खेकड़ा, 01 अगस्त 2026 (यूटीएन)। बड़ागांव स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन साधुवृत्ति आश्रम एक बार फिर धर्म, साधना और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनने जा रहा है। आगामी 3 अगस्त से यहां वर्षायोग-2026 का शुभारंभ होगा। वर्षायोग के पावन अवसर पर आश्रम परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचनों, स्वाध्याय और आध्यात्मिक साधना का विशेष क्रम चलेगा। आयोजन को लेकर आश्रम समिति और जैन समाज ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। क्षेत्र सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
आश्रम समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सोमवार, 3 अगस्त को दोपहर 4 बजे पूज्य आर्यिका दर्शन्मति माताजी के पावन सान्निध्य में मंगल कलश स्थापना के साथ वर्षायोग का विधिवत शुभारंभ होगा। मंगलाचरण, धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना की जाएगी, जिसके बाद वर्षायोग का आधिकारिक आरंभ होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाज के गणमान्य लोग और विभिन्न क्षेत्रों से आए धर्मप्रेमी उपस्थित रहेंगे।
समिति के अनुसार वर्षायोग जैन धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक परंपरा है। वर्षा ऋतु में साधु-साध्वियां एक ही स्थान पर विराजमान होकर धर्म साधना, तप, स्वाध्याय और प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त करते हैं और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।
वर्षायोग के दौरान प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, स्वाध्याय, सामूहिक प्रार्थना, ध्यान, भक्ति आराधना और आध्यात्मिक चिंतन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आर्यिका दर्शन्मति माताजी अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म, अहिंसा, संयम, तप, त्याग, सदाचार और आत्मशुद्धि का संदेश देंगी। श्रद्धालुओं को जैन दर्शन के सिद्धांतों, आत्मकल्याण और नैतिक जीवन के महत्व के बारे में विस्तार से बताया जाएगा।
आश्रम समिति ने बताया कि वर्षायोग के दौरान विशेष रूप से युवाओं और बच्चों के लिए भी धार्मिक एवं संस्कार आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें जैन संस्कृति, नैतिक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जीव दया, नशामुक्ति और सामाजिक सद्भाव जैसे विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ सके।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आश्रम परिसर में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा सहायता और वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की भी समुचित व्यवस्था की जा रही है। आयोजन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए स्वयंसेवकों की अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जो पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगी।
आश्रम समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्षायोग के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिए सभी कार्यक्रम समयबद्ध और अनुशासित ढंग से संपन्न कराए जाएंगे। समिति ने समाज के लोगों से समय से पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता निभाने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि वर्षायोग केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण अवसर भी है। इस दौरान श्रद्धालु सांसारिक व्यस्तताओं से कुछ समय निकालकर धर्म साधना, ध्यान और स्वाध्याय के माध्यम से मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
समिति का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज में अहिंसा, सत्य, संयम, करुणा, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्षायोग के माध्यम से समाज में धार्मिक चेतना का प्रसार होगा और लोगों को सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी।
आयोजन समिति ने जैन समाज सहित सर्वधर्म के लोगों से भी कार्यक्रम में शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।
उनका कहना है कि वर्षायोग के दौरान आश्रम का वातावरण पूरी तरह धर्ममय रहेगा और प्रतिदिन होने वाले प्रवचन एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। पूरे आयोजन के सफल संचालन के लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और आश्रम परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

