खेकड़ा,29 जुलाई 2026 (यूटीएन)। देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने के राष्ट्रीय अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को कस्बे के एमएम डिग्री कॉलेज में एक व्यापक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेटों, शिक्षकों और कॉलेज स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा समाज को टीबी के प्रति जागरूक बनाने और सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार और सामाजिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार तोमर ने कहा कि क्षय रोग आज भी देश के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन सही जानकारी, समय पर जांच और नियमित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि टीबी कोई लाइलाज या अभिशाप जैसी बीमारी नहीं है, बल्कि आधुनिक चिकित्सा और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की सहायता से इसका सफल इलाज संभव है। सबसे बड़ी आवश्यकता लोगों में जागरूकता पैदा करने और मरीजों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की है।
उन्होंने बताया कि टीबी का संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या थूकने से फैलता है। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में अत्यधिक पसीना आना या भूख कम लगने जैसी समस्याएं हों तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और उपचार शुरू होने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है तथा संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है।
प्राचार्य ने कहा कि सरकार द्वारा टीबी मरीजों को नि:शुल्क जांच, दवाइयां और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद कई लोग जानकारी के अभाव, लापरवाही या सामाजिक झिझक के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार, पड़ोस और गांव-मोहल्लों में लोगों को टीबी के लक्षणों और उपचार की जानकारी दें ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि युवाओं की भूमिका किसी भी सामाजिक अभियान की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि छात्र और एनसीसी कैडेट अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाएं, लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में बताएं और टीबी मरीजों के प्रति भेदभाव न करने का संदेश दें तो देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य जल्द हासिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि टीबी के मरीजों को चिकित्सकों की सलाह के अनुसार पूरा दवा कोर्स करना बेहद जरूरी है। कई बार मरीज कुछ दिन दवा लेने के बाद स्वयं को स्वस्थ महसूस करके उपचार बीच में ही छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा उभर सकती है और दवाइयों का असर भी कम हो सकता है। इसलिए निर्धारित अवधि तक नियमित दवा लेना ही पूर्ण स्वस्थ होने का सबसे प्रभावी तरीका है।
एनसीसी कैडेटों ने भी कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि वे गांवों और कस्बों में लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करेंगे। कैडेटों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, स्वच्छता बनाए रखने और जरूरतमंद लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा लेने के लिए प्रेरित करने का संकल्प भी लिया।
कॉलेज के शिक्षकों ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी विद्यार्थियों का कर्तव्य है। स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी समाज को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
गोष्ठी के अंत में सभी छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेटों तथा शिक्षकों ने सामूहिक रूप से "टीबी मुक्त भारत" का संकल्प दोहराया। सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक लोगों को क्षय रोग के प्रति जागरूक करने, समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करने तथा टीबी मरीजों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने की शपथ ली।
कार्यक्रम का संचालन कैप्टन सुनील धीमान ने किया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों को अभियान की रूपरेखा से अवगत कराते हुए कहा कि जनभागीदारी और जागरूकता ही टीबी उन्मूलन का सबसे प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर कॉलेज परिवार ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

