नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026 (यूटीएन)। यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रेलवे ने देशभर के स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था की व्यापक जांच और स्वच्छता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पानी के स्रोत से लेकर यात्रियों तक पहुंचने वाले अंतिम बिंदु तक पूरी व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। रेलवे का जोर केवल टंकियों की सफाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पानी की गुणवत्ता, पाइपलाइन, फिल्ट्रेशन सिस्टम, वाटर कूलर, आरओ-यूवी संयंत्र और वाटर वेंडिंग मशीनों की भी नियमित जांच की जाएगी।
रेलवे के इस अभियान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में कुछ रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर कमियां सामने आई थीं। ऑडिट के दौरान 49 में से आठ स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया था। रिपोर्ट में पानी की नियमित जांच, क्लोरीनेशन और निगरानी व्यवस्था में कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया था। इसके बाद रेलवे ने पेयजल व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
स्रोत से नल तक होगी पानी की निगरानी
रेलवे द्वारा शुरू किए गए अभियान में पानी के पूरे नेटवर्क को जांच के दायरे में रखा गया है। पानी के स्रोत, ट्रीटमेंट और फिल्ट्रेशन प्लांट, भूमिगत टंकियां, ओवरहेड टैंक, पीवीसी टैंक, वाटर बूथ, नल, वाटर कूलर और वितरण केंद्रों की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि पानी किसी भी चरण में दूषित तो नहीं हो रहा है।
पानी के स्रोत की जांच के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि वहां से ट्रीटमेंट प्लांट और फिर टंकियों तक पहुंचने के दौरान किसी प्रकार का प्रदूषण तो नहीं हो रहा। इसके बाद टंकियों से वाटर बूथ और नलों तक पहुंचने वाली पाइपलाइन की स्थिति भी जांची जाएगी।
टंकियों की होगी विशेष सफाई
रेलवे स्टेशनों पर लगी पानी की टंकियों को खाली कर उनकी अंदरूनी स्थिति की जांच की जाएगी। टंकियों में जमा गाद, मिट्टी और अन्य अवशेषों को हटाया जाएगा। इसके बाद टंकियों की पूरी तरह सफाई और डिसइंफेक्शन किया जाएगा।
टंकियों की सफाई के बाद उनके ढक्कन, वेंट, ओवरफ्लो प्वाइंट और अन्य हिस्सों की भी जांच होगी। कहीं से टंकी खुली हुई मिली या बाहरी गंदगी के प्रवेश की संभावना दिखाई दी तो उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा।
पुरानी और क्षतिग्रस्त टंकियों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जहां मरम्मत संभव होगी वहां मरम्मत कराई जाएगी और जहां टंकी पूरी तरह खराब हो चुकी होगी, वहां उसे बदलने की कार्रवाई की जाएगी।
पेयजल और गैर-पेयजल लाइन पर विशेष नजर
रेलवे स्टेशनों पर पानी की अलग-अलग पाइपलाइन व्यवस्था को भी जांचा जाएगा। पेयजल और गैर-पेयजल लाइनों के बीच किसी प्रकार का क्रॉस कनेक्शन न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
कई बार पाइपलाइन में तकनीकी खराबी, गलत कनेक्शन या लीकेज के कारण साफ पानी दूषित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए अभियान के दौरान पाइपलाइन नेटवर्क की बारीकी से जांच की जाएगी।
जहां पाइपलाइन में लीकेज मिलेगा, उसे तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एक ओर पानी की बर्बादी रुकेगी, वहीं दूसरी ओर बाहर से गंदे पानी के पाइपलाइन में प्रवेश की आशंका भी कम होगी।
हैंडपंप और बोरवेल भी जांच के दायरे में
स्टेशनों और रेलवे परिसरों में हैंडपंप तथा बोरवेल से मिलने वाले पानी की भी जांच की जाएगी। भूजल का इस्तेमाल पेयजल के रूप में किया जा रहा है तो उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच जरूरी होगी।
पानी में किसी प्रकार के बैक्टीरिया, रासायनिक तत्व या अन्य प्रदूषक पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जरूरत के अनुसार पानी के उपचार की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
वाटर कूलर की सफाई भी जरूरी
