नई दिल्ली,26 अगस्त 2026 (यूटीएन)। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और कला की रंगीन छटा एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली में देखने को मिलेगी। राजस्थानी अकादमी की ओर से शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित रशियन सेंटर ऑफ साइंस एंड कल्चर, फिरोजशाह रोड में तीन प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर 34वीं राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता, 10वां सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार और 14वीं राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
आयोजन का उद्देश्य राजस्थान की लोक संस्कृति को राजधानी में व्यापक मंच उपलब्ध कराना, नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और प्रवासी राजस्थानियों के बीच अपनी मातृभूमि की कला एवं परंपराओं के प्रति जुड़ाव को मजबूत करना है। कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की लोकनृत्य शैलियों, लोकसंगीत, पारंपरिक वेशभूषा और चित्रकला की विविधता देखने को मिलेगी।
दिल्ली में दिखेगी राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता
राजस्थानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि राजस्थान की लोक संस्कृति देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहां के लोकनृत्य, लोकगीत, लोकवाद्य, चित्रकला और पारंपरिक कलाएं सदियों से प्रदेश की जीवनशैली और सामाजिक परंपराओं को अभिव्यक्त करती रही हैं।
उन्होंने कहा कि अकादमी का प्रयास केवल इन परंपराओं को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि इनके संरक्षण और संवर्धन के साथ नई प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना भी है। इसी सोच के तहत विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं और सम्मान समारोहों का आयोजन लगातार किया जा रहा है।
राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम राजस्थान से बाहर रहने वाले लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा। दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में राजस्थानी परिवार रहते हैं, जिनके लिए ऐसे आयोजन अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को करीब से महसूस करने का अवसर प्रदान करते हैं।
लोकनृत्य प्रतियोगिता में दिखेगा राजस्थान का रंग
34वीं राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगी। इसमें राजस्थान के विभिन्न अंचलों की लोकनृत्य परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के जरिए राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक विशेषताओं को जीवंत करेंगे।
राजस्थानी लोकनृत्य अपनी विशेष वेशभूषा, पारंपरिक आभूषण, लोकधुनों और लयबद्ध नृत्य शैलियों के कारण अलग पहचान रखते हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों में राजस्थान के ग्रामीण जीवन, लोकविश्वास, उत्सवों और सामाजिक परंपराओं की झलक दिखाई देने की उम्मीद है।
नृत्य प्रतियोगिता के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ पारंपरिक नृत्य शैलियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा।
लोकधुनों और पारंपरिक वेशभूषा का आकर्षण
राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान में लोकसंगीत और पारंपरिक वेशभूषा की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोकनृत्य प्रस्तुतियों के दौरान रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक आभूषण और लोकवाद्यों की धुनें कार्यक्रम के वातावरण को राजस्थानी रंग से भर देंगी।
राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों की नृत्य शैलियों में स्थानीय जीवन और परंपराओं का प्रभाव दिखाई देता है। ऐसे में एक ही मंच पर अलग-अलग लोकनृत्यों की प्रस्तुति दर्शकों के लिए राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को समझने का अनूठा अवसर होगी।
सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार से सेवा का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान 10वें सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार का भी आयोजन किया जाएगा। यह सम्मान उन प्रतिभाओं और व्यक्तित्वों को प्रदान करने की परंपरा से जुड़ा है, जिन्होंने समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है तथा अपने माता-पिता की निस्वार्थ भाव से सेवा करने का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा कि माता-पिता की सेवा भारतीय समाज की महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य परंपरा रही है। ऐसे लोगों को सम्मानित करने से समाज में सेवा, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों के प्रति सकारात्मक संदेश जाता है।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों के साथ सामाजिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना भी अकादमी की गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रवण कुमार पुरस्कार इसी भावना को आगे बढ़ाने का माध्यम है।
चित्रकला प्रतियोगिता में कैनवास पर उतरेगा राजस्थान
आयोजन के दौरान 14वीं राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित होगी। इसमें कलाकार राजस्थान के लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत को अपनी कल्पना और कला के माध्यम से कैनवास पर उकेरेंगे।
चित्रों में राजस्थान के ग्रामीण परिवेश, लोकदेवताओं, मेलों, त्योहारों, पारंपरिक जीवनशैली, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल सकती है।
राजस्थानी चित्रकला अपनी रंग योजना, विषय-वस्तु और लोक जीवन से जुड़े चित्रांकन के लिए विशेष पहचान रखती है। प्रतियोगिता के जरिए इस कला शैली को नई पीढ़ी के कलाकारों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
युवा कलाकारों को मिलेगा प्रोत्साहन
