नई दिल्ली,08 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। देश के तेजी से विस्तार कर रहे पोल्ट्री क्षेत्र में रोजगार, कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और उद्यमिता की नई संभावनाओं को मंच देने के उद्देश्य से 18वां पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 आगामी 24 से 27 नवंबर तक हैदराबाद में आयोजित होगा। भारतीय पोल्ट्री उपकरण निर्माता संघ (आईपीईएमए) की ओर से आयोजित इस एक्सपो को देश के पोल्ट्री उद्योग के प्रमुख आयोजनों में शामिल किया जा रहा है। गुरुवार को द पार्क होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने एक्सपो की तैयारियों, कार्यक्रमों और इसके व्यापक उद्देश्यों की जानकारी दी।

आईपीईएमए अध्यक्ष उदय सिंह बयास ने कहा कि पोल्ट्री इंडिया एक्सपो को केवल मशीनरी, उपकरण और नई तकनीक की प्रदर्शनी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह देश के युवाओं, किसानों, पशुपालकों, विद्यार्थियों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और नए उद्यमियों के लिए रोजगार, प्रशिक्षण, कारोबार और नेटवर्किंग का महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि पोल्ट्री क्षेत्र में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग और बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि भारत में चिकन मीट क्षेत्र लगभग 8 से 10 प्रतिशत और अंडा क्षेत्र 6 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। पोल्ट्री उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, भंडारण और विपणन से जुड़े क्षेत्रों में भी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ छोटे और मध्यम स्तर के कारोबार के अवसर भी विकसित हो रहे हैं।
बयास ने कहा कि पोल्ट्री उद्योग में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने के कारण अब केवल पारंपरिक अनुभव ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं और कामगारों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देना भी जरूरी हो गया है। एक्सपो में इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तकनीकी जानकारी, व्यावहारिक अनुभव और उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
24 नवंबर को होगा नॉलेज डे
आयोजकों के अनुसार, एक्सपो की शुरुआत 24 नवंबर को एचआईसीसी/नोवोटेल, हाईटेक सिटी में आयोजित होने वाले नॉलेज डे सेमिनार से होगी। इस दौरान पोल्ट्री उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक विषयों पर जानकारी साझा करेंगे। किसानों और उद्योग से जुड़े लोगों को उत्पादन लागत कम करने, बेहतर प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, पोषण, जैव सुरक्षा और आधुनिक फार्मिंग तकनीकों के बारे में जानकारी देने पर जोर रहेगा।
इसके बाद 25 से 27 नवंबर तक एचआईटेक्स एग्जिबिशन सेंटर में मुख्य प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यहां देश-विदेश की कंपनियां पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़ी मशीनरी, उपकरण, तकनीक, सेवाएं और समाधान प्रदर्शित करेंगी। एक्सपो में आने वाले प्रतिभागियों को एक ही स्थान पर विभिन्न कंपनियों और तकनीकी समाधानों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
120 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद
आयोजकों ने बताया कि एक्सपो में 120 से अधिक देशों से 550 से ज्यादा प्रदर्शकों और 51 हजार से अधिक उद्योग विशेषज्ञों के पहुंचने की उम्मीद है। इससे भारत के पोल्ट्री उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर मिलने की संभावना है। विदेशी कंपनियों और विशेषज्ञों की भागीदारी से भारतीय उद्यमियों को वैश्विक बाजार, नई तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों को समझने का अवसर भी मिलेगा।
एक्सपो में पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद होगा। निर्माता, आपूर्तिकर्ता, किसान, व्यापारी, विशेषज्ञ, शोधकर्ता और उद्यमी एक-दूसरे से संपर्क स्थापित कर सकेंगे। इससे नए व्यापारिक समझौते, तकनीकी सहयोग और निवेश की संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।
आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष जोर
पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 में आधुनिक तकनीक को प्रमुख स्थान दिया जाएगा। प्रदर्शनी में ब्रीडिंग एवं जेनेटिक्स, हैचरी एवं फार्म ऑटोमेशन, फीड मिलिंग, एडवांस्ड न्यूट्रिशन, पर्यावरण नियंत्रित हाउसिंग एवं वेंटिलेशन, वेटरनरी डायग्नोस्टिक्स, बायोसिक्योरिटी, एग प्रोसेसिंग, मैन्योर मैनेजमेंट और ग्रीन पोल्ट्री सॉल्यूशंस सहित अनेक क्षेत्रों की तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
