नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026 (यूटीएन)। पश्चिम एशिया में इस्राइल और फलस्तीन से जुड़े मौजूदा संघर्ष ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और व्यापार पर गहरा असर डाला है। इस संकट के बीच भारत सरकार ने देशवासियों और व्यापारियों को एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लाल सागर और पश्चिम एशिया के इस भारी विवाद के बावजूद भारत में एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की कोई किल्लत नहीं होगी। इसके साथ ही, भारत के व्यापार को रुकने से बचाने के लिए सरकार सऊदी अरब के जेद्दा जैसे वैकल्पिक बंदरगाहों के इस्तेमाल पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय ने साझा रूप से इस पूरे मामले पर देश को अहम अपडेट दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा और कपड़ा मंत्रालय के व्यापार सलाहकार बिपिन मेनन ने साफ किया है कि भारत ने आयात प्रभावित होने के बावजूद अपनी घरेलू गैस सप्लाई को 100 प्रतिशत सुरक्षित कर लिया है। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह में आकर घबराहट में गैस या पेट्रोल की ज्यादा खरीदारी न करें। माल ढुलाई के लिए नए रास्तों की तलाश तेज कर दी गई है ताकि देश के निर्यातकों को कोई आर्थिक नुकसान न हो।
*घरेलू गैस और पेट्रोल की कमी पर क्या बोली सरकार?*
सरकार ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि घरेलू एलपीजी और घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए 100 प्रतिशत गैस सप्लाई सुनिश्चित कर दी गई है।
सीएनजी से चलने वाले ट्रांसपोर्ट के लिए भी ईंधन की पूरी आपूर्ति की जा रही है, इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है।
कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को भी हालात देखते हुए 70 प्रतिशत तक बहाल कर दिया गया है।
प्रवासी मजदूरों की सहूलियत के लिए 5 किलो वाले एफटीएल सिलेंडरों की सप्लाई को लगभग दोगुना कर दिया गया है।
गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
*व्यापार को सुचारू रखने के लिए सरकार का 'प्लान बी' क्या?*
पश्चिम एशिया विवाद के कारण शिपिंग और माल ढुलाई में आ रही रुकावटों से निपटने के लिए सरकार ने वैकल्पिक रास्तों की योजना तैयार कर ली है।
व्यापार को जारी रखने के लिए सऊदी अरब के जेद्दा इस्लामिक पोर्ट जैसे वैकल्पिक बंदरगाहों का इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार शिपिंग अथॉरिटी और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ मिलकर लॉजिस्टिक्स प्लानिंग कर रही है ताकि माल समय पर पहुंचे।
निर्यात को बढ़ावा देने और कच्चे माल की लागत घटाने के लिए सरकार ने कई उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी भी कम कर दी है।
*कमर्शियल गैस सप्लाई को लेकर क्या प्राथमिकताएं?*
कमर्शियल गैस की सप्लाई के मामले में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को सबसे ऊपर रखा गया है और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर गैस दी जा रही है।
फार्मा (दवा), स्टील, बीज और कृषि सेक्टर को भी वीआईपी प्राथमिकता की सूची में शामिल कर राहत दी गई है।
फर्टिलाइजर (उर्वरक) बनाने वाली कंपनियों को बिना रुके 95 प्रतिशत तक नेचुरल गैस की सप्लाई दी जा रही है।
पेंट और केमिकल उद्योगों को भी जरूरी मॉलिक्यूल्स की लगातार सप्लाई की जा रही है ताकि कारखानों का काम प्रभावित न हो।
*कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने कितना सख्त एक्शन लिया?*
संकट का फायदा उठाकर बाजार में गैस की कालाबाजारी करने वालों पर सरकार ने पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है।
देश भर में 2800 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे गए हैं और चेकिंग के दौरान 67 हजार से ज्यादा गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
प्रशासन ने 1160 से अधिक एफआईआर दर्ज कर अब तक 271 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है।
नियम तोड़ने वाले 316 डिस्ट्रीब्यूटर्स पर भारी जुर्माना लगा है और 72 को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
*क्या भविष्य में सप्लाई चेन को लेकर कोई खतरा?*
सरकार ने एक विशेष 24x7 मॉनिटरिंग सेल बनाया है जो हर दिन ईंधन की सप्लाई चेन पर पैनी नजर रख रहा है।
राज्य सरकारों के साथ मिलकर कई जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं ताकि गैस की कमी की तुरंत रिपोर्ट हो सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और देश के पास पर्याप्त इन्वेंट्री (स्टॉक) है।
अधिकारियों ने जनता और व्यापारियों से अफवाहों से बचने और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की कड़ी अपील की है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।




