नई दिल्ली,26 अगस्त 2026 (यूटीएन)। एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते और अनावश्यक इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से डॉ. केयर हॉस्पिटल्स ने 100 दिवसीय एंटीबायोटिक जागरूकता अभियान शुरू किया है। यह अभियान 15 अगस्त से 14 नवंबर तक चलेगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के सही, सीमित और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, अभियान शुरू करने से पहले तेलंगाना के अलग-अलग शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 60 दिनों तक सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण के दौरान दवाओं और विशेष रूप से एंटीबायोटिक के अनावश्यक इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण चिंताएं सामने आईं। इन निष्कर्षों के आधार पर अस्पताल ने व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया।
बिना सलाह एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी
अक्सर लोग सामान्य सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार या मामूली संक्रमण जैसी स्थितियों में भी डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। कई बार किसी पुराने प्रिस्क्रिप्शन या परिवार के किसी सदस्य की दवा को देखकर भी लोग स्वयं दवा लेने लगते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हर संक्रमण में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। कई सामान्य बीमारियां वायरस के कारण होती हैं, जबकि एंटीबायोटिक मुख्य रूप से बैक्टीरियल संक्रमण के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में बिना आवश्यकता एंटीबायोटिक लेने से बीमारी का इलाज होने के बजाय अनावश्यक दवा सेवन का खतरा बढ़ सकता है।
एंटीबायोटिक प्रतिरोध बड़ी चुनौती
डॉ. केयर हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. ए. एम. रेड्डी ने कहा कि एंटीबायोटिक का बिना आवश्यकता और चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। उनके अनुसार, एंटीबायोटिक का अनुचित उपयोग शरीर में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को प्रभावित कर सकता है और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी समस्या को बढ़ावा दे सकता है।
एंटीबायोटिक प्रतिरोध की स्थिति में कुछ बैक्टीरिया दवाओं के प्रति कम प्रभावी या प्रतिरोधी हो सकते हैं। इसका परिणाम यह हो सकता है कि भविष्य में कुछ संक्रमणों के इलाज के लिए सामान्य रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं अपेक्षित प्रभाव न दिखाएं।
इसी कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से एंटीबायोटिक दवाओं का विवेकपूर्ण और चिकित्सकीय निगरानी में इस्तेमाल करने की सलाह देते रहे हैं।
अभियान के जरिए घर-घर पहुंचाने की कोशिश
100 दिवसीय अभियान के माध्यम से लोगों तक एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसका फोकस केवल मरीजों तक सीमित न रहकर परिवारों और आम नागरिकों को भी जागरूक करने पर रहेगा।
अभियान के तहत लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक शुरू करना, किसी दूसरे व्यक्ति की दवा लेना या जरूरत से अधिक दवा इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
इसके साथ ही मरीजों को चिकित्सक द्वारा बताई गई दवा, खुराक और अवधि से संबंधित निर्देशों का पालन करने के महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
अत्यधिक दवा सेवन और आंतों के स्वास्थ्य पर चिंता
डॉ. केयर हॉस्पिटल्स की डॉ. गौरी शंकर ने अत्यधिक दवा सेवन और उसके आंतों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर लोगों को सावधान किया। उन्होंने दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मानव शरीर में आंतों के भीतर अनेक प्रकार के सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जो पाचन और शरीर की सामान्य जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ दवाओं, विशेष रूप से एंटीबायोटिक के अनुचित या अत्यधिक उपयोग से इस माइक्रोबायोम पर असर पड़ सकता है।
इसीलिए विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुसार और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेने से बचने की अपील
डॉ. केयर हॉस्पिटल्स की डॉ. अमरावती ने लोगों से बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचने की अपील की। उन्होंने चिकित्सकों से भी इन दवाओं के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
उनका कहना है कि मरीज की स्थिति, संक्रमण के कारण और चिकित्सकीय जरूरत को ध्यान में रखकर ही एंटीबायोटिक के इस्तेमाल का निर्णय किया जाना चाहिए। हर बुखार या संक्रमण के लिए एक जैसी दवा उपयुक्त नहीं हो सकती।