चित्रकला प्रतियोगिता का एक प्रमुख उद्देश्य युवा और उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। कई प्रतिभाशाली कलाकार संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण व्यापक स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पाते। ऐसे आयोजन उन्हें कला जगत से जुड़े लोगों के सामने अपनी रचनात्मकता प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं।
अकादमी का प्रयास है कि युवा कलाकार राजस्थानी लोक कला की परंपरागत शैली को समझते हुए उसे आधुनिक रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएं। इससे परंपरा और आधुनिकता के बीच भी एक नया संवाद स्थापित हो सकता है।
संस्कृति संरक्षण पर जोर
डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा कि राजस्थान केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है। उसकी पहचान लोकभाषा, लोकगीत, लोकसंगीत, लोककला, खान-पान, वेशभूषा, सामाजिक परंपराओं और जीवन-मूल्यों से मिलकर बनी है।
उनके मुताबिक, बदलते समय में इन परंपराओं को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। वैश्वीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण नई पीढ़ी का अपनी पारंपरिक संस्कृति से संपर्क कई बार कम हो जाता है। ऐसे में सांस्कृतिक कार्यक्रम युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने की पहल
आज के दौर में डिजिटल माध्यम और आधुनिक मनोरंजन के विकल्प तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके बीच पारंपरिक लोककलाओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना बड़ी चुनौती भी है। राजस्थानी अकादमी ऐसे आयोजनों के जरिए इस चुनौती का सामना करने की कोशिश कर रही है।
लोकनृत्य प्रतियोगिता में युवाओं की भागीदारी और चित्रकला प्रतियोगिता में नई प्रतिभाओं को मंच देकर उन्हें राजस्थान की कला और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे लोककलाओं को केवल संग्रहालयों या पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जीवंत मंच पर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
प्रवासी राजस्थानियों के लिए भावनात्मक जुड़ाव
दिल्ली में रहने वाले प्रवासी राजस्थानियों के लिए यह आयोजन सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण होगा। अपने गृह प्रदेश से दूर रहने वाले परिवारों को ऐसे कार्यक्रमों में अपनी भाषा, संगीत, नृत्य, कला और परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।
बच्चों और युवाओं के लिए भी यह अवसर खास होगा, क्योंकि वे अपने परिवार और समाज की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
कला प्रेमियों को मिलेगा नया अनुभव
कार्यक्रम केवल राजस्थान से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। अन्य राज्यों के कला एवं संस्कृति प्रेमियों के लिए भी यह राजस्थान की विविध लोक परंपराओं को करीब से देखने और समझने का अवसर होगा।
लोकनृत्य, चित्रकला और सम्मान समारोह को एक ही आयोजन में शामिल किए जाने से कार्यक्रम का दायरा व्यापक हो गया है। इसमें जहां मंच पर नृत्य और संगीत का आकर्षण होगा, वहीं चित्रकला के माध्यम से राजस्थान की दृश्य कला को समझने का अवसर मिलेगा।
लोककला को मिले व्यापक मंच की जरूरत
राजस्थान की लोककलाएं लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों और कला प्रेमियों को आकर्षित करती रही हैं। लेकिन आधुनिक समय में इन कलाओं को जीवित रखने के लिए कलाकारों को नियमित मंच, प्रोत्साहन और नई पीढ़ी तक पहुंच जरूरी है।
राजस्थानी अकादमी का यह आयोजन इसी दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है। प्रतियोगिताओं के माध्यम से कलाकारों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा होने के साथ उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने की संभावना भी बढ़ती है।
दिल्ली में बनेगा राजस्थान जैसा माहौल
9 अक्टूबर को रशियन सेंटर ऑफ साइंस एंड कल्चर में होने वाला आयोजन राजधानी में राजस्थान के सांस्कृतिक रंगों को जीवंत करेगा। लोकनृत्य की थिरकन, पारंपरिक संगीत की धुन, रंग-बिरंगी वेशभूषा और कैनवास पर उभरती राजस्थान की तस्वीरें मिलकर कार्यक्रम को खास बनाएंगी।
आयोजकों का मानना है कि संस्कृति का संरक्षण तभी संभव है जब उसे अगली पीढ़ी के साथ साझा किया जाए। इसी उद्देश्य के साथ अकादमी लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जहां कलाकारों को मंच और दर्शकों को अपनी समृद्ध विरासत से रूबरू होने का अवसर मिले।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा कि राजस्थानी अकादमी राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को देश की राजधानी में मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। लोककला और लोक परंपराओं को सम्मान देकर ही उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाली कड़ी है। जब युवा पीढ़ी लोकनृत्य, चित्रकला, लोकसंगीत और पारंपरिक मूल्यों से जुड़ती है तो सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा मिलती है।
9 अक्टूबर को रंग-बिरंगी सांस्कृतिक शाम
कुल मिलाकर, 9 अक्टूबर को होने वाला यह आयोजन राजधानी दिल्ली में राजस्थान की कला और संस्कृति का एक व्यापक उत्सव बनने जा रहा है। 34वीं लोक नृत्य प्रतियोगिता, 10वां सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार और 14वीं राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से कला, प्रतिभा, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। राजस्थानी अकादमी को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में कला प्रेमी, राजस्थान से जुड़े परिवार, युवा कलाकार और संस्कृति के प्रति रुचि रखने वाले लोग इस आयोजन में शामिल होंगे।
दिल्ली में होने वाला यह कार्यक्रम न केवल राजस्थान की रंग-बिरंगी लोक विरासत की झलक प्रस्तुत करेगा, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने, लोककलाओं को बचाने और आने वाली पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने का संदेश भी देगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

