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वैश्विक अनिश्चितता आत्मनिर्भरता के महत्व को उजागर करती है: सचिव, डीओसीपी

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"बजट घोषणा के अनुरूप, तीन समर्पित रसायन पार्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिनका न्यूनतम क्षेत्रफल लगभग 8 वर्ग किलोमीटर होगा और जिनके लिए 5 वर्षों की अवधि में प्रत्येक को 1000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

नई दिल्ली, 21 मई 2026  (यूटीएन)। भारत का स्पेशलिटी केमिकल्स (विशेष रसायन) क्षेत्र समग्र रसायन उद्योग के सबसे तेजी से बढ़ते हिस्सों में से एक बन गया है और इसने वैश्विक स्तर पर खुद को एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में स्थापित किया है। इस गति को बनाए रखने के लिए सभी हितधारकों के बीच मजबूत सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसोचैम द्वारा 'इंडिया स्पेशलिटी केमिकल्स कॉन्क्लेव' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बोलते हुए, भारत सरकार के रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग के सचिव तेजवीर सिंह ने कहा, "पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ है, और वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में, स्पेशलिटी केमिकल्स क्षेत्र के लिए अपेक्षाकृत अधिक आत्मनिर्भर होना महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र पेट्रोलियम क्षेत्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयात बिल (बड़े पैमाने पर आयात) वाला क्षेत्र है, और इस सदी की शुरुआत से ही हमारा व्यापार घाटा काफी बढ़ गया है। इस क्षेत्र के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता, क्योंकि यह देश की संपूर्ण औद्योगिक संरचना को आधार प्रदान करता है।
 
"बजट घोषणा के अनुरूप, तीन समर्पित रसायन पार्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिनका न्यूनतम क्षेत्रफल लगभग 8 वर्ग किलोमीटर होगा और जिनके लिए 5 वर्षों की अवधि में प्रत्येक को 1000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। देश के विभिन्न तकनीकी संस्थानों में स्थापित किए गए 18 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (उत्कृष्टता केंद्र) काफी दिलचस्प कार्य कर रहे हैं, और बेहतर उद्योग-अकादमिक संवाद के लिए उद्योग जगत को उनके साथ जुड़ना चाहिए। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के 'औद्योगिक उत्पादन सूचकांक' के लिए उद्योग से संबंधित डेटा संग्रह अब मासिक आधार पर किया जाएगा; साथ ही, इस सूचकांक को सही मायने में अधिक प्रतिनिधि बनाने के लिए डेटा बिंदुओं (डेटा इकाइयों) की संख्या 245 से बढ़ाकर लगभग 400 कर दी गई है," उन्होंने आगे कहा। अपने प्रारंभिक संबोधन में, एसोचैम की रसायन और पेट्रोकेमिकल्स पर राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष सागर कौशिक ने कहा, "वर्ष 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से, स्पेशलिटी केमिकल्स सहित संपूर्ण रसायन क्षेत्र को पुनर्स्थापित करने की एक शानदार यात्रा वर्तमान में जारी है।
 
इस यात्रा को पूरा करने के लिए अभूतपूर्व स्तर पर क्षमता निर्माण की आवश्यकता होगी, क्योंकि हमारी घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है; और यदि हम इस बढ़ती मांग को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो हमारे आयात पर निर्भरता (आयात टोकरी) के और अधिक बढ़ने का जोखिम बना रहेगा। बढ़ती मांगों को पूरा करने की अपनी क्षमता को पूरी तरह से उपयोग में लाने के लिए, इस उद्योग को एक 'समान अवसर' की आवश्यकता है।" एसोचैम की केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स पर बनी नेशनल काउंसिल के को-चेयरमैन कपिल मल्होत्रा ​​ने कहा, “छोटे तीसरी दुनिया के देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते भले ही वे उन्नत हों—व्यापार घाटे को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि उनके पास कोई बड़ा बाजार नहीं होता, लेकिन उनके लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार है। ये समझौते ऐसे रूप में होने चाहिए, जिससे इसमें शामिल दोनों देशों के लिए ‘जीत-जीत’की स्थिति बने।” इस कार्यक्रम में बोलते हुए एसोचैम की केमिकल्स पर बनी नेशनल काउंसिल के को-चेयरमैन नीलेश ए. कुलकर्णी ने कहा, “2025 में, हमारी घरेलू प्रगति बहुत मजबूत रही।
 
भारत का केमिकल बाजार 2030 तक अनुमानित 250 से 300 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था। पश्चिम एशिया के संकट ने हमें दिखाया है कि हम इस समय ‘मार्जिन में कमी’ के दौर से गुज़र रहे हैं, क्योंकि बाजार में ‘डी-स्टॉकिंग’ (माल की निकासी) हो रही है, और चीन व अन्य देशों से ‘क्षमता डंपिंग’  हो रही है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे ‘डाउनस्ट्रीम स्पेशलिटी केमिकल सेक्टर’ को कच्चा माल (feed) मिलता रहे, ताकि वे उच्च-मूल्य वाले उत्पाद बना सकें और हमारी आत्मनिर्भरता बढ़ सके।” इस सम्मेलन में, एसोचैम और पीडब्ल्यूसी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई, इस क्षेत्र से संबंधित एक ‘नॉलेज रिपोर्ट’ भी जारी की गई। इस सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने नवाचार, निर्यात-आधारित विकास, उभरते हुए क्षेत्रों में आधुनिक रसायनों के उपयोग, तथा ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ तरीकों के साथ-साथ ‘प्रक्रिया सुधार’के लिए सुरक्षा मानकों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
 
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।






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