खेकड़ा, 26 अगस्त 2026 (यूटीएन)। गुरुकुल विद्यापीठ में मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के सत्र 2026-27 के अंतर्गत कंप्यूटेशनल सोच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विषय पर जिला स्तरीय विचार-विमर्श एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ती तकनीकी संभावनाओं, एआई के उपयोग और विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
गुरुकुल विद्यापीठ को सीबीएसई की जिला स्तरीय विचार-विमर्श कार्यशाला के लिए होस्ट स्कूल के रूप में चुना गया था। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को कंप्यूटेशनल सोच और एआई की बुनियादी समझ देने के साथ-साथ इन्हें नियमित कक्षा शिक्षण से जोड़ने के व्यावहारिक तरीकों पर विचार करना रहा।
प्रधानाचार्या ने किया शुभारंभ
कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रमा सिंघल ने किया। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में तकनीक शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे में शिक्षकों के लिए नई तकनीकों की जानकारी और उनका सही उपयोग समझना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कंप्यूटेशनल सोच केवल कंप्यूटर या तकनीकी विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में समस्या को समझने, उसे छोटे हिस्सों में विभाजित करने, तार्किक ढंग से समाधान खोजने और नए विचार विकसित करने की क्षमता को बढ़ावा देती है।
प्रधानाचार्या ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में शिक्षा और रोजगार सहित कई क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण तकनीक है। इसलिए विद्यार्थियों को केवल एआई का उपयोग करना सिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें इसके सही, जिम्मेदार और सुरक्षित इस्तेमाल की समझ भी विकसित करनी होगी।
शिक्षा से एआई को जोड़ने पर मंथन
कार्यशाला के दौरान कंप्यूटेशनल सोच और एआई को अलग-अलग विषयों के साथ जोड़ने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने चर्चा की कि गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा शिक्षण में तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किस प्रकार किया जा सकता है।
शिक्षकों ने माना कि तकनीक का उपयोग केवल विद्यार्थियों को जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका इस्तेमाल विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, विश्लेषण करने, तर्क करने, समस्या का समाधान खोजने और रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए भी किया जा सकता है।
कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि एआई आधारित संसाधनों के माध्यम से शिक्षकों को पाठ्यक्रम को अधिक रोचक और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप बनाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ विद्यार्थियों में तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की समझ विकसित करना भी जरूरी बताया गया।
परियोजना आधारित शिक्षण पर जोर
कार्यशाला में परियोजना आधारित शिक्षण को लेकर भी चर्चा की गई। शिक्षकों ने बताया कि विद्यार्थियों को केवल किताबों और पारंपरिक कक्षा शिक्षण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक समस्याओं से जोड़कर सीखने के अवसर दिए जाने चाहिए।
परियोजनाओं के माध्यम से विद्यार्थी किसी विषय पर जानकारी जुटाने, उसका विश्लेषण करने और समाधान प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से गुजरते हैं। इससे उनमें टीमवर्क, संचार कौशल, तार्किक क्षमता और रचनात्मक सोच का विकास हो सकता है।
प्रतिभागियों ने इस बात पर भी विचार किया कि एआई और कंप्यूटेशनल सोच को परियोजना आधारित शिक्षण में शामिल करके विद्यार्थियों को नए प्रयोगों और नवाचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
मूल्यांकन की नई रणनीतियों पर चर्चा
कार्यशाला में शिक्षा के बदलते स्वरूप के साथ मूल्यांकन की नई रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि विद्यार्थियों की क्षमता का आकलन केवल लिखित परीक्षा के आधार पर करने के बजाय उनकी समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मकता, विश्लेषणात्मक सोच और परियोजना कार्य को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
एआई आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बीच विद्यार्थियों की वास्तविक समझ का मूल्यांकन कैसे किया जाए, इस विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया। शिक्षकों ने एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हुए मूल्यांकन के अधिक प्रभावी तरीकों को अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
