मथुरा,23 जुलाई 2026 (यूटीएन)। जिले में संचालित मोबाइल वेटरिनरी यूनिट (एमवीयू) के कर्मचारियों का पिछले तीन माह से वेतन लंबित होने का मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। गुरुवार को कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और मई, जून एवं जुलाई माह का बकाया वेतन जल्द जारी कराने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार तीन महीने से वेतन न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि वे पशुपति नाथ कंपनी, आगरा के माध्यम से मोबाइल वेटरिनरी यूनिट में कार्यरत हैं और जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे प्रतिदिन गांव-गांव जाकर बीमार एवं घायल पशुओं का उपचार, प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, रोगों की रोकथाम, पशुपालकों को परामर्श तथा सरकार की विभिन्न पशु स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनके परिश्रम का समय पर पारिश्रमिक नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
कर्मचारियों ने बताया कि लगातार तीन महीने से वेतन न मिलने के कारण घर का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया, बिजली-पानी के बिल, बैंक ऋण की किस्तें, दवाइयों का खर्च तथा अन्य दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो गया है। कई कर्मचारियों को परिवार का खर्च चलाने के लिए उधार लेने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी का असर कर्मचारियों के मानसिक तनाव और कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा है। आर्थिक असुरक्षा के कारण कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, जबकि वे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
कर्मचारियों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब वेतन भुगतान में देरी हुई हो। इससे पहले भी कई बार भुगतान समय पर नहीं होने की समस्या सामने आ चुकी है। इस संबंध में उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) तथा अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को भी लिखित शिकायत देकर समस्या से अवगत कराया था। अधिकारियों की ओर से शीघ्र भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने कहा कि यदि शीघ्र वेतन जारी नहीं किया गया तो मोबाइल वेटरिनरी यूनिट की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर पशुपालकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों पर पड़ेगा, जो आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए इन यूनिटों पर निर्भर हैं।
उन्होंने बताया कि एमवीयू के माध्यम से जिले में कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission), लंपी स्किन डिजीज (LSD) नियंत्रण अभियान, राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP), खुरपका-मुंहपका (FMD) टीकाकरण, ब्रुसेलोसिस नियंत्रण, पशुओं का नियमित टीकाकरण, उपचार, कृत्रिम गर्भाधान संबंधी सेवाएं तथा पशुपालकों को तकनीकी परामर्श जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल हैं।
कर्मचारियों ने आशंका जताई कि यदि आर्थिक समस्याओं के कारण सेवाएं प्रभावित होती हैं तो सरकारी योजनाओं के लक्ष्यों की प्राप्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता कम होने से पशुपालकों को समय पर उपचार नहीं मिल पाएगा, जिससे पशुधन की उत्पादकता और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। ऐसे में उन योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। यदि कर्मचारियों को नियमित भुगतान नहीं मिलेगा तो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाइयां आना स्वाभाविक है।
कर्मचारियों ने जिलाधिकारी से मांग की कि संबंधित कंपनी और विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए समयबद्ध भुगतान की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में यह भी आग्रह किया गया कि यदि किसी प्रशासनिक या वित्तीय प्रक्रिया के कारण भुगतान में विलंब हो रहा है तो उसका शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि कर्मचारियों को हर माह निर्धारित समय पर वेतन प्राप्त हो सके। कर्मचारियों ने कहा कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, लेकिन लगातार वेतन न मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग और एजेंसी को आवश्यक निर्देश जारी करेगा, जिससे लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कार्य बाधित करना नहीं है, बल्कि अपनी जायज मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। हालांकि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो मोबाइल वेटरिनरी यूनिट की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका से भी उन्होंने इनकार नहीं किया।
जिले के पशुपालकों का भी मानना है कि मोबाइल वेटरिनरी यूनिट ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में इन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाना आवश्यक है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी व्यवधान के पशुपालकों तक पहुंचता रहे।