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ठंडा पानी उपलब्ध कराने वाले वाटर कूलरों की भी विशेष सफाई होगी। कूलर की टंकी, अंदरूनी पाइप, नल और पानी के संपर्क में आने वाले हिस्सों की जांच की जाएगी।
कूलर में लीकेज मिलने पर उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा। लंबे समय से खराब पड़े या निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे कूलरों की मरम्मत अथवा replacement की कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे का उद्देश्य है कि यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाने वाला पानी सुरक्षित होने के साथ-साथ साफ और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप भी हो।
आरओ-यूवी सिस्टम की होगी जांच
जहां रेलवे स्टेशनों पर आरओ और यूवी आधारित जल शोधन प्रणाली लगी है, वहां उनके संचालन और रखरखाव की जांच की जाएगी। आरओ-यूवी सिस्टम के फिल्टर की स्थिति, पानी की शुद्धिकरण क्षमता और मशीन के रखरखाव का निरीक्षण किया जाएगा।
खराब फिल्टर और अन्य तकनीकी हिस्सों को बदला जाएगा। जिन स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या अधिक है और मौजूदा जल शोधन व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, वहां जरूरत के अनुसार नए सिस्टम लगाने पर भी विचार किया जाएगा।
वाटर वेंडिंग मशीनों पर भी रहेगी नजर
रेलवे स्टेशनों पर लगी वाटर वेंडिंग मशीनों को भी अभियान में शामिल किया गया है। मशीनों की सफाई, पानी की गुणवत्ता और फिल्ट्रेशन सिस्टम की स्थिति की जांच की जाएगी।
मशीन के नल और पानी के संपर्क में आने वाले हिस्सों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी। यदि किसी मशीन से पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली तो आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पानी के नमूनों की होगी प्रयोगशाला जांच
रेलवे द्वारा केवल आंखों से निरीक्षण करने के बजाय पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच पर भी जोर दिया जा रहा है। पानी के स्रोत, टैंक, वाटर कूलर, वाटर वेंडिंग मशीन और नलों से नमूने लिए जाएंगे।
इन नमूनों की भौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच कराई जाएगी। इससे पानी की वास्तविक गुणवत्ता का पता लगाया जा सकेगा।
बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि पानी में ऐसे सूक्ष्मजीव या बैक्टीरिया तो मौजूद नहीं हैं जो यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं।
रोजाना होगी अवशिष्ट क्लोरीन की निगरानी
पेयजल में अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा की भी नियमित निगरानी की जाएगी। क्लोरीनेशन का उद्देश्य पानी में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित करना है।
रेलवे व्यवस्था में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक स्तर पर क्लोरीनेशन हो। यदि जांच में आवश्यकता महसूस हुई तो दोबारा क्लोरीनेशन कराया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रीटमेंट के बाद पानी यात्रियों तक पहुंचने के दौरान भी सुरक्षित बना रहे।
ओवरहेड और भूमिगत टंकियों के काम में तेजी
रेलवे बोर्ड ने स्वीकृत ओवरहेड और भूमिगत जल टंकियों के निर्माण तथा बदलाव से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। जिन स्थानों पर मौजूदा टंकियों की क्षमता कम है या उनकी स्थिति खराब है, वहां आवश्यकतानुसार नए कार्यों को मंजूरी दी जाएगी।
यात्रियों की संख्या बढ़ने वाले प्रमुख स्टेशनों पर पेयजल की मांग का भी आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर जल भंडारण और वितरण क्षमता को मजबूत करने की योजना बनाई जाएगी।
स्टेशनवार तैयार होगी रिपोर्ट
अभियान के दौरान प्रत्येक स्टेशन पर मिली कमियों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। स्टेशनवार रिपोर्ट में पानी की टंकियों, पाइपलाइन, फिल्टर, कूलर, आरओ-यूवी सिस्टम, वाटर बूथ और अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति दर्ज की जाएगी।
जिन कमियों को तत्काल दूर किया जा सकता है, उनके लिए तुरंत कार्रवाई की जाएगी। बड़े कार्यों के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध तरीके से सुधार कराया जाएगा।
