नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 (यूटीएन)। देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (NRSB) ने नई दिल्ली स्थित NHAI मुख्यालय में महत्वपूर्ण संस्थागत बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इंजीनियरिंग, तकनीक, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया तथा निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. नितिन आर. गोकर्ण और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव मौजूद रहे। इसके अलावा NRSB और NHAI के सदस्य, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारी, राज्य प्रशासन के प्रतिनिधि तथा सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए केंद्र, राज्य और संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक मजबूत और स्थायी संस्थागत व्यवस्था तैयार करना रहा।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना सबसे बड़ी प्राथमिकता
राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते यातायात और तेज गति वाले वाहनों के कारण सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सरकार और संबंधित एजेंसियों का जोर दुर्घटनाओं को होने से पहले रोकने, दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करने और दुर्घटना होने की स्थिति में पीड़ितों को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सड़क सुरक्षा को केवल दुर्घटना होने के बाद की कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए सड़क की डिजाइनिंग से लेकर निर्माण, संचालन, यातायात प्रबंधन, वाहन सुरक्षा, चालक व्यवहार और दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना जरूरी है।
NHAI ने मौजूदा सड़क सुरक्षा व्यवस्था का दिया व्यापक प्रस्तुतीकरण
बैठक के दौरान NHAI की ओर से राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू मौजूदा सड़क सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। इसमें सड़क सुरक्षा प्रदर्शन, दुर्घटनाओं से जुड़े उभरते रुझान और संस्थागत प्रबंधन की स्थिति पर जानकारी साझा की गई।
इसके साथ ही राजमार्गों की सुरक्षा इंजीनियरिंग, संचालन व्यवस्था, सड़क सुधार परियोजनाओं और सड़क सुरक्षा ऑडिट के बारे में भी चर्चा हुई।
सड़क सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से किसी सड़क परियोजना के डिजाइन और निर्माण में मौजूद संभावित सुरक्षा जोखिमों की व्यवस्थित पहचान की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क शुरू होने के बाद दुर्घटना की संभावना कम से कम रहे।
दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान पर विशेष जोर
बैठक में खतरनाक और दुर्घटना संभावित हिस्सों की पहचान तथा उनके प्रबंधन को महत्वपूर्ण विषय के रूप में लिया गया। ऐसे स्थानों की पहचान कर वहां सड़क की डिजाइन, संकेतक, रोशनी, डिवाइडर, गति सीमा, यातायात प्रवाह और अन्य सुरक्षा उपायों में सुधार किया जा सकता है।
NRSB अध्यक्ष डॉ. नितिन आर. गोकर्ण ने देशभर में दुर्घटना-संभावित शीर्ष दस स्थानों की पहचान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ऐसे स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करके वहां तत्काल सुधारात्मक उपाय किए जाने से गंभीर सड़क हादसों को कम करने में मदद मिल सकती है।
स्पीड मैनेजमेंट पर भी फोकस
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं का एक महत्वपूर्ण कारण तेज गति भी है। बैठक में गति प्रबंधन को सड़क सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया।
इसके तहत सड़क की परिस्थितियों के अनुसार उचित गति सीमा, निगरानी व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और तकनीकी साधनों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
तकनीक की मदद से तेज गति वाले वाहनों की पहचान, यातायात की निगरानी और नियमों के पालन को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकता है।
स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को बढ़ावा
बैठक में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) और तकनीक आधारित उपायों को राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था में अधिक व्यापक रूप से इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।
ITS के जरिए यातायात की स्थिति की निगरानी, वाहन प्रवाह का विश्लेषण, दुर्घटनाओं की जानकारी, मौसम और सड़क की स्थिति से जुड़े अलर्ट तथा अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं तेजी से साझा की जा सकती हैं।
इससे राजमार्ग प्रबंधन एजेंसियों को वास्तविक समय में निर्णय लेने में मदद मिलती है और सड़क पर किसी खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव हो सकती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से दुर्घटना रोकने की कोशिश
NRSB अध्यक्ष ने NHAI द्वारा उन्नत तकनीकी समाधानों के इस्तेमाल की सराहना की। इनमें भविष्यसूचक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) समाधान भी शामिल हैं।
AI आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल यातायात के पैटर्न और संभावित जोखिमों की पहचान करने में किया जा सकता है। इससे दुर्घटना होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय संभावित खतरे की पहले पहचान कर रोकथाम के उपाय किए जा सकते हैं।
सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में इस तरह की तकनीक का विस्तार आने वाले समय में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
एम्बुलेंस डिजिटल मैपिंग से इमरजेंसी रिस्पॉन्स मजबूत
बैठक में एम्बुलेंस डिजिटल मैपिंग जैसी तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य दुर्घटना स्थल तक एम्बुलेंस को तेजी से पहुंचाने और आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है।
