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भारत ग्लोबल फार्मा सेक्टर में लीड करने के लिए तैयार: जे.पी. नड्डा

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नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2026 (यूटीएन)। भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग  का मुख्य कार्यक्रम, इंडिया फार्मा 2026 का 9वां संस्करण आज नई दिल्ली में शुरू हुआ। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस के सहयोग से आयोजित यह दो-दिवसीय सम्मेलन ग्लोबल फार्मास्यूटिकल और हेल्थकेयर इकोसिस्टम के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाता है, जिसमें इनोवेशन, आत्मनिर्भरता और ग्लोबल लीडरशिप पर विशेष जोर दिया गया है। उद्घाटन सत्र को वर्चुअली संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि यह मंच भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर की ताकत और बढ़ती ग्लोबल प्रासंगिकता, दोनों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जहाँ भारत को लंबे समय से सस्ती जेनेरिक दवाओं में अपनी लीडरशिप के कारण "दुनिया की फार्मेसी" के रूप में पहचाना जाता रहा है, वहीं अब ग्लोबल परिदृश्य तेजी से बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और स्पेशलिटी दवाओं की ओर बढ़ रहा है।
 
उन्होंने कहा, "इस बदलते माहौल में, भारत न केवल खुद को ढालने के लिए, बल्कि एक ग्लोबल लीडर के रूप में उभरने के लिए भी अच्छी स्थिति में है।" इनोवेशन को बढ़ावा देने और रिसर्च क्षमताओं को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने हाल ही में शुरू की गई 'बायोफार्मा शक्ति पहल' पर प्रकाश डाला। इस पहल के लिए 10,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है और इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बायोफार्मास्यूटिकल इनोवेशन में क्षमताओं को आगे बढ़ाना है। उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल टेक्नोलॉजी में रिसर्च को बढ़ावा देने वाली पीआरआईपी योजना जैसी पूरक पहलों पर भी जोर दिया। इन पहलों का उद्देश्य इंडस्ट्री और एकेडेमिया के बीच सहयोग को गहरा करना और इनोवेटिव उपचारों के विकास में तेजी लाना है। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करना एक अहम प्राथमिकता बनी हुई है, जिसे प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी योजनाओं और आत्मनिर्भरता व मज़बूत सप्लाई चेन को बढ़ाने के लिए बल्क ड्रग पार्कों के विकास से समर्थन मिल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना जैसी पहलों के ज़रिए किफ़ायती स्वास्थ्य सेवा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया; ये पहलें पूरे देश में किफ़ायती कीमतों पर अच्छी क्वालिटी की दवाइयों तक पहुँच का विस्तार कर रही हैं।
 
उन्होंने आगे कहा कि 'इंडिया फार्मा 2026' इस क्षेत्र के लिए बातचीत, साझेदारी और एक भविष्य-उन्मुखी रोडमैप को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री, अनुप्रिया पटेल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत एक वैश्विक जेनेरिक लीडर से एक उभरते हुए बायोफार्मा इनोवेशन हब में बदलने के एक महत्वपूर्ण दौर से गुज़र रहा है। उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में वैश्विक जेनेरिक दवाइयों में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान देता है और वैश्विक वैक्सीन की मांग का लगभग 70 प्रतिशत पूरा करता है, जो देश की मज़बूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को दर्शाता है। भविष्य के अवसरों पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने कहा कि बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स की वैश्विक मांग तेज़ी से बढ़ रही है, और बायोसिमिलर्स का बाज़ार 2030 तक 75 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। उन्होंने आगे बताया कि वैश्विक फार्मास्यूटिकल बाज़ार के मूल्य में लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा इनोवेटिव दवाइयों का है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि भारत को इनोवेशन-आधारित क्षेत्रों पर अपना ध्यान और तेज़ करने की ज़रूरत है। पटेल ने दवा की खोज और विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकरण की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने उन्नत अनुसंधान और इनोवेशन को समर्थन देने के लिए एनआईपीईआर और आईआईटी जैसे प्रमुख संस्थानों के माध्यम से मानव संसाधन को मज़बूत करने के महत्व पर ज़ोर दिया।
 
फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव, मनोज जोशी ने इनोवेशन की समय-सीमा को तेज़ करने, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूत करने और क्लिनिकल ट्रायल व उन्नत अनुसंधान के लिए एक मज़बूत बुनियादी ढाँचा तैयार करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने बेहतर फंडिंग तंत्र, उद्योग और सरकार के बीच घनिष्ठ सहयोग, और कुशल प्रतिभा के विकास के महत्व को रेखांकित किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने नियामक इकोसिस्टम को मज़बूत करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने बताया कि मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और अनुसंधान करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिसका उद्देश्य भारत को "दुनिया की फार्मेसी" से "दुनिया के लिए एक इनोवेटर" में बदलना है। फिक्की फार्मा समिति के अध्यक्ष अर्जुन जुनेजा ने भारत के मज़बूत फार्मास्युटिकल आधार पर ज़ोर देते हुए बताया कि यहाँ 3,000 से ज़्यादा कंपनियाँ और 10,500 से ज़्यादा मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएँ मौजूद हैं, जिनमें यूएस की सबसे ज़्यादा सुविधाएँ भी शामिल हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर एफडीए-अनुरूप प्लांट। उन्होंने इनोवेशन-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए भारतीय और वैश्विक खिलाड़ियों के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। फिक्की फार्मा समिति के सह-अध्यक्ष अचिन गुप्ता ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। दो दिवसीय सम्मेलन और प्रदर्शनी में इनोवेशन के लिए नीतिगत ढांचों, दवा खोज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अगली पीढ़ी की तकनीकों और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम से फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के भविष्य के रोडमैप को आकार देने और एक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा नेता के रूप में भारत की स्थिति को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।
 
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।






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