बागपत,08 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। कुपोषण के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अग्रवाल मंडी टटीरी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर गुरुवार को 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और अभिभावकों को संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और पोषण संबंधी जरूरी सावधानियों के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान पांच गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और पांच बच्चों का अन्नप्राशन कराया गया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चा ही मजबूत परिवार और स्वस्थ समाज की आधारशिला है। अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने लोगों से बच्चों और महिलाओं के पोषण को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने का आह्वान किया।

‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रहा अभियान का आधार
‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम के तहत जिले के सभी 1338 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया गया।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। परिवारों को समझाया गया कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
समापन कार्यक्रम में पूरे पोषण माह के दौरान आयोजित गतिविधियों की झलक भी देखने को मिली। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनियां लगाकर लोगों को स्थानीय और आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थों के माध्यम से पौष्टिक भोजन तैयार करने की जानकारी दी।
रंगोली और पोषण तश्तरी ने खींचा ध्यान
समापन कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने रंगोली, विभिन्न व्यंजन, पोषण तश्तरी और पोषण मटका की प्रदर्शनी लगाई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों को संतुलित और पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में समझाया गया।
पोषण तश्तरी के माध्यम से बताया गया कि भोजन में अनाज, दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का संतुलित समावेश जरूरी है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल कर परिवार अपने खानपान को अधिक पौष्टिक बना सकते हैं।
प्रदर्शनी में श्रीअन्न और मोटे अनाज से तैयार खाद्य सामग्री भी आकर्षण का केंद्र रही। लोगों को मोटे अनाज के पोषण संबंधी महत्व की जानकारी देते हुए इनके नियमित सेवन के लिए प्रेरित किया गया।
गर्भवती महिलाओं को दी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान गर्भवती और धात्री महिलाओं को विशेष रूप से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई। महिलाओं को समय पर टीकाकरण कराने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए जागरूक किया गया।
महिलाओं को एनीमिया से बचाव के उपाय भी बताए गए। उन्हें पौष्टिक भोजन लेने तथा स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान मां के स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं के खानपान और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी जरूरी है।
स्तनपान और बच्चों के पोषण पर जोर
धात्री महिलाओं को स्तनपान के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों के शुरुआती विकास में मां के दूध की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूक किया गया।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अभिभावकों को बच्चों के वजन और लंबाई पर नियमित नजर रखने की सलाह दी। बच्चों में कम वजन और कम लंबाई की समस्या को समय रहते पहचानने तथा जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराने की बात कही गई।
इसके साथ ही बच्चों में बढ़ते मोटापे को लेकर भी जागरूक किया गया। अभिभावकों से बच्चों के भोजन और दिनचर्या पर ध्यान देने की अपील की गई।
पांच गर्भवती महिलाओं की हुई गोदभराई
समापन कार्यक्रम में पांच गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म कराई गई। इस दौरान महिलाओं को स्वस्थ प्रसव और स्वस्थ शिशु के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी गई।
गोदभराई कार्यक्रम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन, नियमित जांच, समय पर टीकाकरण और चिकित्सकीय परामर्श को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं और परिवारों ने भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
पांच बच्चों का कराया अन्नप्राशन
कार्यक्रम के दौरान पांच बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया गया। बच्चों के जीवन में ठोस आहार की शुरुआत के अवसर पर अभिभावकों को बच्चों के भोजन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
उन्हें बताया गया कि बच्चों को उम्र के अनुसार पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन दिया जाना चाहिए। भोजन में विविधता बनाए रखने के साथ साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की दी जानकारी
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना समेत महिलाओं और बच्चों से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। लाभार्थियों को योजनाओं का उद्देश्य और पात्रता के संबंध में जागरूक किया गया, ताकि जरूरतमंद परिवार उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
इसके साथ ही स्वास्थ्य जांच, पोषण पुनर्वास केंद्र में संदर्भन, किशोरी शिक्षा, शाला पूर्व शिक्षा और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध पोषाहार जैसी सेवाओं की जानकारी भी दी गई।
किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी फोकस
कार्यक्रम में किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया। किशोरियों में पोषण की कमी और एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाव के लिए संतुलित आहार और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की आवश्यकता बताई गई।
बच्चों को मोबाइल फोन के सदुपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। अभिभावकों से कहा गया कि बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखें और उन्हें खेलकूद, पढ़ाई तथा रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त समय दें।
हेल्दी बेबी प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित
समापन अवसर पर हेल्दी बेबी प्रतियोगिता आयोजित कर स्वस्थ बच्चों और उनके अभिभावकों को प्रोत्साहित किया गया। प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली माताओं को भी सम्मानित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि परिवारों को लगातार पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का माध्यम हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाओं और सेवाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाने का काम लगातार किया जा रहा है।
1338 केंद्रों पर चला जागरूकता अभियान
जिले में 1338 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूरे पोषण माह के दौरान अलग-अलग गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें पोषण जागरूकता, स्वास्थ्य जांच, बच्चों के विकास की निगरानी, महिलाओं को योजनाओं की जानकारी और समुदाय की भागीदारी जैसी गतिविधियां शामिल रहीं।
अभियान का उद्देश्य केवल कुपोषित बच्चों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि परिवारों को ऐसा खानपान अपनाने के लिए प्रेरित करना भी रहा, जिससे कुपोषण की समस्या को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
समुदाय की भागीदारी पर दिया जोर
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें परिवार, अभिभावक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और पूरा समुदाय मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन, वजन, लंबाई, स्वास्थ्य और व्यवहार में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखाई देने पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से बच्चों को गंभीर कुपोषण की स्थिति में जाने से रोका जा सकता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों को बताया पोषण जागरूकता का प्रमुख माध्यम
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका पर भी जोर दिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां घर-घर तक पहुंचकर महिलाओं और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों की शाला पूर्व शिक्षा के साथ उनके पोषण और विकास की निगरानी भी की जाती है। अधिकारियों ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से समुदाय के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।
अधिकारी और बड़ी संख्या में लाभार्थी रहे मौजूद
समापन कार्यक्रम में जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम सिंह चौहान, जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा, सीडीपीओ गोरखनाथ पांडेय, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। प्रदर्शनी में लगाए गए पोषण व्यंजनों और श्रीअन्न से तैयार खाद्य पदार्थों के बारे में महिलाओं ने जानकारी ली।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जिले में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए परिवार और समुदाय मिलकर काम करेंगे तथा गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

