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छात्र आंदोलन पर सरकार की अडियल नीति

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बागपत, 25 जुलाई 2026  (यूटीएन)। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की भांति, दशकों बाद एक बार छात्र एकजुट होकर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने लगे हैं। समय रहते केंद्र सरकार ने उचित निर्णय नहींं लिया तो जंतर मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में फैल सकता है। हालात पर गौर करें, तो बिहार में पुलिस हैलमेट लगाकर सतर्कता बरत रही है। कहीं इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी गई हैं, तो कहीं ईंट पत्थर फेंके जा रहे हैं।

इन सबके बीच संतोषजनक बात यह है कि, सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर चुके हैं। लेकिन, कोंकरोच जनता पार्टी तो जंतर मंतर पर जमा है और उन्हें समर्थन देने के लिए अब राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता व नेता दिल्ली कूच करने से रोके जाने से आक्रोश और भी पनप रहा है। ऐसे में क्या शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफा न लेने पर अडी भाजपा सरकार, किसान आंदोलन के साथ अपने नीतिगत फैसले बदलने को या वापस लेने में लंबे इंतजार की तरह से छात्र आंदोलन के साथ अपनी जिद पर छात्रों को पीछे धकेलना चाह रही है, तो यह सोच एकदम गलत है। 

ध्यान देना होगा कि, किसान आंदोलन केवल दिल्ली पर ही केंद्रित था, लेकिन छात्र आंदोलन की जड़ें दिल्ली से बाहर यानि विभिन्न राज्यों में भी फैल चुकी हैं। इतना ही नहीँ छात्र आंदोलन के समर्थन में विदेशों में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ऐसे में समय रहते नेक सलाह यही है कि, जिद को छोडें और छात्रों को विश्वास में लें तथा आंदोलन की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया जाना ही बेहतर होगा। 

वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )







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