खेकड़ा, 25 जुलाई 2026 (यूटीएन)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में खेकड़ा नगर पालिका परिषद के सभासदों ने क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन सौंपकर छात्रों की समस्याओं का लोकतांत्रिक तरीके से समाधान कराने की मांग की। सभासदों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले विद्यार्थियों की आवाज दबाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और वार्ता के माध्यम से उनका समाधान निकालना चाहिए।
ज्ञापन में सभासदों ने कहा कि विद्यार्थी देश की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य के निर्माता हैं। ऐसे में उनके साथ संवेदनशीलता, सम्मान एवं लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अधिकार देता है। लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाने के बजाय संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से समाधान निकालना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी पहचान है।
सभासदों ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। यदि छात्र अपनी शैक्षणिक, प्रशासनिक अथवा अन्य समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। किसी भी लोकतांत्रिक देश में युवाओं की आवाज को महत्व देना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या कठोर कार्रवाई के बजाय सकारात्मक संवाद स्थापित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे विषय लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में सरकार को विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, जिससे छात्रों का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था में और अधिक मजबूत हो सके।
सभासदों ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब सरकार, प्रशासन और जनता के बीच संवाद बना रहे। किसी भी वर्ग की जायज मांगों को सुनना और उनका संवैधानिक दायरे में समाधान करना सुशासन की पहचान है। विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, क्योंकि आज का छात्र ही कल का जिम्मेदार नागरिक, वैज्ञानिक, शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर और देश का नेतृत्व करने वाला युवा बनेगा।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि छात्र आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अनावश्यक कठोर कार्रवाई से बचा जाए तथा आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाए। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुलभ और छात्र हितैषी बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, जिससे विद्यार्थियों को न्याय मिल सके और उनका भविष्य सुरक्षित हो।
इस अवसर पर सभासद गजेंद्र सिंह धामा, मेहताब, बबीता धामा, रूबी धामा, महक सिंह, संजय सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाए रखने के लिए संवाद, सहिष्णुता और संवैधानिक मूल्यों का पालन आवश्यक है। उन्होंने देशवासियों से आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द एवं राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उनका समाधान हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।
अंत में सभी जनप्रतिनिधियों ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि विद्यार्थियों की समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाए तो इससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, सामाजिक विश्वास बढ़ेगा और देश के विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष एवं संवेदनशील रवैया अपनाते हुए छात्रों की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आग्रह किया।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

