नई दिल्ली,07 अगस्त 2026 (यूटीएन)। रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से गोस्वामी तुलसीदासजी की जयंती के अवसर पर आयोजित किए जाने वाले ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए चयनित 28 विभूतियों के नामों की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। सम्मान समारोह का आयोजन 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी स्थित मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से किया जाएगा।
रामायण, भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध, रामकथा, संगीत और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली इन विभूतियों को समारोह में सम्मानित किया जाएगा। चयनित लोगों में भजन एवं संगीत जगत से जुड़े प्रतिष्ठित नामों के साथ साहित्यकार, शोधकर्ता, संत, शिक्षाविद और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्व शामिल हैं।
250 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए
रामायण रिसर्च काउंसिल के अनुसार ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए नामांकन प्रक्रिया 9 जुलाई से 26 जुलाई 2026 तक संचालित की गई थी। इस दौरान गूगल फॉर्म, ई-मेल और कूरियर के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से 250 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए।
सभी नामांकनों का चयन समिति ने निर्धारित मानकों के आधार पर विस्तृत परीक्षण किया। समिति के सदस्यों ने नामांकित व्यक्तियों के योगदान, कार्यक्षेत्र और रामायण तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से उनके जुड़ाव पर विचार-विमर्श किया। इसके बाद 28 विशिष्ट विभूतियों का चयन किया गया।
भारतीय संस्कृति और रामायण परंपरा को समर्पित सम्मान
रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि ‘रामायणी सम्मान’ का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध, रामकथा, संगीत और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में रामायण आधारित उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान करना है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तियों का अभिनंदन नहीं है, बल्कि भारत की सनातन सांस्कृतिक परंपरा, भारतीय ज्ञान-विरासत तथा भगवान श्रीराम और मां सीता के आदर्शों के प्रति समाज की सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक भी है।
उन्होंने कहा कि सम्मान के माध्यम से रामायण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को राष्ट्रीय पहचान देना, विभिन्न रामायण परंपराओं और शोध कार्यों को मुख्यधारा में लाना तथा नई पीढ़ी को रामायण साहित्य एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ना प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
परिवार और समाज में मूल्यों को मजबूत करने पर जोर
अजय भट्ट ने कहा कि वर्तमान समय में परिवार और सामाजिक मूल्यों के सामने अनेक चुनौतियां हैं। पारिवारिक ढांचे में बदलाव और सामाजिक दूरी के बीच भगवान श्रीराम और मां सीता के आदर्शों का व्यापक प्रसार आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि रामायण और श्रीरामचरितमानस समाज में शांति, धैर्य, मर्यादा और पारिवारिक सौहार्द की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राष्ट्रसेवा में समर्पित व्यक्तित्व भी किसी न किसी रूप में भगवान श्रीसीताराम के आदर्शों का अनुसरण करते हैं। ऐसे व्यक्तित्वों का सम्मान समाज में सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिर्माण की भावना को और मजबूत करेगा।
काशी में आयोजन को बताया गौरव का विषय
प्रेस वार्ता में शामिल साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्रीरामचरितमानस की रचना मुख्य रूप से काशी की पवित्र धरती पर की थी। ऐसे में काशी में रामायणी सम्मान का आयोजन होना गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ की पावन धरती, सावन का महीना, मां गंगा का तट और संकटमोचक श्रीहनुमानजी की कृपा के बीच रामायणी सम्मान का आयोजन विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने बताया कि रामायण रिसर्च काउंसिल मां सीता के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देशभर में पहली बार श्रीजानकी-कथा के आयोजन के माध्यम से ऐसे रामायणी व्यक्तित्वों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है, जो अध्यात्म, समाज और भगवान श्रीराम से जुड़े साहित्य को अपने जीवन में उतारते हैं।
सात श्रेणियों में प्रदान किया जाएगा सम्मान
‘रामायणी सम्मान’ के संयोजक एवं काउंसिल के ट्रस्टी डॉ. देव दत्त शर्मा ने बताया कि इस वर्ष सम्मान के लिए सात श्रेणियां निर्धारित की गई थीं।
इनमें—
- रामायण शोध सम्मान
- रामकथा वाचन सम्मान
- रामायण साहित्य सम्मान
- रामायण संगीत सम्मान
- बाल रामायणी सम्मान
- राष्ट्रसेवा रामायणी सम्मान
- श्रीसीताराम-पथिक सम्मान
शामिल हैं।
उन्होंने चयन प्रक्रिया में शामिल निर्णायक मंडल के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। निर्णायक मंडल में संतगण, साहित्यकार, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन, प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार, अधिवक्ता और संस्कृत के विद्वान शामिल रहे।
