नई दिल्ली, 12 मई 2026 (यूटीएन)। रामायण रिसर्च काउंसिल मां सीताजी के प्रेरणादायी जीवन आदर्शों को जानकी-कथा के माध्यम से जन-जन तक ले जाएगी। यह जानकारी रामायण रिसर्च काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने दी। सुशांत ने बताया कि उत्तराखण्ड में नैनीताल-उधमसिंहनगर से सांसद तथा काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अजय भट्ट के नेतृत्त्व में ही इस जानकी-कथा का आयोजन किया जाएगा। प्रेस-वार्ता के दौरान इसकी घोषणा की गई। इस पर सांसद अजय भट्ट ने कहा कि उनके लिए यह गर्व का विषय है कि उन्हें सीता-रामकाज में अक्सर बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अवसर मिलता रहा है। उन्होंने पहली जानकी-कथा आगामी 16 मई को देवभूमि उत्तराखण्ड में रामनगर के पाटकोट रेंज स्थित सीताबनी में आयोजित करवाने की घोषणा की जो स्थान रामायण-काल से जुड़ा है और मां सीताजी को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि पहली जानकी कथा काउंसिल के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी सांदीपेंद्र जी महाराज के स्नेही शिष्य 12 वर्षीय बाल-व्यास वैदेहीनंदन वेदांतजी करेंगे। भट्ट ने कहा कि हम काउंसिल के बैनर तले भारत के हर राज्य, ज़िले से लेकर गांव-गांव तक इस जानकी-कथा को लेकर जाना चाहते हैं जिसमें जन-सहयोग भी मिल रहा है। भट्ट ने बताया कि मां सीताजी के प्रेरणादायी जीवन से हर एक नारी को सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इन कथाओं से विश्व की हर नारी को पता चलेगा कि उनमें भगवती-तत्त्व है और सीता-तत्त्व है, बस ज़रूरत है तो इसे समझने की। उन्होंने बताया कि मां सीताजी पर हम जितनी चर्चा करेंगे, हमारी माताओं एवं बहनों का परिवार तथा समाज में उतना अधिक सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि नारी-शक्ति की समृद्धि से ही सुसंस्कृत समाज व राष्ट्र विकसित होता है।
भट्ट ने कहा कि जानकी-कथा से नारी-शक्ति में आत्मनिर्भरता का भी बोध आएगा और एक नारी को विस्तार से पता चलेगा कि सीता-स्वरूप में एक बालिका राजा जनक की कोमल पुत्री होती है, कम उम्र में ही विवाह होने पर वह नारी एक आदर्श पत्नी भी होती है, मुश्किल परिस्थिति में वह पति के साथ वन भी जाती है और दुष्ट रावण द्वारा हरण होने पर वह लंका तक में धैर्य नहीं खोती। उन्होंने कहा कि धरा की पुत्री धरा में ही समाहित हो जाती है, क्योंकि वह साक्षात महालक्ष्मी नारायणी होती हैं, परंतु वह समस्त नारी-समाज को अनंतकाल के लिए एक संदेश देकर जाती है। सांसद भट्ट ने कहा कि मां सीताजी के कार्यों को बल देने के लिए तथा जानकी कथा के प्रसार के लिए शीघ्र ही सीता सखी समिति का गठन किया जाएगा। वहीं प्रेस वार्ता में उपस्थित संत महामंडलेश्वर स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल मां सीताजी के प्राकट्य-क्षेत्र सीतामढ़ी को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि काउंसिल का उद्देश्य केवल मंदिर-निर्माण की ही नहीं है, बल्कि मां जानकीजी के जीवन-आदर्शों का प्रसार पूरे विश्वभर में प्रसार करना भी है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें खुशी है कि अब रामायण रिसर्च काउंसिल जानकी कथा का प्रसार करने जा रही है। वहीं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि इस पवित्र कार्य में भारत के हर वर्ग के लोगों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीताराम जन-जन में हैं और जन-जन के हैं, ऐसे में यह कार्य हर एक सनातनी का है। उन्होंने कहा कि मां सीताजी पर जितना अधिक