नई दिल्ली,24 अगस्त 2026 (यूटीएन)। बीकानेर हाउस, नई दिल्ली में राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपराओं, कला, हस्तशिल्प, संगीत और पारंपरिक खानपान को समर्पित तीजोत्सव-2026 अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। उत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने राजधानी में राजस्थान की समृद्ध लोक विरासत की जीवंत तस्वीर पेश की। रविवार की शाम जैसलमेर के प्रसिद्ध लोकगायक कुतले खान की लोक एवं सूफी प्रस्तुतियां तीजोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहीं।
कुतले खान की दमदार आवाज और राजस्थानी लोक संगीत की पारंपरिक मिठास ने बीकानेर हाउस के माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, दर्शक लोक धुनों और सूफी संगीत के रंग में डूबते चले गए। उनकी प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं और कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
सोमवार को होगा तीजोत्सव का समापन
तीजोत्सव-2026 का समापन सोमवार को होगा। समापन से पहले रविवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में राजस्थान की लोक परंपरा और आधुनिक मंचीय प्रस्तुति का सुंदर मेल देखने को मिला।
राजस्थान पर्यटन की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुतले खान ने लोक और सूफी संगीत की कई लोकप्रिय रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम की शुरुआत ‘केसरिया बालम’ से हुई। इस पारंपरिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को राजस्थानी रंग से भर दिया।
इसके बाद ‘झूले झूले लाल’, ‘अली मोरे अंगना दरस दिखा’, ‘छाप तिलक’, ‘सानू इक पल’, ‘ये तूने क्या किया’, ‘घूमर’ और ‘वारी जाऊं रे’ जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा।
लोक और सूफी संगीत का शानदार संगम
कुतले खान की प्रस्तुति की खासियत यह रही कि इसमें राजस्थान के पारंपरिक लोक संगीत के साथ सूफी गायकी की गहराई और भावनात्मकता भी देखने को मिली। उनकी आवाज में राजस्थान के रेगिस्तान की लोकधुनों का प्रभाव साफ दिखाई दिया।
‘अंखियां उडीक दिया’, ‘आजा माही’ और ‘पिया घर आया’ के मिश्रित गायन ने सांस्कृतिक संध्या को नया रंग दिया। इसके बाद ‘नीट खैर’, ‘तू माने या ना माने’, ‘सजदा’, ‘काली काली जुल्फों’, ‘जोगी दे नाल’ जैसी रचनाओं ने माहौल को और अधिक संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम में ‘दम नाल दम भरांगी’, ‘सांसों की माला पे’, ‘दुल्हे का सेहरा’, ‘लाल मेरी पत’, ‘बोली प्यारी लागे’, ‘लहरियो’ सहित अनेक लोकप्रिय रचनाएं भी प्रस्तुत की गईं।
‘दमादम मस्त कलंदर’ पर झूमे दर्शक
सांस्कृतिक संध्या के अंतिम चरण में ‘सलामत रहे तेरी आंखों की मस्ती’, ‘सोचता हूं कि वो कितने मासूम थे’, ‘कहना गलत गलत’ और ‘दमादम मस्त कलंदर’ जैसी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा भर दी।
‘दमादम मस्त कलंदर’ की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों का उत्साह देखते ही बना। बीकानेर हाउस परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लोक संगीत के साथ सूफी रंग के इस संगम ने तीजोत्सव की सांस्कृतिक शाम को यादगार बना दिया।
दीप प्रज्वलित कर हुआ सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन
सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन, प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को देश की राजधानी में प्रस्तुत करने के उद्देश्य पर भी जोर दिया गया। अतिथियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और तीजोत्सव में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया।
केंद्रीय मंत्री सहित कई गणमान्य लोगों ने देखा तीजोत्सव
रविवार को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित कई सांसदों, वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों ने बीकानेर हाउस पहुंचकर तीजोत्सव का अवलोकन किया।
इस अवसर पर सांसद पी.पी. चौधरी, राहुल कस्वां, राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद, गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
इसके अलावा राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवासन, संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल, आईजीएनसीए के सदस्य सचिव, पीएमएमएल के निदेशक, केंद्र और राजस्थान सरकार के आईएएस, आईपीएस एवं आईएफएस अधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी तथा एनडीएमसी की चेयरपर्सन सहित अनेक विशिष्ट लोगों ने भी उत्सव का अवलोकन किया।
प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने सभी गणमान्य अतिथियों का राजस्थानी परंपरा के अनुरूप साफा पहनाकर स्वागत किया और उन्हें तीजोत्सव में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों तथा प्रदर्शनी का अवलोकन कराया।
