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पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल नहीं होंगी कम: हरदीप पुरी

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों का सीधा असर घरेलू बाजार पर नहीं पड़ता, क्योंकि तेल विपणन कंपनियों को कीमतों का निर्धारण कई आर्थिक और व्यावसायिक कारकों को ध्यान में रखकर करना पड़ता है।

नई दिल्ली, 03 जुलाई 2026  (यूटीएन)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम होने के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीदें बढ़ गई थीं। हालांकि केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना फिलहाल नजर नहीं आती।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों का सीधा असर घरेलू बाजार पर नहीं पड़ता, क्योंकि तेल विपणन कंपनियों को कीमतों का निर्धारण कई आर्थिक और व्यावसायिक कारकों को ध्यान में रखकर करना पड़ता है। ऐसे में केवल क्रूड ऑयल की कीमतों में अस्थायी गिरावट के आधार पर ईंधन सस्ता करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता।

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तेल कंपनियां अभी भी पुराने घाटे की भरपाई में जुटी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां लंबे समय तक ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दौरान हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई अभी भी कर रही हैं। उनके अनुसार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर लगभग 2.18 लाख करोड़ रुपये की संचयी अंडर-रिकवरी का प्रभाव रहा है, जिसकी भरपाई में समय लगेगा।

उन्होंने कहा कि कंपनियों के पास अभी भी बड़ी मात्रा में ऐसा कच्चा तेल और ईंधन स्टॉक मौजूद है, जिसे उस समय खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें काफी अधिक थीं। इसलिए मौजूदा कम कीमतों का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।

चार वर्षों में सीमित बढ़ोतरी का दावा

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षाकृत बहुत कम वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक इस अवधि में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 5.58 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में कई बार बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले।

उन्होंने कहा कि सरकार ने लगातार प्रयास किया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा और भारी असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े। यही कारण है कि कई बार वैश्विक स्तर पर तेल महंगा होने के बावजूद देश में कीमतों को स्थिर बनाए रखने का प्रयास किया गया।

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होर्मुज संकट के दौरान भी नहीं रुकी सप्लाई

मंत्री ने हाल के पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान भी भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रही। उन्होंने कहा कि सरकार और तेल कंपनियों ने मिलकर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखा, जिससे देश में कहीं भी ईंधन संकट जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।

उन्होंने बताया कि देशभर में संचालित लगभग 1.07 लाख पेट्रोल पंप पूरे संकट काल के दौरान सामान्य रूप से काम करते रहे। किसी भी क्षेत्र से पेट्रोल या डीजल की गंभीर कमी की रिपोर्ट नहीं मिली, जो भारत की मजबूत ऊर्जा प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।

ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष फोकस

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती ऊर्जा खपत वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले वर्षों में ऊर्जा की मांग और बढ़ने की संभावना है।

इसी को देखते हुए सरकार तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने, आयात स्रोतों में विविधता लाने और रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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2030 तक रिफाइनिंग क्षमता में बड़ा विस्तार

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत ने वर्ष 2030 तक अपनी कुल रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाकर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों में नई रिफाइनरियों के निर्माण और मौजूदा रिफाइनरियों के विस्तार का कार्य तेजी से चल रहा है।

सरकार कई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल घरेलू जरूरतों की पूर्ति बेहतर ढंग से हो सकेगी बल्कि भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण रिफाइनिंग हब के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी जोर

मंत्री ने कहा कि सरकार पारंपरिक ईंधनों के साथ-साथ हरित ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन के विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। एथेनॉल मिश्रण, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से निवेश किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करेगा। सरकार का उद्देश्य केवल ईंधन उपलब्ध कराना नहीं बल्कि टिकाऊ, सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा व्यवस्था विकसित करना है।

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उपभोक्ताओं को तत्काल राहत की संभावना कम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निम्न स्तर पर बनी रहती हैं और भू-राजनीतिक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पुनर्विचार किया जा सकता है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में तेल कंपनियों की लागत, पुराने स्टॉक और वित्तीय संतुलन को देखते हुए तत्काल राहत की संभावना सीमित दिखाई देती है।

फिलहाल सरकार और तेल कंपनियों का ध्यान देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और दीर्घकालिक ऊर्जा अवसंरचना के विकास पर केंद्रित है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी बड़ी कटौती के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







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