डॉ. देव दत्त शर्मा ने विशेष रूप से बीएचयू के कुलपति डॉ. अजीत चतुर्वेदी, भारत अध्ययन केंद्र के प्रो. शरदेन्दु तिवारी तथा सेवाज्ञ संस्थानम के पदाधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता का प्रयास
चयन समिति के सदस्य एवं काउंसिल के ट्रस्टी एडवोकेट भरत नागर ने कहा कि चयनित विभूतियों का सम्मान रामायण परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रचार-प्रसार के अभियान को नई ऊर्जा देगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आयोजनों से भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति समाज में, विशेषकर युवाओं में, नई जागरूकता पैदा होगी। रामायण के विभिन्न आयामों पर कार्य कर रहे लोगों को एक मंच मिलने से इस क्षेत्र में शोध और रचनात्मक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
19 अगस्त को बीएचयू पहुंचने का आग्रह
काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत और सचिव पिताम्बर मिश्र ने संत-महात्माओं, विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, साहित्यकारों, रामकथाकारों, कलाकारों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से 19 अगस्त को बीएचयू, वाराणसी में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में सहभागिता का आग्रह किया।
काउंसिल की ओर से राजीव सिंह, सीए राकेश सिंह, योगेश अग्रवाल, राजेश सिंह, आनंद मोहन सिंह, रितेश अग्रवाल, कुमार स्मृति, जीविकांत झा और रौशन सिंह उपस्थित रहे। चयन समिति के सदस्य डॉ. संदीप मारवाह, डॉ. आरके तिवारी और अनिल माहेश्वरी की भी चयन प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका रही।
रामायण रिसर्च काउंसिल की अन्य पहलों का भी उल्लेख
अजय भट्ट ने रामायण रिसर्च काउंसिल की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि कोरोना काल के दौरान काउंसिल ने भगवान श्रीराम के मानव कल्याण संदेशों को देशभर में पहुंचाने के उद्देश्य से डिजिटल रामलीला मंचन का आयोजन किया था।
उन्होंने बताया कि अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण की यात्रा पर आधारित करीब 1250 पृष्ठों का ग्रंथ ‘श्रीरामलला—मन से मंदिर तक’ भी तैयार किया गया है।
संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ के नियमित प्रकाशन का भी उल्लेख किया गया।
सीतामढ़ी में प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी
अजय भट्ट ने बताया कि सीतामढ़ी में काउंसिल की गतिविधियों को देखते हुए बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद की ओर से श्रीरामजानकी स्थान पर 12 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं ज्योत लाकर अखंड ज्योत की स्थापना करने तथा चतुर्भुजा महालक्ष्मीजी की स्थापना की योजना है।
उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल 2026 को प्राचीन मठ के जीर्णोद्धार के शिलापूजन कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए थे। वहीं 29 जुलाई 2026 से जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ होने की जानकारी भी दी गई।
काउंसिल की ओर से सीतामढ़ी में विश्व-नारी-शक्ति केंद्र स्थापित करने तथा मां सीता के आदर्शों को व्यापक रूप से समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से देश-विदेश के सनातन समाज से जुड़ने का आह्वान किया जा रहा है।
‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए चयनित 28 विभूतियां
- अनूप जलोटा — भजन-सम्राट
- श्रीमती अनुराधा पौडवाल
- आर.के. सिन्हा — बिहार
- स्व. किशोर कुणाल — पटना, बिहार, मरणोपरांत
- डॉ. अर्चना प्रकाश — लखनऊ
- भगवान दास — दिल्ली
- डॉ. उदय प्रताप सिंह — वाराणसी
- डॉ. अवधि हरि — लखनऊ
- योगेश्वर प्रसाद देवरानी — नैनीताल, उत्तराखंड
- आदित्य जैन — नीमच, मध्य प्रदेश
- अभय माणके — इंदौर, मध्य प्रदेश
- संत श्री हरिओम — हाथरस, उत्तर प्रदेश
- नरेंद्रनाथ गगन — बिहार
- योगेश चंद्र शर्मा (योगी) — आगरा, उत्तर प्रदेश
- संजीव — बिहार
- डॉ. आशा ओझा — बिहार
- श्रीमती मदगुल्ला प्रफुल्ला — आंध्र प्रदेश
- बिनोद कुमार तिवारी — झारखंड
- डॉ. चंद्र प्रभा मदान — हरियाणा
- आचार्य संतोष पांडेय — राजस्थान
- अजय याग्निक — दिल्ली
- विंध्याचल मणि त्रिपाठी — उत्तर प्रदेश
- राजराधे कृष्ण शर्मा — महाराष्ट्र
- प्रेम प्रकाश दुबे — महाराष्ट्र
- त्रिलोकी नाथ पांडेय — उत्तर प्रदेश
- रामधनी द्विवेदी — उत्तर प्रदेश
- डॉ. रविशंकर पांडेय — उत्तर प्रदेश
- श्रीमती रेखा मेहरा — नई दिल्ली
19 अगस्त को वाराणसी स्थित बीएचयू में होने वाला ‘रामायणी सम्मान-2026’ समारोह रामायण, भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली इन 28 विभूतियों के सम्मान का अवसर बनेगा। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य सम्मानित व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय मंच देने के साथ रामायण की सांस्कृतिक एवं मानवीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