हस्तशिल्प और लोक कला बनी विशेष आकर्षण
तीजोत्सव में राजस्थान के हस्तशिल्प, लोक कला और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से आए शिल्पकारों और कलाकारों को अपनी कला और उत्पादों को दिल्ली के लोगों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
हस्तशिल्प की विभिन्न वस्तुओं की प्रदर्शनी के साथ उनकी बिक्री भी की जा रही है। इससे शिल्पकारों को सीधे बाजार उपलब्ध कराने और पारंपरिक कला को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
राजस्थानी हस्तशिल्प की विशेषता उसकी पारंपरिक डिजाइन, स्थानीय रंगों और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी में दिखाई देती है। तीजोत्सव के माध्यम से इन कलाओं को राजधानी के दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
राजस्थानी खानपान ने भी खींचा लोगों का ध्यान
तीजोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ राजस्थानी खानपान भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में लगाए गए फूड स्टॉलों पर पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लोगों की भीड़ देखी जा रही है।
राजस्थान के पारंपरिक भोजन की विविधता लोगों को राज्य की खानपान परंपरा से परिचित करा रही है। विभिन्न व्यंजनों के माध्यम से दिल्लीवासियों और राजस्थान से जुड़े लोगों को प्रदेश की पारंपरिक पाक संस्कृति का अनुभव मिल रहा है।
एक ही मंच पर राजस्थान की पूरी संस्कृति
प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने कहा कि बीकानेर हाउस में आयोजित तीजोत्सव-2026 दिल्लीवासियों और राजस्थान से जुड़े लोगों के लिए विशेष अवसर है। यहां राजस्थान की लोक संस्कृति, संगीत, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान को एक ही मंच पर अनुभव किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि तीजोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को देश की राजधानी में व्यापक मंच उपलब्ध कराना भी है। लोक कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा और उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलने से पारंपरिक कला को प्रोत्साहन मिल रहा है।
लोक कलाकारों को मिला बड़ा मंच
तीजोत्सव जैसे आयोजनों से राजस्थान के लोक कलाकारों को दिल्ली जैसे बड़े सांस्कृतिक केंद्र में प्रस्तुति देने का अवसर मिलता है। लोक संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से कलाकार राजस्थान की संस्कृति को नई पीढ़ी और देशभर से आने वाले दर्शकों तक पहुंचाते हैं।
कुतले खान की प्रस्तुति ने भी यही संदेश दिया कि राजस्थान का लोक संगीत आज भी अपनी मौलिकता और आकर्षण के कारण देश-विदेश के दर्शकों को अपनी ओर खींचने की क्षमता रखता है।
संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
राजस्थान की लोक संस्कृति को दिल्ली में प्रस्तुत करने वाला यह आयोजन पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, हस्तशिल्प और खानपान के माध्यम से लोगों को राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की विविधता से परिचित कराया जा रहा है।
लोक संगीत और पारंपरिक कलाओं के साथ राजस्थान के पर्यटन स्थलों, स्थानीय परंपराओं और जीवनशैली की झलक भी लोगों को राज्य की ओर आकर्षित करने में मदद करती है।
बीकानेर हाउस बना राजस्थानी संस्कृति का केंद्र
तीजोत्सव के दौरान बीकानेर हाउस का परिसर राजस्थान के सांस्कृतिक रंगों से सराबोर दिखाई दे रहा है। कहीं लोक संगीत की स्वर लहरियां सुनाई दे रही हैं तो कहीं हस्तशिल्प की वस्तुएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं। वहीं, फूड स्टॉलों पर पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू वातावरण को और खास बना रही है।
रविवार की सांस्कृतिक संध्या में कुतले खान की प्रस्तुति ने इस माहौल को और जीवंत कर दिया। लोक और सूफी संगीत के उनके अंदाज ने दर्शकों को राजस्थान की संगीत परंपरा से जोड़ दिया।
समापन को लेकर भी उत्साह
तीजोत्सव-2026 का सोमवार को समापन प्रस्तावित है। अंतिम दिन भी लोगों के बीच उत्साह बना हुआ है। आयोजन के दौरान मिली प्रतिक्रिया से आयोजकों में भी उत्साह दिखाई दे रहा है।
तीजोत्सव ने एक बार फिर यह साबित किया है कि लोक संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान समय में भी लोगों को जोड़ने और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।
बीकानेर हाउस में आयोजित इस उत्सव ने दिल्लीवासियों को राजस्थान की लोक परंपराओं, संगीत, हस्तशिल्प और खानपान से रूबरू कराने के साथ-साथ राजस्थान के कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है। कुतले खान की लोक एवं सूफी प्रस्तुतियां इसी सांस्कृतिक यात्रा का यादगार हिस्सा बन गईं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