सड़क हादसों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को जल्द चिकित्सा सुविधा मिलने से गंभीर परिणामों को कम किया जा सकता है। इसलिए NHAI के आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
टोल प्लाजा को प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के रूप में मजबूत करने की जरूरत
NRSB अध्यक्ष डॉ. नितिन आर. गोकर्ण ने टोल प्लाजा कर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा ऐसे स्थान हैं जहां कर्मचारी लगातार मौजूद रहते हैं। यदि उन्हें प्राथमिक चिकित्सा और दुर्घटना प्रतिक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाए तो दुर्घटना के तुरंत बाद घायल व्यक्ति को शुरुआती सहायता दी जा सकती है।
इससे एम्बुलेंस के पहुंचने तक दुर्घटना पीड़ित को जरूरी प्राथमिक उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी।
टोल प्लाजा पर फर्स्ट एड क्षमता बढ़ाने की योजना
बैठक में टोल प्लाजा की पहली सहायता क्षमता मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके तहत कर्मचारियों को प्राथमिक चिकित्सा से संबंधित प्रशिक्षण देने और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है।
सड़क हादसों के दौरान मौके पर मौजूद प्रशिक्षित कर्मचारी घायल व्यक्ति की स्थिति को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
छह रणनीतिक क्षेत्रों पर बनी व्यापक रणनीति
बैठक में सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए छह प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों की पहचान की गई।
पहला क्षेत्र जोखिम पहचान, सुरक्षित राजमार्ग इंजीनियरिंग और दुर्घटना रोकथाम है। इसके तहत सड़क निर्माण और डिजाइन में सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जाएगा।
दूसरा क्षेत्र सुरक्षित राजमार्ग संचालन, वाणिज्यिक वाहन सुरक्षा और आधुनिक इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। इसका उद्देश्य भारी और व्यावसायिक वाहनों से जुड़े जोखिमों को कम करना और यातायात संचालन को स्मार्ट बनाना है।
तीसरा क्षेत्र आपातकालीन प्रतिक्रिया, दुर्घटना प्रबंधन और नागरिक-केंद्रित सुरक्षा है। दुर्घटना के बाद राहत और चिकित्सा सहायता की गति बढ़ाना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
चौथा क्षेत्र डिजिटल सुरक्षा प्रबंधन, निगरानी और निर्णय सहायता प्रणाली है। इसमें डेटा और डिजिटल तकनीक के जरिए सड़क सुरक्षा से जुड़े फैसलों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर रहेगा।
पांचवां क्षेत्र प्रदर्शन निगरानी, शासन और संस्थागत जवाबदेही है। इसके तहत सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों की निगरानी और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने पर ध्यान दिया जाएगा।
छठा क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग सड़क सुरक्षा के लिए भविष्य की योजना है, जिसके तहत आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाएगी।
वाणिज्यिक वाहनों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा
बैठक में वाणिज्यिक वाहनों और उनके चालकों की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बड़ी संख्या में ट्रक, बस और अन्य भारी वाहन चलते हैं। लंबे समय तक वाहन चलाने, चालक की थकान और यातायात नियमों के उल्लंघन जैसे कारण सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे में चालक कल्याण और व्यावसायिक वाहन सुरक्षा को सड़क सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
चालकों के लिए आराम की सुविधाएं, सुरक्षित पार्किंग, पर्याप्त विश्राम और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को बेहतर करना भी दुर्घटनाओं की रोकथाम में मददगार हो सकता है।
चालक कल्याण पर भी ध्यान
बैठक में सड़क सुरक्षा के साथ चालक कल्याण को भी महत्वपूर्ण माना गया। लंबे समय तक लगातार ड्राइविंग से चालक की थकान बढ़ सकती है, जिससे प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित होती है।
इसलिए राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर सुरक्षित विश्राम स्थलों और चालक सुविधाओं को बढ़ावा देना भी सड़क सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हो सकता है।
दुर्घटना के बाद की देखभाल पर जोर
सड़क सुरक्षा का मतलब केवल दुर्घटना रोकना नहीं है। बैठक में दुर्घटना के बाद की चिकित्सा और राहत व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया।
दुर्घटना के तुरंत बाद पुलिस, एंबुलेंस, राजमार्ग प्रबंधन एजेंसी और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। यदि सूचना और प्रतिक्रिया के बीच समय कम किया जाए तो दुर्घटना पीड़ितों को बेहतर सहायता दी जा सकती है।
इसी उद्देश्य से डिजिटल मैपिंग और तकनीक आधारित आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करने की दिशा में चर्चा हुई।
निगरानी और प्रदर्शन प्रबंधन प्रणाली मजबूत होगी
बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों की निगरानी और प्रदर्शन प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने पर भी विचार हुआ।
दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जा सकता है कि किस स्थान पर बार-बार हादसे हो रहे हैं, किन परिस्थितियों में दुर्घटनाएं अधिक होती हैं और किन सुधारात्मक उपायों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है।
डेटा आधारित निर्णय लेने से सड़क सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
राज्यों के साथ बेहतर तालमेल की जरूरत
राष्ट्रीय राजमार्ग कई राज्यों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है।