फार्म ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, श्रम लागत को नियंत्रित करने और फार्म की निगरानी को आसान बनाने के उपायों पर भी चर्चा होगी। वहीं, आधुनिक वेंटिलेशन और पर्यावरण नियंत्रित हाउसिंग तकनीक के जरिए पक्षियों के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने के विकल्पों की जानकारी दी जाएगी।
फीड और पोषण की भूमिका पर भी चर्चा
पोल्ट्री उत्पादन में फीड की लागत महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में फीड मिलिंग, पोषण प्रबंधन और संतुलित आहार से संबंधित नई तकनीकों को भी एक्सपो में प्रमुखता मिलने की संभावना है। विशेषज्ञ बेहतर पोषण के जरिए पक्षियों की वृद्धि, स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा फीड की बर्बादी कम करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
इसी तरह ब्रीडिंग और जेनेटिक्स के क्षेत्र में हो रहे बदलावों से किसानों और पोल्ट्री कारोबारियों को बेहतर उत्पादन क्षमता वाली नस्लों के बारे में जानकारी मिलेगी। हैचरी तकनीक में हो रहे सुधार भी पोल्ट्री उद्योग की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
रोजगार के कई क्षेत्रों में खुलेंगे अवसर
आईपीईएमए के मुताबिक, पोल्ट्री उद्योग केवल फार्म तक सीमित नहीं है। इसके साथ कई सहायक उद्योग और सेवाएं जुड़ी हुई हैं। एक्सपो के दौरान फार्म मैनेजमेंट, फीड मिलिंग, उपकरण निर्माण, मशीनरी संचालन, रखरखाव, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन, फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, बिक्री एवं विपणन, अनुसंधान और एग्री-टेक स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार पोल्ट्री उद्योग की पूरी वैल्यू चेन में बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनते हैं। उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और उपभोक्ता तक उत्पाद पहुंचाने की प्रक्रिया में परिवहन, भंडारण, पैकेजिंग, उपकरण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी सहायता की जरूरत होती है। ऐसे में इस क्षेत्र का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवाओं और विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी मंच
आयोजकों ने एक्सपो को युवाओं और विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया है। कृषि, पशुपालन, वेटरनरी साइंस, फूड टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और एग्री-टेक से जुड़े विद्यार्थी उद्योग की वास्तविक जरूरतों को समझ सकेंगे। उन्हें कंपनियों, विशेषज्ञों और उद्यमियों से संवाद करने का अवसर मिलेगा।
एग्री-टेक क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए भी यह आयोजन महत्वपूर्ण हो सकता है। डिजिटल फार्मिंग, डेटा आधारित फार्म मैनेजमेंट, ऑटोमेशन, पशु स्वास्थ्य निगरानी और स्मार्ट उपकरणों जैसे क्षेत्रों में नए कारोबारी मॉडल विकसित होने की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
किसानों को मिलेगी नई तकनीक की जानकारी
पोल्ट्री किसानों के लिए भी एक्सपो में आधुनिक तकनीकों को समझने का अवसर रहेगा। छोटे और मध्यम किसान बेहतर फार्म प्रबंधन, रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा, फीड प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता से संबंधित तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे उत्पादन लागत कम करने और फार्म की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोल्ट्री व्यवसाय में सफलता के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बीमारी की रोकथाम, स्वच्छता, तापमान नियंत्रण, उचित पोषण, पानी की गुणवत्ता और फार्म प्रबंधन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। एक्सपो में इन सभी पहलुओं को तकनीकी दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलेगा।
बायोसिक्योरिटी और पशु स्वास्थ्य पर फोकस
पोल्ट्री उद्योग में बायोसिक्योरिटी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। किसी भी बीमारी का प्रकोप फार्म की उत्पादकता और किसान की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में आधुनिक बायोसिक्योरिटी उपायों, वेटरनरी डायग्नोस्टिक्स और रोगों की शुरुआती पहचान से जुड़ी तकनीकों को भी एक्सपो में प्रदर्शित किया जाएगा।
पशु चिकित्सकों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए यह मंच नई डायग्नोस्टिक तकनीकों और उपचार संबंधी प्रगति को समझने का अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही किसानों को भी बीमारी की रोकथाम और समय पर पहचान के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।
ग्रीन पोल्ट्री और पर्यावरण संरक्षण
