नई दिल्ली,07 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन और चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग को लेकर मंगलवार को राजधानी दिल्ली में पैदा हुए गतिरोध के बीच चुनाव आयोग ने अपना रुख स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा है कि उसे किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है। राजनीतिक दल पहले भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आयोग से मुलाकात करते रहे हैं और आगे भी इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए आयोग के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, मंगलवार शाम चार बजे तक किसी भी राजनीतिक दल की ओर से आयोग से औपचारिक रूप से मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा गया था। बाद में दिल्ली पुलिस के माध्यम से आयोग को जानकारी मिली कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल जिस स्थान पर बैठक करना चाहता था, वह निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था।
आयोग ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों या विभिन्न दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के लिए वर्ष 2025 में निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल बनाया गया था। इसके तहत अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पहले समय मांगा जाता है और उसके बाद आपसी सहमति से बैठक का समय तय किया जाता है। आयोग ने दोहराया कि वह इस प्रक्रिया के तहत किसी भी राजनीतिक दल से मिलने और उसके मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं का धरना
मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं और सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद कई नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए।
विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलकर चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवालों तथा आरोपों पर चर्चा करना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जब तक आयोग की ओर से उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया जाता, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
घंटों चले प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया और उन्हें बसों के जरिए प्रदर्शन स्थल से हटाया। इस घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने देर शाम अपने पक्ष को सार्वजनिक किया।
आयोग ने कहा—शाम चार बजे तक नहीं आया था औपचारिक अनुरोध
चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि मंगलवार शाम चार बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग से मिलने का समय नहीं मांगा था।
आयोग के मुताबिक, निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किसी राजनीतिक दल या कई दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को पहले अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से मुलाकात के लिए अनुरोध करना होता है। इसके बाद आयोग और प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक का समय निर्धारित किया जाता है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि वह राजनीतिक दलों से संवाद के रास्ते बंद करने के पक्ष में नहीं है। बल्कि उसका कहना है कि सभी दलों के लिए एक समान प्रक्रिया लागू है और उसी के तहत मुलाकात की जा सकती है।
240 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक का मामला
आयोग ने बताया कि मंगलवार को करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के माध्यम से उसे जानकारी मिली कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मुलाकात करना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है।
इसके बाद आयोग को बताया गया कि करीब 240 सांसदों के साथ बैठक संसद भवन की एनेक्सी में आयोजित करने का प्रस्ताव है। चुनाव आयोग ने इस प्रस्ताव को अपने निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग बताया।
आयोग का कहना था कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऐसी बैठकों का आयोजन चुनाव आयोग के परिसर में किया जाता है। इसलिए संसद भवन एनेक्सी में 240 सांसदों के साथ बैठक का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया।
आयोग ने वरिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन लेने भेजने का प्रस्ताव दिया
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने एक वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव भी दिया था। आयोग के अनुसार, यदि सांसद चुनाव आयोग के मुख्यालय तक नहीं आ सकते थे, तो आयोग की ओर से सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को संसद भवन एनेक्सी भेजकर सांसदों का ज्ञापन लिया जा सकता था।
आयोग का कहना है कि यह प्रस्ताव इसलिए रखा गया था ताकि सांसदों की बात और उनका ज्ञापन औपचारिक रूप से प्राप्त किया जा सके, लेकिन प्रतिनिधिमंडल इस विकल्प पर सहमत नहीं हुआ।
इस तरह बैठक को लेकर मुख्य विवाद सिर्फ मुलाकात की इच्छा को लेकर नहीं, बल्कि मुलाकात के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और प्रस्तावित स्थान को लेकर भी सामने आया।