कार्य होगा, हमारी नारी उतनी सशक्त होंगी। प्रेस वार्ता में काउंसिल के ट्रस्टी डॉ. देव दत्त शर्मा, देव रत्न शर्मा, केवल कपूर, प्रण शर्मा, सचिव पिताम्बर मिश्र, रौशन सिंह, प्रवक्ता जीविकांत झा, अम्बर अग्रवाल, रितेश अग्रवाल समेत कई पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। सांसद तथा रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल मां सीताजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए वर्ष 2020 से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि हम काउंसिल परिवार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने नौ मार्च 2025 को गुजरात के गांधीनगर से सीतामढ़ी में मां सीताजी के प्राकट्य-स्थान पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए न केवल घोषणा की, बल्कि बिहार सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मिलकर पुनौरा धाम में इसकी आधारशिला भी रख दी। उन्होंने कहा कि काउंसिल के भी लंबे समय के प्रयत्नों को देखते हुए बिहार सरकार अंतर्गत बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने विगत वर्ष काउंसिल को सीतामढ़ी में राघोपुर बखरी स्थित अति प्राचीन मठ (834 वर्ष प्राचीन) श्रीरामजानकी मठ पर लगभग 12 एकड़ भूमि भी आवंटित की। उन्होंने कहा कि वहां के महंत ने जानकारी दी कि यह मठ एक समय में विश्वामित्र जी का ध्यान-केंद्र हुआ करता था, यहां दो संतों का ध्यानस्थ अवस्था में शरीर को त्याग देना तथा उनका समाधि-स्थल इसका जीता-जागता प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि संबंधित स्थल पर 51 शक्तिपीठों से मिट्टी व ज्योत लाकर यहां एक 'अखण्ड शक्तिपुंज' को स्थापित करना प्रस्तावित है, तो वहीं दुर्गा सप्तशती के प्राधानिक रहस्य में उल्लेखित सभी विद्याओं की मूल 'श्रीचतुर्भुजा महालक्ष्मीजी' को भी गर्भ-गृह में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि बीते 25 अप्रैल 2026 को काउंसिल ने सीतामढ़ी के प्राचीन श्रीरामजानकी-मठ के जीर्णोद्धार हेतु शिलापूजन कार्यक्रम बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों संपन्न किया।
*कई प्रकल्पों पर कार्य कर रही है काउंसिल*
अजय भट्ट ने कहा कि इससे पूर्व काउंसिल के बैनर तले अयोध्या में श्रीराम मंदिर संघर्ष पर लगभग 1250 पृष्ठों का एक ग्रंथ- ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’ भी तैयार किया गया है जो लगभग 500 वर्षों के संघर्ष के दृष्टांत पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस ग्रंथ की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 31 अगस्त 2021 को उनके मिलकर दी थी तथा उनके मार्गदर्शन के बाद ही यह हिन्दी भाषा में पूर्ण हो सका है एवं इसका अंग्रेजी भाषा में अनुवाद भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि इसका कई अन्य भाषाओं में भी अनुवाद होना भी प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि काउंसिल संस्कृत भाषा के शिक्षण-प्रशिक्षण पर कार्य करने के साथ-साथ देवभाषा के प्रसार के लिए संस्कृत भाषा में एक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का प्रकाशन भी करती रही है। उन्होंने बताया कि काउंसिल ने बीते वर्ष के महाकुंभ पर आधारित एक बड़ा साहित्य ‘महाकुंभ का महामंथन’ भी तैयार किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान उन्होंने ‘डिजिटल रामलीला’ का भी मंचन किया गया था जिसमें देशभर के सांसद, समाजसेवी, मातृशक्ति एवं बुद्धिजीवि जुड़े थे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

