नई दिल्ली, 21 मई 2026 (यूटीएन)। 15 मई से 20 मई के बीच पीएम मोदी महज छह दिन में पांच देशों का दौरा करके लौटे हैं. ये यात्रा सिर्फ विदेशी मेहमान नवाजी या फोटो सेशन तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत हर पड़ाव से कुछ ऐसा लेकर लौटा है जो सीधे देश की ऊर्जा सुरक्षा, चिप निर्माण, ग्रीन एनर्जी और कारोबारी ताकत को नया आयाम देगा. संयुक्त अरब अमीरात से लेकर इटली तक, हर मुलाकात मेंबर ऐसे समझौते हुए जिसका असर आने वाले दशकों तक हमारी जेब, हमारी नौकरियों और हमारी सुरक्षा पर पड़ने वाला है.
*पहला पड़ाव- संयुक्त अरब अमीरात: ऊर्जा सुरक्षा का नया अध्याय*
पीएम मोदी 15 मई की सुबह सबसे पहले अबू धाबी पहुंचे. करीब 3 घंटे के इस छोटे से प्रवास में ही दोनों देशों के बीच 7 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें सबसे अहम रहा 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व एग्रीमेंट'. यह रणनीतिक तेल भंडार पर बड़ी डील संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय तेल कंपनी एडीएनओसी अब भारत के रणनीतिक तेल भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी. युद्ध या आपूर्ति में रुकावट की स्थिति में इस रिजर्व पर पहला अधिकार भारत का होगा. संयुक्त अरब अमीरात इस भंडारण के लिए भारत को किराया भी देगा.
अभी भारत के पास कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में तीन रणनीतिक तेल भंडार हैं, जिनकी क्षमता 53.3 लाख मीट्रिक टन (करीब 4 करोड़ बैरल) है, लेकिन वे केवल 65% भरे हुए हैं. इस डील के बाद भारत का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद 9 दिनों की खपत से बढ़कर 14-15 दिनों के बराबर हो जाएगा.
इस डील की सबसे खास बात यह है कि संयुक्त अरब अमीरात का यह तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से न गुजरकर, हशबान ऑयल फील्ड से एक विशेष पाइपलाइन के जरिए सीधे फुजैराह बंदरगाह पहुंचेगा, जहां से जहाज भारत आ सकते हैं. इससे भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति मार्ग मिलेगा.
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर एक बड़ा जहाज मरम्मत केंद्र और नाविकों का ट्रेनिंग सेंटर बनाएगा. साथ ही, बुनियादी ढांचे, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में 3 बिलियन डॉलर (लगभग 48,000 करोड़ रुपये) का निवेश करने पर भी सहमति बनी.
*दूसरा पड़ाव- नीदरलैंड: सेमीकंडक्टर क्रांति और महत्वपूर्ण खनिज*
15 मई की रात करीब 9 बजे पीएम मोदी एम्स्टर्डम पहुंचे और करीब डेढ़ दिन रुके. इस दौरान उन्होंने राजपरिवार और प्रधानमंत्री से मुलाकात की और कुल 17 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें दो समझौते बेहद अहम हैं:
*चिप-मेकिंग में ऐतिहासिक डील:*
नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी एएसएमआर ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ चिप मैन्युफैक्चरिंग में पार्टनरशिप की है. टाटा गुजरात के धोलेरा में 91,000 करोड़ रुपये की लागत से भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रही है. एएसएमआर अपनी एकाधिकार वाली लिथोग्राफी तकनीक से वहां चिप उत्पादन शुरू करने में मदद करेगी. इससे भारत की चिप आयात पर निर्भरता कम होगी, जो अभी 90% है. 2023-24 में 1.05 लाख करोड़ रुपये की चिप्स आयात की गई थीं.
महत्वपूर्ण खनिजों के लिए समर्थन: नीदरलैंड भारत को कोबाल्ट, लिथियम, ग्रेफाइट और निकलने से 30 महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और खनन के लिए आधुनिक तकनीक देगा. अभी भारत अपनी जरूरत का 70% से 100% तक ये खनिज चीन जैसे देशों से आयात करता है.