इसके बाद यह भी देखा जाएगा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को वास्तव में दूर किया गया या नहीं। इस तरह निगरानी केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सुधार की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी।
रेलवे कॉलोनियां और कार्यस्थल भी अभियान में शामिल
रेलवे का यह अभियान केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। रेलवे कॉलोनियों और कर्मचारियों के कार्यस्थलों में उपलब्ध पेयजल व्यवस्था को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों को उपलब्ध कराए जाने वाले पानी की गुणवत्ता की भी जांच की जाएगी। पानी के स्रोत, भंडारण टैंक, वितरण लाइन और अंतिम उपयोग स्थल तक व्यवस्था की निगरानी होगी।
गर्मी और भीड़ वाले स्टेशनों पर विशेष ध्यान
गर्मियों में रेलवे स्टेशनों पर पानी की मांग काफी बढ़ जाती है। लंबी दूरी की ट्रेनों से आने वाले यात्रियों के साथ-साथ प्लेटफॉर्म पर प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों के लिए भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना रेलवे के सामने बड़ी जिम्मेदारी होती है।
भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर वाटर बूथ और कूलर की उपलब्धता के साथ उनकी साफ-सफाई भी महत्वपूर्ण है। रेलवे अभियान के माध्यम से ऐसे स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों को बेहतर बनाने की कोशिश करेगा।
यात्रियों के लिए बढ़ेगी जवाबदेही
पेयजल व्यवस्था में नियमित जांच होने से रेलवे की जवाबदेही भी बढ़ेगी। किसी स्टेशन पर पानी की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित व्यवस्था में सुधार करना आसान होगा और जिम्मेदार अधिकारियों को भी स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
नियमित निरीक्षण से लंबे समय से चली आ रही छोटी तकनीकी समस्याओं को भी समय रहते दूर किया जा सकेगा। इससे भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न होने की संभावना कम होगी।
सफाई के साथ रखरखाव भी जरूरी
रेलवे के सामने केवल पानी की टंकियां साफ रखने की चुनौती नहीं है। पानी की पूरी आपूर्ति व्यवस्था का रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। साफ टंकी के बावजूद यदि पाइपलाइन में लीकेज हो या फिल्टर खराब हो तो पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण अभियान में स्रोत से लेकर अंतिम वितरण बिंदु तक पूरी श्रृंखला को शामिल किया गया है। रेलवे का प्रयास है कि पेयजल व्यवस्था को नियमित निरीक्षण, सफाई, मरम्मत और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया से जोड़ा जाए।
यात्रियों को मिलेगा सुरक्षित पेयजल
रेलवे का लक्ष्य है कि देशभर के स्टेशनों पर यात्रियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच, टंकियों की सफाई, क्लोरीनेशन, पाइपलाइन की निगरानी और जल शोधन प्रणालियों के रखरखाव को प्राथमिकता दी जा रही है।
सीएजी की रिपोर्ट में सामने आई कमियों के बाद शुरू किया गया यह अभियान रेलवे की पेयजल व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि निरीक्षण और सुधार की प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रहती है, तो यात्रियों को दूषित पानी से होने वाले संभावित स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने में मदद मिल सकती है।
रेलवे का जोर अब इस बात पर है कि स्टेशन पर उपलब्ध पानी केवल पर्याप्त मात्रा में ही न हो, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी लगातार जांची जाती रहे। इसी उद्देश्य से स्रोत, टैंक, फिल्ट्रेशन प्लांट, पाइपलाइन, वाटर कूलर, आरओ-यूवी सिस्टम, वेंडिंग मशीन और नलों तक निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस अभियान से यात्रियों के साथ-साथ रेलवे कर्मचारियों को भी बेहतर पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में स्टेशनवार निरीक्षण रिपोर्ट और सुधारात्मक कार्रवाई के आधार पर पेयजल व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

