुणवत्ता अनुपालन को बेहतर तरीके से समझने और अपने उत्पादों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार करने में सहायता मिल सकती है।

निर्यात बढ़ाने पर भी रहेगा जोर

भारत में फर्नीचर की घरेलू मांग मजबूत होने के साथ निर्यात बाजार में भी संभावनाएं मौजूद हैं। भारतीय कंपनियां यदि डिजाइन, गुणवत्ता, लागत और आपूर्ति की विश्वसनीयता पर ध्यान दें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं।

पोरबंदर जैसे समुद्री कनेक्टिविटी वाले क्षेत्र में फर्नीचर पार्क विकसित होने से निर्यात आधारित उद्योगों को विशेष लाभ मिल सकता है। समुद्री मार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर तैयार फर्नीचर और अन्य उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों को मिल सकता है लाभ

फर्नीचर उद्योग में बड़ी कंपनियों के साथ बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्यम भी काम करते हैं। प्रस्तावित फर्नीचर पार्क में एमएसएमई के लिए अवसर पैदा होने से स्थानीय उद्यमियों को संगठित औद्योगिक वातावरण मिल सकता है।

एक ही औद्योगिक क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार की इकाइयों के आने से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो सकती है। उदाहरण के लिए एक कंपनी फर्नीचर का मुख्य ढांचा तैयार कर सकती है, जबकि दूसरी फिनिशिंग, तीसरी हार्डवेयर और चौथी पैकेजिंग का काम कर सकती है। इससे उद्योगों के बीच आपसी कारोबार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़ने का अवसर

भारत की पारंपरिक कारीगरी फर्नीचर उद्योग की बड़ी ताकत है। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के कारीगर लकड़ी और अन्य सामग्रियों पर आधारित विशिष्ट उत्पाद तैयार करते हैं। आधुनिक डिजाइन, मशीनरी और बाजार तक पहुंच के साथ इन कारीगरों के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।

फर्नीचर पार्क और इससे जुड़े औद्योगिक नेटवर्क में पारंपरिक कारीगरों के कौशल को आधुनिक उत्पादन प्रणालियों से जोड़ने की संभावनाएं भी बन सकती हैं। इससे हस्तशिल्प और आधुनिक फर्नीचर के बीच नए उत्पाद और डिजाइन विकसित किए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर बड़ा औद्योगिक अवसर

पोरबंदर में प्रस्तावित फर्नीचर पार्क गुजरात के औद्योगिक विकास के साथ-साथ देश के फर्नीचर विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। करीब 200 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित पार्क और अतिरिक्त 800 एकड़ जमीन की उपलब्धता भविष्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं को दर्शाती है।

मजबूत समुद्री कनेक्टिविटी, औद्योगिक बुनियादी ढांचा, आईटीआई का नेटवर्क, कुशल श्रम तैयार करने की योजना और केंद्र एवं राज्य की औद्योगिक नीतियों के साथ तालमेल इस परियोजना को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बना सकता है।

यदि प्रस्तावित फर्नीचर पार्क को आधुनिक सुविधाओं, कुशल मानव संसाधन, मजबूत सप्लाई चेन और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ विकसित किया जाता है तो इससे गुजरात में फर्नीचर उद्योग का नया क्लस्टर तैयार हो सकता है। साथ ही रोजगार, एमएसएमई विकास, निर्यात और स्थानीय उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के संदर्भ में फर्नीचर उद्योग को एक बड़े विनिर्माण और रोजगार क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में ऐसे औद्योगिक पार्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पोरबंदर की प्रस्तावित परियोजना इसी दिशा में गुजरात की एक अहम पहल के रूप में देखी जा रही है।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







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