पोल्ट्री उद्योग में पर्यावरणीय स्थिरता को लेकर भी चर्चा बढ़ रही है। एक्सपो में ग्रीन पोल्ट्री सॉल्यूशंस, मैन्योर मैनेजमेंट, ऊर्जा दक्षता और संसाधनों के बेहतर उपयोग से संबंधित तकनीकों को प्रदर्शित किया जाएगा। पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले अपशिष्ट के उचित प्रबंधन और उसके उपयोग के विकल्पों पर भी उद्योग विशेषज्ञ जानकारी साझा कर सकते हैं।
मैन्योर मैनेजमेंट के बेहतर तरीकों से अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने, स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है। आने वाले समय में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल पोल्ट्री उत्पादन की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
कोल्ड चेन और फूड प्रोसेसिंग में भी संभावनाएं
पोल्ट्री क्षेत्र के विस्तार के साथ फूड प्रोसेसिंग और कोल्ड चेन की भूमिका भी बढ़ रही है। चिकन मीट और अंडे जैसे उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक तरीके से भंडारण, प्रसंस्करण और परिवहन जरूरी है। एक्सपो में इन क्षेत्रों से जुड़ी तकनीकों और उपकरणों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कोल्ड चेन नेटवर्क और आधुनिक फूड प्रोसेसिंग तकनीक से उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ बाजार का विस्तार किया जा सकता है। इससे किसानों और उत्पादकों को बड़े बाजारों तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
आयोजकों ने बताया कि एक्सपो को 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पोल्ट्री संगठनों, 40 से अधिक राष्ट्रीय पोल्ट्री निकायों और अंतरराष्ट्रीय पोल्ट्री मीडिया का समर्थन प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भागीदारी से भारतीय पोल्ट्री उद्योग को वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
विदेशी विशेषज्ञों और कंपनियों की मौजूदगी से तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान, निवेश, संयुक्त परियोजनाओं और व्यापारिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे भारत के पोल्ट्री उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
‘वन नेशन, वन एक्सपो’ थीम पर आयोजन
इस वर्ष एक्सपो ‘वन नेशन, वन एक्सपो’ थीम के तहत आयोजित किया जा रहा है। इस थीम के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में फैले पोल्ट्री उद्योग के अलग-अलग वर्गों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों का लक्ष्य किसानों से लेकर बड़े उद्योग समूहों और शोध संस्थानों तक सभी हितधारकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है।
पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन से नई तकनीक और व्यावसायिक जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलती है। साथ ही उद्योग की जरूरतों और चुनौतियों को नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के सामने रखने का अवसर भी मिलता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ
पोल्ट्री व्यवसाय का ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान है। छोटे किसान और ग्रामीण उद्यमी सीमित निवेश के साथ भी पोल्ट्री से आय के स्रोत विकसित कर सकते हैं। यदि उन्हें आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, बाजार की जानकारी और वित्तीय प्रबंधन का उचित ज्ञान मिले तो इस क्षेत्र में उद्यमिता की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।
इसी दृष्टि से एक्सपो को केवल बड़े उद्योगों तक सीमित न रखकर छोटे किसानों, ग्रामीण युवाओं और नए उद्यमियों के लिए भी उपयोगी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है।
तकनीक और कौशल के बीच बनेगा सेतु
आयोजकों के अनुसार, पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य तकनीक और मानव कौशल के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। नई मशीनें और आधुनिक तकनीक तभी प्रभावी साबित हो सकती हैं जब उन्हें संचालित करने और उनका सही उपयोग करने वाले प्रशिक्षित लोग उपलब्ध हों।
इसलिए एक्सपो में तकनीकी जानकारी के साथ कौशल विकास को भी महत्व दिया जा रहा है। इससे उद्योग की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में पोल्ट्री क्षेत्र में तकनीकी दक्षता रखने वाले कर्मचारियों, सुपरवाइजरों, फार्म मैनेजरों और विशेषज्ञों की मांग बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 को भारत के पोल्ट्री उद्योग के लिए तकनीक, कारोबार, रोजगार, प्रशिक्षण और उद्यमिता का व्यापक मंच बनाने की तैयारी है। 24 से 27 नवंबर तक हैदराबाद में होने वाला यह आयोजन किसानों, युवाओं, उद्यमियों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक साथ लाकर पोल्ट्री क्षेत्र की नई दिशा और संभावनाओं पर चर्चा का अवसर देगा। आयोजकों को उम्मीद है कि एक्सपो से नई तकनीकों के प्रसार के साथ रोजगार, निवेश, कौशल विकास और कारोबार के नए रास्ते भी मजबूत होंगे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

