बडौत, 30 जुलाई 2026 (यूटीएन)। आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के सुशिष्य, आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज ने ससंघ आज नगर में मंगल प्रवेश किया।आचार्य संघ की मंगल प्रवेश यात्रा श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर,दिल्ली रोड से शुरू होकर नगर के मुख्य मार्गो से होती हुई श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर मंडी पहुंची।रास्ते में जगह जगह जैन श्रद्धालुओं एवं जैन संस्थाओं ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया एवं आरती उतारी। वहीं भारी संख्या में जैन श्रद्धालु महावीर भगवान के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।
अजितनाथ सभागार में श्री अजितनाथ मंदिर कमेटी के नेतृत्व में नगर के जैन मंदिर कमेटियों और संस्थाओं ने आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित किया। मंगलाचरण रिषिका दीदी ने और संचालन डॉ श्रेयांस जैन ने किया। आचार्य श्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में धर्म का पालन दया से होता है। दया धर्म का मूल है। "धर्मस्य मूलं दया"।
उन्होंने कहा,जीवन में धर्म ,शांति व दया से प्रारंभ होता है । इह लोक और परलोक को भी महान बनाता है। हमें प्रत्येक प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखना चाहिए ,जिससे शत्रु भी मित्र बन जाते हैं ।हमारे आगम में कहा भी है कि ,विश्व में जो भी पदार्थ देखते हैं उनमें कोई ना कोई गुणधर्म अवश्य होते हैं चाहे वह प्रयोजनीय हों अथवा अप्रयोजनीय हों।
सभा में श्री अजितनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मुकेश जैन महामंत्री प्रदीप जैन,कोषाध्यक्ष नवीन जैन,वीरसेन जैन,अनिल जैन,महेंद्र जैन,सुरेश जैन,वरदान जैन,संजीव जैन अंकुर जैन,विकास जैन,अनुज जैन,ऋषभ जैन,नितिन जैन,राजेश भारती आदि उपस्थित रहे।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

