नई दिल्ली,24 अगस्त 2026 (यूटीएन)। जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़ी शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 18 अगस्त को दिए गए आदेश के अनुरूप कमेटी को महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित यौन हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अन्य प्रकार की हिंसा से संबंधित शिकायतों पर विशेष ध्यान देना होगा। अदालत ने कमेटी से जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है।
20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद सामने आया मामला
मामला 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान सामने आया। प्रदर्शन में शामिल कुछ महिला प्रतिभागियों ने पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर दुर्व्यवहार, छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इन आरोपों का उल्लेख करते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने अदालत को बताया कि प्रदर्शन में शामिल महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।
अदालत के समक्ष मामले का उल्लेख होने के बाद इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
अलग रिट याचिका भी हुई दाखिल
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर एक अलग रिट याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका के संदर्भ में हाई-पावर्ड कमेटी को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतों को सामने लाने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया तैयार की जाएगी। कमेटी के अध्यक्ष को शिकायतें प्राप्त करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है।
नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायत दर्ज कराने से संबंधित प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि संबंधित लोग निर्धारित माध्यम से अपनी शिकायतें कमेटी तक पहुंचा सकें।
पांच सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी गठित की है। कमेटी का दायरा केवल महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों तक सीमित नहीं है।
कमेटी को छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए हिंसा के आरोपों की जांच करनी है। इस दौरान घटनाओं की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के आरोप और मौके पर मौजूद परिस्थितियों का परीक्षण किया जाएगा।
कमेटी को तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी, ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतें सर्वोच्च प्राथमिकता पर
सुप्रीम कोर्ट ने महिला प्रदर्शनकारियों से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। इनमें कथित यौन हिंसा, छेड़छाड़, उत्पीड़न, लक्षित हिंसा और अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार के आरोप शामिल हैं।
अदालत ने यह भी कहा है कि किसी शिकायतकर्ता को शिकायत करने के बाद किसी प्रकार के द्वितीयक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। इसका मतलब है कि शिकायत दर्ज कराने वाली महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
इस दिशा में शिकायतों को प्राप्त करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी कमेटी तथा उसके द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारियों पर होगी।
पुलिस कार्रवाई की भी होगी जांच
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल के कथित अत्यधिक इस्तेमाल से जुड़ा है। कमेटी यह भी देखेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा किस प्रकार की कार्रवाई की गई और क्या बल प्रयोग परिस्थितियों के अनुरूप था।
यदि पुलिस पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई तथ्य या साक्ष्य सामने आता है तो कमेटी उसका परीक्षण करेगी। इसी तरह प्रदर्शनकारियों की ओर से हिंसा या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी।
इससे जांच का दायरा किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं रहेगा और पूरे घटनाक्रम को व्यापक रूप से देखा जा सकेगा।
शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया होगी सार्वजनिक
नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायतों को दर्ज कराने की प्रक्रिया सार्वजनिक किए जाने की बात कही गई है। इससे उन महिला प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा, जिन्होंने घटना के संबंध में शिकायत की है या जिनके पास इससे संबंधित जानकारी है।
शिकायतों की जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेज, वीडियो, तस्वीरें, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य संबंधित सामग्री महत्वपूर्ण हो सकती है। कमेटी इन सभी पहलुओं को अपने जांच दायरे में ले सकती है।
अंतरिम रिपोर्ट पर भी अदालत की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य गंभीर आरोपों की जांच को अनावश्यक रूप से लंबा खिंचने से रोकना है।
अंतरिम रिपोर्ट के माध्यम से अदालत को जांच की प्रगति और अब तक सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी मिल सकेगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और निर्देश तय किए जा सकते हैं।
आरोपों की निष्पक्ष जांच पर जोर
पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का जोर निष्पक्ष जांच पर है। महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए अदालत ने इन्हें प्राथमिकता से देखने का निर्देश दिया है।
साथ ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प तथा कथित हिंसा के दूसरे पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इससे घटनाक्रम का एकतरफा आकलन करने के बजाय सभी पक्षों के आरोपों और तथ्यों को सामने लाने का प्रयास होगा।
जंतर-मंतर प्रदर्शन की घटनाओं की होगी पड़ताल
जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और छात्र आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां होने वाले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी होती है, जबकि प्रदर्शनकारियों से भी निर्धारित नियमों का पालन करने की अपेक्षा रहती है।
20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान सामने आए आरोपों ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। खासकर महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
शिकायतकर्ताओं की पहचान और सुरक्षा महत्वपूर्ण
ऐसे मामलों में शिकायतकर्ताओं का विश्वास बनाए रखना भी जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान उनकी सुरक्षा, गरिमा और शिकायत की गोपनीयता से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
नोडल अधिकारियों के माध्यम से शिकायतें प्राप्त करने की व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। इससे शिकायतकर्ताओं को सीधे उचित मंच तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
कमेटी के सामने कई अहम सवाल
जांच के दौरान कमेटी के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल होंगे। इनमें प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ, पुलिस की कार्रवाई किस परिस्थिति में हुई, महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की प्रकृति क्या थी और आरोपों की पुष्टि के लिए उपलब्ध साक्ष्य क्या कहते हैं—जैसे सवाल शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा पुलिस और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से पड़ताल की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
चूंकि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी गठित की है और अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, इसलिए जांच की प्रगति पर अदालत की निगाह बनी रहेगी।
कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को अधिक स्पष्टता मिल सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट आगे के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है।
फिलहाल अदालत ने यह साफ कर दिया है कि महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और हिंसा के आरोपों को जांच में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही पुलिस बल के कथित अत्यधिक इस्तेमाल और प्रदर्शन के दौरान हुई अन्य हिंसक घटनाओं की भी पड़ताल जारी रहेगी।
मामले में अब सबकी नजर हाई-पावर्ड कमेटी की जांच प्रक्रिया, शिकायतें दर्ज कराने के लिए तय होने वाली व्यवस्था और अदालत में पेश की जाने वाली अंतरिम रिपोर्ट पर है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