बैठक में NHAI के क्षेत्रीय कार्यालयों को राज्य प्रशासन के साथ मिलकर काम करने और सड़क सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी साझा करने पर जोर दिया गया।
राज्य प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और राजमार्ग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से दुर्घटना रोकथाम और दुर्घटना के बाद राहत व्यवस्था दोनों को मजबूत किया जा सकता है।
नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी
बैठक में जन सहभागिता और उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवाओं को भी सड़क सुरक्षा का हिस्सा माना गया। सड़क सुरक्षा केवल सरकार या किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें वाहन चालक, यात्री, पैदल यात्री और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यातायात नियमों का पालन, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाना, सीट बेल्ट और हेलमेट का इस्तेमाल तथा नशे में ड्राइविंग से बचना सड़क सुरक्षा के बुनियादी उपाय हैं।
सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण अपनाने पर जोर
बैठक में Safe System Approach यानी सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण अपनाने पर भी चर्चा हुई। इस दृष्टिकोण में यह माना जाता है कि इंसानी गलती पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती, इसलिए सड़क व्यवस्था को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि गलती होने पर भी जानलेवा दुर्घटना की संभावना कम से कम हो।
इसमें सुरक्षित सड़क डिजाइन, उचित गति, वाहन सुरक्षा, प्रभावी यातायात प्रबंधन और तेज आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे कई स्तरों पर एक साथ काम किया जाता है।
भविष्य की सड़क सुरक्षा रणनीति पर काम
NHAI और NRSB ने माना कि सड़क सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। नए प्रकार के वाहन, बढ़ता यातायात, तेज रफ्तार, तकनीक का विस्तार और राजमार्गों का बढ़ता नेटवर्क नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।
ऐसे में सड़क सुरक्षा रणनीति को भी समय के साथ अपडेट करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से दोनों संस्थानों के बीच नियमित समीक्षा और निरंतर संवाद की व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी।
नियमित बैठकें होंगी
दोनों संस्थानों ने उभरती चुनौतियों की पहचान करने और सड़क सुरक्षा उपायों को लगातार मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।
इन बैठकों के जरिए सड़क सुरक्षा से जुड़े उपायों की प्रगति की समीक्षा, नई तकनीक के इस्तेमाल, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान और राज्य प्रशासन के साथ समन्वय की स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।
संस्थागत साझेदारी को मिलेगा नया आधार
NHAI और NRSB की यह बैठक केवल एक समीक्षा बैठक तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों संस्थानों के बीच नियमित समन्वय से सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। इससे योजनाओं को लागू करने, जोखिम की पहचान करने और दुर्घटना के बाद प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ सकती है।
तकनीक और मानव संसाधन दोनों पर जोर
बैठक से यह भी स्पष्ट हुआ कि सड़क सुरक्षा के लिए केवल आधुनिक तकनीक पर्याप्त नहीं है। तकनीक के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत संस्थागत व्यवस्था भी जरूरी है।
AI आधारित निगरानी, डिजिटल मैपिंग और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम के साथ-साथ टोल प्लाजा कर्मचारियों को प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण देना इसी संतुलित दृष्टिकोण का हिस्सा है।
सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार का व्यापक प्रयास
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां कई स्तरों पर काम कर रही हैं। सड़क निर्माण में सुरक्षा मानकों को शामिल करने से लेकर दुर्घटना संभावित स्थानों के सुधार और आपातकालीन सेवाओं तक पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
NHAI और NRSB की बैठक इसी व्यापक प्रयास को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आगे की चुनौती लागू करने की
विशेषज्ञों के मुताबिक सड़क सुरक्षा के लिए रणनीति और योजनाएं बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे अधिक जरूरी उनका प्रभावी क्रियान्वयन है। दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान के बाद वहां समय पर सुधार, गति प्रबंधन, संकेतकों की व्यवस्था, सड़क की स्थिति और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
राज्यों और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय भी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के लिए जरूरी होगा।
सड़क हादसों में कमी लाने की दिशा में बड़ा कदम
NHAI और NRSB के बीच हुई बैठक का व्यापक उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित बनाना और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों तथा गंभीर चोटों को कम करना है।
जोखिम की पहचान, सुरक्षित इंजीनियरिंग, स्मार्ट यातायात प्रबंधन, वाणिज्यिक वाहन सुरक्षा, AI आधारित निगरानी, डिजिटल सुरक्षा प्रबंधन और तेज आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे उपायों को एक साथ लागू करने से सड़क सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए दोनों संस्थानों ने यह संकेत दिया है कि सड़क सुरक्षा को एक बार की परियोजना के बजाय लगातार चलने वाली प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इन रणनीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था तैयार करने की उम्मीद है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