*कल्पसार परियोजना:* गुजरात में खंभात की खाड़ी पर बनने वाले 30 किलोमीटर लंबे बांध की डिजाइन और इंजीनियरिंग में वॉटर मैनेजमेंट एक्सपर्ट नीदरलैंड मदद करेगा.
सांस्कृतिक धरोहर की वापसी: नीदरलैंड ने 11वीं सदी के चोल राजवंश की 21 बड़ी और 3 छोटी ताम्रपत्र (तांबे की प्लेट) भारत को लौटा दी. 18वीं सदी में डच मिशनरी इन्हें यूरोप ले गए थे और भारत 2012 से इन्हें वापस लाने की कोशिश कर रहा था.
*तीसरा पड़ाव- स्वीडन: रणनीतिक साझेदारी और मुक्त व्यापार की राह*
17 मई को पीएम मोदी स्टॉकहोम पहुंचे. यहां उन्हें स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार' से सम्मानित किया गया.
स्वीडन में:रणनीतिक साझेदारी बढ़ी: भारत और स्वीडन के बीच संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया गया और अगले 5 सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पीएम मोदी से मुलाकात में वादा किया कि वे साल के अंत तक इस समझौते पर हस्ताक्षर कर देंगी. इस डील के तहत यूरोप से भारत आने वाली 96.6% वस्तुओं पर से टैरिफ पूरी तरह हटा दिया जाएगा या बहुत कम कर दिया जाएगा. यूरोप भी भारत से आने वाले 99.5% सामान पर ऐसा ही करेगा.
*चौथा पड़ाव- नॉर्वे: 43 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा और हरित ऊर्जा*
18 मई को पीएम मोदी ओस्लो पहुंचे. यह 43 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा थी, इससे पहले 1983 में इंदिरा गांधी वहां गई थीं. यहां दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए:
हरित रणनीतिक साझेदारी: दोनों देशों के बीच 12 मुद्दों पर समझौते हुए, जिनमें सबसे अहम है 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप'. इसके तहत नॉर्वे भारत के स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन, जलविद्युत, परमाणु) परियोजनाओं में बड़ा निवेश करेगा. गौरतलब है कि नॉर्वे की 98% बिजली आपूर्ति स्वच्छ ऊर्जा से होती है, जबकि भारत का 2030 तक 500 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है, जिसके मुकाबले अप्रैल 2026 तक सिर्फ 283.46 मेगावाट क्षमता ही स्थापित हो पाई है.
रसोई गैस खरीद पर बात: नॉर्वे यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और रोजाना लगभग 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है. ईरान युद्ध के बाद से भारत ने नॉर्वे से आईएमईसी की खरीद बढ़ाई है और भविष्य में वहां से और तेल खरीदने के विकल्प तलाश रहा है.
*पांचवां पड़ाव- इटली: व्यापार, आईएमसी और 'मेलोडी' की दोस्ती*
यूरोपीय दौरे के आखिरी पड़ाव पर पीएम मोदी 19 मई को रोम पहुंचे और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मालिनी से मुलाकात की. दोनों नेता एक ही कार में घूमे और 2,000 साल पुराने बेल्जियम में सेल्फी भी ली. इसके बाद मेलोडी सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा. भारत और इटली के बीच 2 बड़े समझौते हुए:
आईएमसी को आगे बढ़ाने पर सहमति: भारत और इटली ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे को आगे बढ़ाने का फैसला किया. यह परियोजना भारत को रेलवे, बंदरगाह और शिपिंग नेटवर्क के जरिए मिडिल ईस्ट और यूरोप से जोड़ेगी, जिससे भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने का समय और लागत 30-40% तक कम हो सकती है. एआई और साइबर सुरक्षा में सहयोग: दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा देने का फैसला किया और 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से ज्यादा तक ले जाने का टारगेट रखा. फिलहाल दोनों देशों के बीच 14 अरब यूरो (लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये) का व्यापार होता है.
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

