नई दिल्ली, 10 मई 2026 (यूटीएन)। बंगलूरू में आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल पूरे होने पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री ने शिरकत की। उन्होंने श्री श्री रविशंकर को उनके 70वें जन्मदिन पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने यहां एक दिव्य और भव्य ध्यान मंदिर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि जब संकल्प साफ हो और मन में सेवा का भाव हो, तो हर प्रयास का सुखद परिणाम मिलता है। प्रधानमंत्री ने बंगलूरू की सराहना करते हुए कहा कि यह शहर सॉफ्टवेयर के साथ-साथ आध्यात्म के लिए भी मशहूर है। श्री श्री रविशंकर ने 45 साल पहले जो छोटा सा बीज बोया था, वह आज एक विशाल बरगद का पेड़ बन चुका है। भारत के आध्यात्मिक आंदोलनों ने हमेशा मानव सेवा को प्राथमिकता दी है। आज पूरी दुनिया भारत के आध्यात्मिक मूल्यों और प्राचीन परंपराओं से प्रेरणा ले रही है।
प्रधानमंत्री ने समाज की शक्ति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज, राजनीति और सरकार से भी अधिक शक्तिशाली होता है। कोई भी सरकार तभी सफल होती है, जब समाज राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाता है। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा की प्रशंसा की। आज भारत डिजिटल पेमेंट के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। देश में स्टार्टअप का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम तैयार हो चुका है। हमारे युवा अंतरिक्ष में अपनी सैटेलाइट भेज रहे हैं। इन सभी उपलब्धियों के पीछे युवाओं की मेहनत और आर्ट ऑफ लिविंग जैसी संस्थाओं की सीख है।
पर्यावरण और खेती पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि धरती मां को रसायनों से बचाना भी आर्ट ऑफ लिविंग है। उन्होंने लोगों से एक पेड़ मां के नाम अभियान को और बड़ा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने और पानी की हर बूंद बचाने का आग्रह किया। उन्होंने मिशन लाइफ को भी आर्ट ऑफ लिविंग का ही एक रूप बताया, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां कई भाषाएं, परंपराएं और पूजा पद्धतियां हैं। इन सबको एक सूत्र में पिरोने वाला मूल मंत्र दूसरों के लिए जीना है। उन्होंने विश्वास जताया कि गुरुदेव के आशीर्वाद और कमल की छत्रछाया में देश विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

