नई दिल्ली,29 जुलाई 2026 (यूटीएन)। सहकारिता आधारित डिजिटल मोबिलिटी प्लेटफॉर्म भारत टैक्सी से देशभर में ड्राइवरों का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 19 जुलाई 2026 तक 7.97 लाख सारथी (ड्राइवर-सदस्य) इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के तहत संचालित यह प्लेटफॉर्म सहकारी मॉडल पर आधारित है और इसका उद्देश्य ड्राइवरों को अधिक आय, पारदर्शी व्यवस्था और तकनीक आधारित आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और महाराष्ट्र में आधिकारिक रूप से शुरू की गई है। प्लेटफॉर्म से सबसे अधिक 2.55 लाख सारथी दिल्ली-एनसीआर में जुड़े हैं। इसके अलावा गुजरात में 1.01 लाख और महाराष्ट्र में 71,095 ड्राइवर-सदस्यों का पंजीकरण किया गया है। अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में ड्राइवर पंजीकरण करा चुके हैं और चरणबद्ध तरीके से सेवाओं के विस्तार की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
भारत टैक्सी की सबसे बड़ी विशेषता इसका शून्य-कमीशन (Zero Commission) मॉडल है। इस व्यवस्था के तहत प्लेटफॉर्म पर बुक की गई किसी भी सवारी के किराए में से ड्राइवर की कमाई का कोई हिस्सा कमीशन के रूप में नहीं काटा जाता। पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल के विपरीत, यहां चालक को उसकी पूरी किराया राशि प्राप्त होती है। तकनीकी सेवाओं, मोबाइल ऐप के संचालन, रखरखाव और विस्तार के लिए ड्राइवरों से अलग से मामूली राइड सब्सक्रिप्शन अथवा प्लेटफॉर्म उपयोग शुल्क लिया जाता है। इससे यात्रियों द्वारा दिए गए किराए पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ता और ड्राइवर की आय भी सुरक्षित रहती है।
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता आधारित यह मॉडल ड्राइवरों को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का भी अवसर प्रदान करता है। इस व्यवस्था में ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि सहकारी संस्था के सदस्य के रूप में भी जुड़ते हैं। इससे निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ती है और प्लेटफॉर्म का संचालन अधिक पारदर्शी तथा सदस्य-केंद्रित बनता है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक और सहकारिता मॉडल का यह समन्वय देश में परिवहन सेवाओं के क्षेत्र में एक नया विकल्प प्रस्तुत करेगा। इससे यात्रियों को विश्वसनीय, सुरक्षित और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी, जबकि ड्राइवरों को अपनी मेहनत का बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भविष्य में इस मॉडल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी विकसित होने की संभावना है।
सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के अनुसार, भारत टैक्सी की सेवाओं का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। नए शहरों और राज्यों में परिचालन शुरू करने से पहले स्थानीय परिवहन नियमों, परमिट व्यवस्था, तकनीकी ढांचे, ड्राइवरों की उपलब्धता और आवश्यक सरकारी अनुमोदनों का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित राज्य सरकारों, सहकारी संस्थाओं, परिवहन विभागों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर सेवाएं प्रारंभ की जाएंगी।
एसटीसीएल ने स्पष्ट किया कि किसी भी नए राज्य में सेवाएं शुरू करने से पहले वहां के वैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। राज्यवार परिवहन नीतियों, मोटर वाहन नियमों, परमिट व्यवस्था, बीमा और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए विस्तार की रणनीति तैयार की जा रही है।
सरकार का कहना है कि भारत टैक्सी केवल एक कैब बुकिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि सहकारिता आधारित आर्थिक मॉडल का एक महत्वपूर्ण प्रयोग है। इसका उद्देश्य ड्राइवरों को बिचौलिया आधारित व्यवस्था से राहत देना, उनकी आय बढ़ाना और डिजिटल तकनीक के माध्यम से उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। भविष्य में इस प्लेटफॉर्म पर और अधिक सेवाएं जोड़ने तथा आधुनिक तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करने की भी योजना बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शून्य-कमीशन मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है और सेवा की गुणवत्ता, ग्राहक सहायता तथा तकनीकी संचालन मजबूत रहता है, तो भारत टैक्सी देश के डिजिटल मोबिलिटी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, ड्राइवरों को बेहतर आय के अवसर मिलेंगे और यात्रियों को भी अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने की व्यापक नीति के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि, डेयरी, बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों की तरह परिवहन क्षेत्र में भी सहकारी मॉडल को प्रोत्साहित कर रोजगार, पारदर्शिता और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल भारत टैक्सी का संचालन तीन प्रमुख राज्यों में शुरू हो चुका है, जबकि अन्य राज्यों में इसके विस्तार की तैयारियां जारी हैं। सरकार और एसटीसीएल का लक्ष्य है कि आवश्यक अनुमोदनों, तकनीकी तैयारियों और स्थानीय समन्वय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस प्लेटफॉर्म को देश के अधिक से अधिक शहरों तक पहुंचाया जाए, ताकि सहकारिता आधारित डिजिटल परिवहन व्यवस्था का लाभ बड़ी संख्या में ड्राइवरों और यात्रियों तक पहुंच सके।

