नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026 (यूटीएन)। जापान दौरे पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और निवेश के लिए अनुकूल माहौल को लेकर जापानी उद्योग जगत को बड़ा संदेश दिया। टोक्यो में जापानी कारोबारियों और निवेशकों को संबोधित करते हुए गोयल ने भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए भरोसेमंद और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य बताया। उन्होंने कहा कि भारत में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल उपभोक्ता बाजार और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था बड़ी ताकत हैं।
अपने संबोधन के दौरान पीयूष गोयल ने चीन का नाम लिए बिना ऐसा उदाहरण दिया, जिसने उनके भाषण को खासा चर्चा में ला दिया। उन्होंने अलीबाबा के संस्थापक जैक मा का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत में निवेशकों को इस तरह की चिंता नहीं करनी होगी कि कोई कारोबारी बड़ी सफलता हासिल करे और उसके बाद अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो जाए और फिर किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में दिखाई दे।
गोयल की यह टिप्पणी जैक मा के उस दौर की ओर संकेत मानी जा रही है, जब वे चीन में कुछ समय के लिए सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहे थे। बाद में जैक मा जापान के टोक्यो कॉलेज से भी जुड़े और वहां विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। गोयल के इस उदाहरण को भारत और चीन के कारोबारी माहौल के बीच अंतर बताने वाले संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत को बताया भरोसेमंद बाजार
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में बड़ी युवा आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और लगातार विस्तार करता उपभोक्ता बाजार विदेशी कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं। उन्होंने जापानी कंपनियों से भारत में अपनी मौजूदगी और निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक उत्पादन और निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत में उत्पादन करने वाली कंपनियां देश के घरेलू बाजार के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सक्षम हो सकती हैं।
FTA नेटवर्क का उठाया मुद्दा
गोयल ने भारत के विभिन्न देशों और क्षेत्रों के साथ किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स यानी FTA का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक समझौतों का बढ़ता नेटवर्क जापानी कंपनियों को भारत को वैश्विक सप्लाई चेन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने का अवसर देता है।
उन्होंने जापानी उद्योगपतियों से कहा कि भारत में निवेश करके कंपनियां न केवल भारतीय बाजार की मांग पूरी कर सकती हैं, बल्कि यहां से दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ा सकती हैं।
हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
भारत और जापान के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग माना जा रहा है। गोयल के दौरे में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, मशीनरी, तकनीक और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर है।
भारत सरकार लंबे समय से देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के बड़े बाजार तथा उत्पादन क्षमता को साथ लाकर दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।
200 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान पहुंचे गोयल
पीयूष गोयल चार दिवसीय जापान यात्रा पर करीब 200 सदस्यों वाले भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय उद्योग जगत से जुड़े कारोबारी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं। दौरे का उद्देश्य भारत और जापान के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करना तथा नए निवेश अवसर तलाशना है।
इस दौरान जापानी कंपनियों को भारत में निवेश की संभावनाओं के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। सरकार का जोर खासतौर पर उन क्षेत्रों पर है, जहां जापानी तकनीक, पूंजी और भारतीय बाजार तथा उत्पादन क्षमता के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।
चीन के मुकाबले भारत की अलग तस्वीर पेश करने की कोशिश
पीयूष गोयल के जैक मा वाले बयान को भारत की निवेश नीति के व्यापक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। चीन का नाम लिए बिना उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि भारत में कारोबारी माहौल ऐसा है जहां उद्यमियों और निवेशकों को संस्थागत स्थिरता तथा कानून के शासन का भरोसा मिलता है।
भारत लगातार खुद को वैश्विक कंपनियों के लिए चीन के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है। कोरोना महामारी के बाद दुनिया भर की कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में भारत सरकार चाहती है कि वैश्विक कंपनियां चीन के अलावा भारत में भी बड़े पैमाने पर उत्पादन और निवेश करें।
जापान के लिए भारत में बड़े अवसर
जापान भारत के प्रमुख निवेश और तकनीकी साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग चल रहा है। भारत चाहता है कि जापानी कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता को और विस्तार दें तथा नई तकनीक के साथ भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाएं।
गोयल ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि भारत की आर्थिक वृद्धि आने वाले वर्षों में जापानी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगी। उनका संदेश साफ था कि जापान की कंपनियां भारत को केवल बिक्री के बाजार के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादन, निर्यात और वैश्विक कारोबार के आधार के रूप में देखें।
निवेशकों को दिया दीर्घकालिक भरोसे का संदेश
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में निवेश का मतलब केवल आज के बाजार में प्रवेश करना नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के विकास में भागीदार बनना है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, डिजिटल कनेक्टिविटी और बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार भारत को विदेशी निवेश के लिए आकर्षक बना रहे हैं।
जापानी उद्योगपतियों के बीच गोयल का यह संबोधन ऐसे समय में हुआ है जब भारत वैश्विक कंपनियों को देश में उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार आमंत्रित कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाया जाए।
पीयूष गोयल का जैक मा वाला बयान इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। चीन का नाम लिए बिना दिया गया यह संदेश निवेशकों को भारत की कारोबारी स्थिरता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं पर भरोसा दिलाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

