नई दिल्ली, 06 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। भारत अब केवल दुनिया के बड़े केमिकल बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि आने वाले वर्षों में खुद को बैटरी केमिकल, स्पेशलिटी केमिकल और सेमीकंडक्टर केमिकल के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार का फोकस रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार, अत्याधुनिक तकनीक और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने पर है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने सोमवार को कहा कि सरकार रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को अनुसंधान, विकास और नवाचार से जुड़ी योजनाओं में प्राथमिकता दिलाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य में केमिकल उद्योग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
मुंबई में 22 से 24 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘इंडिया केम 2026’ के लॉन्च कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा कि भारत के पास केमिकल उद्योग में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश में उपलब्ध विशाल बाजार, कुशल मानव संसाधन, बढ़ती औद्योगिक मांग और सरकार की विभिन्न उत्पादन एवं विनिर्माण केंद्रित पहलों को एक साथ जोड़ा जाए तो भारतीय केमिकल उद्योग के लिए विकास की संभावनाएं बेहद व्यापक हैं।
230 अरब डॉलर का उद्योग 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत का केमिकल उद्योग वर्तमान में करीब 230 अरब डॉलर का है। सरकार की विभिन्न पहलों और उद्योग जगत के निवेश को गति मिलने पर यह क्षेत्र 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन जैसी पहलों को केमिकल सेक्टर की जरूरतों के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। इन क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यक रसायनों और विशेष सामग्री की घरेलू मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है।
बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में केमिकल उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ केमिकल उद्योग के लिए भी बड़े अवसर पैदा होंगे।
बैटरी और सेमीकंडक्टर केमिकल में वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य
भारत की औद्योगिक रणनीति अब पारंपरिक केमिकल उत्पादन से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू और स्पेशलिटी केमिकल के निर्माण पर भी जोर दे रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत बैटरी केमिकल, स्पेशलिटी केमिकल और सेमीकंडक्टर केमिकल के क्षेत्र में दुनिया का प्रमुख विनिर्माण केंद्र बन सकता है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आधुनिक अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा भंडारण प्रणाली, सेमीकंडक्टर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन सभी क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले विशेष रसायनों की आवश्यकता होती है।
भारत यदि इन आवश्यकताओं के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करता है तो इससे एक ओर आयात पर निर्भरता कम होगी, वहीं दूसरी ओर देश वैश्विक सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
अनुसंधान और विकास में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर
अनुप्रिया पटेल ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। वैश्विक बाजार में टिकाऊ प्रतिस्पर्धा के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट, तकनीकी नवाचार और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर ध्यान देना जरूरी होगा।
उन्होंने बताया कि 2012 से 2022 के बीच वैश्विक केमिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट खर्च 38 अरब डॉलर से बढ़कर 71 अरब डॉलर हो गया। इसके बावजूद इस वैश्विक आरएंडडी खर्च में भारत की हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत ही है।
सरकार का प्रयास है कि उद्योग अनुसंधान एवं विकास पर ज्यादा निवेश करे और देश में ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो, जिसमें नई तकनीक विकसित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर की प्रतिभाओं को भारत की ओर आकर्षित किया जा सके।
इंडिया केम में आरएंडडी को बढ़ावा देने की तैयारी
पटेल ने कहा कि करीब 1 लाख करोड़ रुपये के प्रावधान वाली इंडिया केम पहल में रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को अनुसंधान, विकास और नवाचार से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इससे उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार चाहती है कि भारतीय कंपनियां केवल दूसरे देशों से तकनीक लेकर उत्पादन करने के बजाय अपनी तकनीक विकसित करें और वैश्विक बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार करें।
तीन केमिकल पार्कों पर 4,500 करोड़ रुपये का निवेश
रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार करने के उद्देश्य से सरकार तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही है।
रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के सचिव तेजवीर सिंह ने बताया कि प्रत्येक केमिकल पार्क के लिए केंद्र सरकार की ओर से 1,000 करोड़ रुपये और संबंधित राज्य सरकार की ओर से 500 करोड़ रुपये का योगदान प्रस्तावित है।
इस हिसाब से तीनों केमिकल पार्कों के लिए कुल 4,500 करोड़ रुपये के सरकारी निवेश का प्रावधान प्रस्तावित है।
इन पार्कों में कंपनियों को प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के साथ विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए जमीन, आधारभूत सुविधाओं और उत्पादन से जुड़ी शुरुआती बाधाओं को कम करना है, ताकि वे अपेक्षाकृत कम समय में अपनी उत्पादन इकाइयां शुरू कर सकें।
प्लग-एंड-प्ले मॉडल से घट सकती है उत्पादन की लागत
