बागपत,26 अगस्त 2026 (यूटीएन)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ बागपत में देर रात लगाए गए आपत्तिजनक पोस्टरों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। पोस्टर सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में सपाई सड़क पर उतर आए और पोस्टरों को फाड़कर विरोध जताया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने एसपी आवास का घेराव करते हुए धरना-प्रदर्शन और जमकर नारेबाजी की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मच गया।
बताया गया कि देर रात बागपत में अलग-अलग स्थानों पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों पर लिखा था, "सबको गाली, सबका अपमान, समाजवादी पार्टी की पहचान।" पोस्टरों में अखिलेश यादव के पूर्व में दिए गए राजनीतिक बयानों का भी उल्लेख किया गया। इनमें राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह को लेकर दिए गए "चवन्नी से रुपया बना दिया" वाले बयान का भी जिक्र किया गया था।
सुबह और देर रात जैसे ही पोस्टरों की जानकारी समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं तक पहुंची, वैसे-वैसे कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ती चली गई। कार्यकर्ताओं में पोस्टरों को लेकर खासा आक्रोश दिखाई दिया। मौके पर पहुंचे सपाइयों ने पोस्टरों को फाड़ दिया और उन्हें लगाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग उठाई।
इसके बाद बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता एकजुट होकर एसपी आवास की ओर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने वहां घेराव कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं का कहना था कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह के पोस्टर लगाकर माहौल खराब करने का प्रयास किया गया है और पुलिस को तत्काल पोस्टर लगाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय के अंदर जाने का प्रयास भी किया। हालांकि, कार्यालय पर पहले से तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसको लेकर कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और उन्हें शांत रहने की अपील की।
मामले की सूचना मिलने के बाद एसपी सूरज कुमार राय ने प्रदर्शन कर रहे सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने पूरे मामले में जांच कराने और पोस्टर लगाने वालों की पहचान करने का भरोसा दिया। एसपी ने आश्वासन दिया कि 48 घंटे के भीतर पोस्टर लगाने वाले लोगों का पता लगाकर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक के आश्वासन के बाद काफी देर तक चला धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। हालांकि, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने साफ कर दिया कि अगर तय समय के भीतर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को दोबारा तेज किया जाएगा।
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ इस तरह के पोस्टर लगाना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी नेता के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाकर माहौल खराब करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच कर पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सपा जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि पुलिस ने अगर दो दिन के भीतर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई नहीं की, तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन अगर कार्रवाई में लापरवाही हुई तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जा सकता है।
वहीं, पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए पोस्टर लगाने वालों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पोस्टर कहां से छपवाए गए, उन्हें किन स्थानों पर लगाया गया और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है। पुलिस पोस्टर लगाने वाले लोगों की पहचान के साथ-साथ इसके पीछे की मंशा का भी पता लगाने में जुटी है।
घटना के बाद बागपत में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। एक तरफ समाजवादी पार्टी ने इसे अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ सुनियोजित तरीके से किया गया अपमानजनक प्रचार बताया है, वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रही है।
पोस्टर प्रकरण ने बागपत की स्थानीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। खास बात यह है कि पोस्टरों में अखिलेश यादव के बयान के साथ चौधरी जयंत सिंह का नाम जोड़े जाने से इसे राजनीतिक रूप से भी देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि पोस्टर किसने लगवाए और इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर किसी को अखिलेश यादव की नीतियों या उनके बयानों से राजनीतिक आपत्ति है तो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है, लेकिन पोस्टर लगाकर व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणी करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की कि मामले की जांच केवल पोस्टर हटाने तक सीमित न रहे, बल्कि इसके पीछे शामिल सभी लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पुलिस अधीक्षक के 48 घंटे के आश्वासन के बाद सपाइयों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं। यदि तय समय में पोस्टर लगाने वालों की पहचान होती है तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी। वहीं, यदि कार्रवाई नहीं हुई तो सपा नेताओं ने दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह पोस्टर विवाद बागपत की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