शिक्षकों ने प्रस्तुत किए केस पेपर
कार्यशाला की एक महत्वपूर्ण विशेषता प्रतिभागी शिक्षकों द्वारा अपने-अपने विद्यालयों में अपनाई जा रही प्रभावी शिक्षण पद्धतियों और नवाचारों से जुड़े केस पेपर प्रस्तुत करना रहा। शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने कक्षा शिक्षण में तकनीक और नवाचार का किस प्रकार इस्तेमाल किया और उससे विद्यार्थियों को किस तरह लाभ मिला।
इन प्रस्तुतियों के बाद शिक्षकों के बीच संवाद और चर्चा का दौर चला। प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किए गए प्रयोगों और शिक्षण पद्धतियों को लेकर सवाल पूछे तथा अपने सुझाव भी साझा किए।
इससे शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में अपनाई जा रही प्रभावी रणनीतियों को समझने और अपने विद्यालयों में उन्हें लागू करने की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर मिला।
प्रधानाचार्यों ने भी की सहभागिता
कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भी सहभागिता की। उन्होंने विद्यालय स्तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने, शिक्षकों को नई तकनीकों से जोड़ने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने से जुड़े अपने विचार साझा किए।
प्रधानाचार्यों ने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में विद्यालयों के लिए जरूरी है कि वे अपने शिक्षकों और विद्यार्थियों को इन बदलावों के अनुरूप तैयार करें। इसके लिए प्रशिक्षण, संसाधन और नवाचार आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
एआई के जिम्मेदार उपयोग पर जोर
कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के साथ उससे जुड़े नैतिक और जिम्मेदार पहलुओं पर भी चर्चा की गई। शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों को एआई का इस्तेमाल करते समय जानकारी की सत्यता जांचने, मौलिकता बनाए रखने और तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
प्रतिभागियों ने माना कि एआई शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों का विकल्प नहीं है, बल्कि एक उपयोगी तकनीकी साधन के रूप में इसका प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। शिक्षक के मार्गदर्शन में एआई का उपयोग विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
विद्यालय प्रबंधन ने किया स्वागत
विद्यालय के प्रबंधक मुकेश गुप्ता ने कार्यशाला में पहुंचे अतिथियों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल विद्यापीठ को इस जिला स्तरीय कार्यशाला के लिए होस्ट स्कूल के रूप में चुना जाना विद्यालय के लिए गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को समझने और उन्हें कक्षा शिक्षण से जोड़ने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों के लिए उपयोगी साबित होती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में हुई चर्चा और साझा किए गए अनुभवों का लाभ विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को मिलेगा।
भविष्य की शिक्षा के लिए तकनीकी समझ जरूरी
कार्यशाला के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में तकनीक की भूमिका और बढ़ेगी। ऐसे में शिक्षकों को समय के साथ अपनी तकनीकी समझ को लगातार विकसित करना होगा।
कंप्यूटेशनल सोच के माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक एवं विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने और एआई के माध्यम से उन्हें आधुनिक तकनीकी दुनिया से परिचित कराने पर जोर दिया गया। साथ ही यह भी माना गया कि तकनीक का इस्तेमाल विद्यार्थियों की रचनात्मकता और सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
कार्यशाला में शिक्षकों के बीच हुए विचार-विमर्श से यह भी स्पष्ट हुआ कि नई तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने के लिए विद्यालयों को आपसी अनुभव और नवाचार साझा करने की जरूरत है। ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों को एक-दूसरे से सीखने और नई शिक्षण रणनीतियों को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। शिक्षकों ने कहा कि उन्हें कंप्यूटेशनल सोच, एआई और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़े कई नए पहलुओं को समझने का अवसर मिला। साथ ही अपने विद्यालयों में इन तकनीकों को विद्यार्थियों के हित में बेहतर ढंग से इस्तेमाल करने के लिए नए विचार भी मिले।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