केमिकल उद्योग में उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए कई प्रकार के बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। यदि औद्योगिक पार्क में पहले से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों तो कंपनियों को अलग-अलग स्तर पर बुनियादी ढांचा विकसित करने में कम समय और संसाधन लगाने पड़ेंगे।
सरकार की योजना का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को आसान बनाना है। इससे नए निवेशकों के लिए भारत में उत्पादन इकाई स्थापित करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है और घरेलू केमिकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में विस्तार की संभावना बढ़ सकती है।
आयात निर्भरता घटाने पर सरकार का फोकस
केमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन पर भी जोर दे रही है। रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग इस दिशा में डीपीआईआईटी के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इसका मूल उद्देश्य ऐसे रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का देश में उत्पादन बढ़ाना है, जिनके लिए वर्तमान में आयात पर निर्भरता अधिक है।
घरेलू उत्पादन बढ़ने से देश की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ सकती है। साथ ही इससे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को आवश्यक कच्चे माल और इंटरमीडिएट उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
उद्योग ने बताया—मांग की कमी नहीं, आपूर्ति क्षमता बढ़ाना चुनौती
उद्योग जगत ने भी भारतीय केमिकल सेक्टर में मौजूद संभावनाओं को रेखांकित किया है। फिक्की नेशनल पेट्रोकेमिकल्स एंड प्लास्टिक्स कमेटी के चेयरमैन प्रभ दास ने कहा कि क्षेत्र में मांग की कमी नहीं है, बल्कि बड़ी चुनौती पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध कराने की है।
उनके अनुसार, यदि देश में उत्पादन क्षमता और बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित किया जाता है तो बढ़ती घरेलू और वैश्विक मांग को भारतीय कंपनियां बड़े अवसर में बदल सकती हैं।
वहीं फिक्की केमिकल्स कमेटी के सह-अध्यक्ष एस. गणेशकुमार ने कहा कि भारतीय केमिकल सेक्टर बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश आकर्षित करने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का लाभ उठाने की क्षमता रखता है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत वैश्विक केमिकल उद्योग के लिए एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
विदेशी निवेश और वैश्विक साझेदारी पर नजर
भारत की रणनीति केवल घरेलू कंपनियों तक सीमित नहीं है। सरकार वैश्विक कंपनियों और निवेशकों को भी भारत में उत्पादन और तकनीकी साझेदारी के लिए आकर्षित करना चाहती है।
इसके लिए बेहतर बुनियादी ढांचा, अनुसंधान एवं विकास, कुशल मानव संसाधन और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना महत्वपूर्ण होगा। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, बैटरी और स्पेशलिटी केमिकल जैसे उभरते क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी भारत के लिए तकनीकी और निवेश दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है।
22 से 24 अक्टूबर तक मुंबई में होगा इंडिया केम 2026
भारत के केमिकल सेक्टर के इस महत्वाकांक्षी रोडमैप को आगे बढ़ाने के लिए इंडिया केम 2026 को एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन 22 से 24 अक्टूबर तक मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में होगा।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘एडवांटेज भारत: एक उभरता हुआ ग्लोबल केमिकल्स हब’ रखी गई है। कार्यक्रम में उद्योग, निवेश, तकनीक, अनुसंधान और वैश्विक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान और रूस सहित विभिन्न वैश्विक मंचों की भागीदारी से निवेश और बी2बी साझेदारी को गति देने की कोशिश की जाएगी।
वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ाने की कोशिश
दुनिया में केमिकल उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला लगातार बदल रही है। ऐसे समय में भारत के सामने एक बड़ा अवसर यह है कि वह अपनी विशाल घरेलू मांग और विनिर्माण क्षमता का इस्तेमाल करते हुए वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाए।
इसके लिए केवल बड़े उत्पादन संयंत्र लगाना पर्याप्त नहीं होगा। कच्चे माल की उपलब्धता, तकनीकी क्षमता, अनुसंधान, पर्यावरणीय मानकों, कुशल मानव संसाधन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी समानांतर विकास जरूरी होगा।
सरकार की मौजूदा पहलों में इन सभी पहलुओं को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाई दे रही है।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में केमिकल सेक्टर की अहम भूमिका
2047 तक भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। यह उद्योग अकेले ही कई अन्य विनिर्माण क्षेत्रों के लिए आधार तैयार करता है।
बैटरी से लेकर सेमीकंडक्टर और ऑटोमोबाइल से लेकर फार्मास्यूटिकल्स तक, अनेक आधुनिक उद्योगों की उत्पादन श्रृंखला में केमिकल उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ऐसे में भारत यदि अनुसंधान और नवाचार की अपनी क्षमता बढ़ाने, घरेलू उत्पादन को मजबूत करने, आयात निर्भरता घटाने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने में सफल रहता है तो केमिकल सेक्टर देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के प्रमुख इंजन में बदल सकता है।
अनुप्रिया पटेल के संदेश का मूल सार भी यही रहा कि भारत को केवल केमिकल उत्पादों का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि दुनिया का प्रमुख केमिकल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है। 2047 के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में यह बदलाव देश की औद्योगिक क्षमता और वैश्विक आर्थिक भूमिका—दोनों को नई दिशा दे सकता है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