अधूरा इलाज भी बन सकता है समस्या
एंटीबायोटिक से जुड़ी जागरूकता में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मरीज दवा का इस्तेमाल चिकित्सक द्वारा बताए गए तरीके के अनुसार करें। कई बार मरीज तबीयत में सुधार महसूस होते ही दवा लेना बंद कर देते हैं या अपनी मर्जी से खुराक बदल देते हैं।
दवा के इस्तेमाल को लेकर किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। अभियान के माध्यम से लोगों को इस बारे में भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है कि दवाओं का उपयोग स्वयं तय करने के बजाय चिकित्सकीय मार्गदर्शन लिया जाए।
तेलंगाना के सर्वेक्षण से सामने आई चिंता
अभियान से पहले तेलंगाना के विभिन्न शहरों और गांवों में किए गए 60 दिवसीय सर्वेक्षण को इसकी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सर्वेक्षण में दवाओं और एंटीबायोटिक के अनावश्यक उपयोग को लेकर चिंताएं सामने आईं।
शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी दवाओं के सही इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अस्पताल ने 100 दिनों तक चलने वाले व्यापक अभियान की शुरुआत की है।
मरीज ही नहीं, चिकित्सकों की भी अहम भूमिका
एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए केवल मरीजों को जागरूक करना पर्याप्त नहीं है। चिकित्सकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। सही मरीज को सही समय पर उचित दवा देने और अनावश्यक एंटीबायोटिक से बचने से दवाओं के प्रभावी इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सकता है।
अभियान इसी साझा जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास है। इसमें नागरिकों के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को भी जिम्मेदार दवा उपयोग का संदेश दिया जा रहा है।
परिवारों में जागरूकता जरूरी
अक्सर घरों में दवाएं बची रह जाती हैं और बाद में लोग उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल कर लेते हैं। कुछ परिवारों में एक व्यक्ति की दवा दूसरे व्यक्ति को देने की आदत भी देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का संदेश है कि किसी व्यक्ति के लिए लिखी गई एंटीबायोटिक दूसरे व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं कि उपयुक्त हो। उम्र, बीमारी, संक्रमण और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों के आधार पर उपचार अलग हो सकता है।
जागरूकता से ही बदल सकती है आदत
एंटीबायोटिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने के लिए लोगों की आदतों में बदलाव जरूरी है। इसके लिए लगातार जागरूकता और सही जानकारी महत्वपूर्ण है। 100 दिवसीय अभियान का उद्देश्य इसी जागरूकता को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है।
लोगों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि हर बीमारी में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती और किसी भी दवा का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
स्वस्थ भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास
डॉ. केयर हॉस्पिटल्स ने नागरिकों से अभियान से जुड़ने और एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल का संकल्प लेने का आह्वान किया है। अस्पताल का कहना है कि दवाओं का सही इस्तेमाल न केवल वर्तमान मरीजों के लिए जरूरी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी चुनौती से निपटने के लिए मरीज, परिवार, डॉक्टर और स्वास्थ्य संस्थानों—सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। सही जानकारी और जिम्मेदार व्यवहार के जरिए अनावश्यक दवा सेवन को कम किया जा सकता है।
100 दिनों में व्यापक संदेश पहुंचाने का लक्ष्य
15 अगस्त से 14 नवंबर तक चलने वाला यह अभियान एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक लंबी अवधि की पहल है। अस्पताल की कोशिश है कि अभियान के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह संदेश पहुंचे कि एंटीबायोटिक कोई सामान्य दवा नहीं है, जिसका इस्तेमाल अपनी मर्जी से किया जाए।
अभियान का मूल संदेश स्पष्ट है—जरूरत होने पर, सही दवा और सही चिकित्सकीय सलाह के साथ एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करें और अनावश्यक सेवन से बचें। डॉ. केयर हॉस्पिटल्स ने उम्मीद जताई है कि नागरिकों की भागीदारी से यह पहल जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग की आदत को बढ़ावा देने और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में योगदान देगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