2025 में बनाया गया था मुलाकात का निर्धारित प्रोटोकॉल
चुनाव आयोग ने बताया कि राजनीतिक दलों और आयोग के बीच औपचारिक बैठकों के लिए वर्ष 2025 में एक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल तैयार किया गया था।
इसके तहत यदि कोई राजनीतिक दल या विभिन्न दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है तो उसे अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए पहले समय मांगना होता है। इसके बाद बैठक की तारीख, समय और अन्य व्यवस्थाएं आपसी सहमति से तय की जाती हैं।
आयोग ने संकेत दिया कि यह प्रक्रिया किसी एक राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि सभी दलों के लिए समान रूप से लागू होती है। आयोग के अनुसार, इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए भविष्य में भी कोई राजनीतिक दल या संयुक्त प्रतिनिधिमंडल उससे मुलाकात कर सकता है।
विपक्ष का आरोप—आयोग मिलने को तैयार नहीं
दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि वे चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायतें और सवाल रखना चाहते थे। विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) सहित विभिन्न मुद्दों पर आयोग से जवाब मांगने की बात कही।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों और दावों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। आयोग का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल को मिलने से उसने इनकार नहीं किया है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सभी दलों के लिए मुलाकात का रास्ता खुला है।
प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए नेता
मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं और सांसदों को हिरासत में लिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी काफी समय तक आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे।
प्रदर्शनकारी नेताओं को हटाने के लिए पुलिस ने उन्हें बसों में बैठाकर वहां से रवाना किया। इस दौरान प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं और चुनाव आयोग तथा विपक्ष के बीच संवाद को लेकर विवाद और गहरा गया।
घटनाक्रम के बाद आयोग ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उसका दरवाजा राजनीतिक दलों के लिए बंद नहीं है। आयोग की आपत्ति बैठक के प्रस्तावित स्थान और निर्धारित प्रक्रिया का पालन न होने को लेकर थी।
आयोग बोला—किसी भी दल के लिए रास्ता खुला
चुनाव आयोग ने दोहराया कि किसी भी राजनीतिक दल के सदस्यों से मिलने में उसे कोई आपत्ति नहीं है। राजनीतिक दल निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए आयोग से मुलाकात के लिए समय मांग सकते हैं।
आयोग के अनुसार, अब तक औपचारिक रूप से किसी राजनीतिक दल की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुलाकात का समय नहीं मांगा गया था। इसलिए कोई बैठक निर्धारित नहीं की गई थी।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वह तैयार है। इसका अर्थ है कि आगे यदि कोई दल अधिकृत माध्यम से बैठक का अनुरोध करता है तो आयोग के मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत उस पर विचार किया जा सकता है।
विवाद का केंद्र क्या है?
पूरे घटनाक्रम को तीन प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है—
पहला, विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे चुनाव आयोग से प्रत्यक्ष मुलाकात कर अपनी शिकायतें और सवाल रखना चाहते थे।
दूसरा, आयोग का कहना है कि मंगलवार शाम चार बजे तक किसी राजनीतिक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत औपचारिक मुलाकात का अनुरोध नहीं किया था।
तीसरा, बाद में करीब 240 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक का प्रस्ताव सामने आया, लेकिन संसद भवन एनेक्सी में बैठक का स्थान आयोग के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था। आयोग ने इसके बजाय अपने वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन लेने का विकल्प दिया, जिसे विपक्षी सांसदों ने स्वीकार नहीं किया।
अब आगे क्या?
मंगलवार के घटनाक्रम के बाद अब निगाह इस बात पर है कि विपक्षी दल औपचारिक प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए अनुरोध करते हैं या नहीं। बुधवार को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार विपक्षी दलों की ओर से आयोग से औपचारिक नियुक्ति मांगने की तैयारी भी चर्चा में रही है।
यदि विपक्षी दल अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से समय मांगते हैं तो आयोग के अपने बयान के अनुसार उनके अनुरोध पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार किया जा सकता है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच संवाद की प्रक्रिया को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवाल आयोग के सामने रखने पर जोर दे रहा है, वहीं आयोग अपनी निर्धारित प्रक्रिया और संस्थागत प्रोटोकॉल का हवाला दे रहा है।
फिलहाल आयोग का स्पष्ट संदेश यही है कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए मुलाकात का रास्ता बंद नहीं है, लेकिन मुलाकात के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

