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दुनिया की पहली ऑप्टोसार सैटेलाइट से संपर्क स्थापित

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दृष्टि मिशन का मूल आधार ऑप्टोसार नामक एक नवीन हाइब्रिड प्रणाली है, जो एक ही प्लेटफॉर्म पर ऑप्टिकल इमेजिंग और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) को संयोजित करने वाली तकनीक है।

नई दिल्ली, 07 मई 2026  (यूटीएन)। बेंगलुरु की एक निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप कंपनी गैलेक्सआई ने दुनिया में अपना लोहा मनवा लिया, जिससे भारत की साख भी ऊंची हुई है। इस कंपनी ने दुनिया का पहला ऑप्टोसार सैटेलाइट लॉन्च किया था, जो न सिर्फ अंतरिक्ष में सफलतापूर्ण स्थापित हुआ, बल्कि सैटेलाइट से संपर्क भी स्थापित कर लिया गया है। इसकी मदद से प्रतिकूल मौसम आपदा के असर, कृषि और सीमा निगरानी से जुड़ी तस्वीरें प्रभावी ढंग से हासिल की जा सकेंगे। पीएम मोदी ने खुद इस कंपनी को पोस्ट लिखकर बधाई दी थी। यह किसी भारतीय निजी कंपनी के जरिए निर्मित अब तक का सबसे बड़ा उपग्रह है। 
 
कंपनी के अनुसार मिशन दृष्टि ’ दुनिया का पहला ऑप्टोसार उपग्रह है, जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (ईओ) और सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) सेंसरों को एक ही संचालन प्लेटफॉर्म में जोड़ता है। बता दें कि ईओ सेंसर धूप और साफ मौसम में उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें लेते हैं, जबकि एसएआर सेंसर ‘रडार पल्स’ के जरिए हर मौसम तथा हर समय तस्वीरें उपलब्ध कराते हैं। कंपनी ने कहा कि यह उपग्रह पारंपरिक प्रणालियों की सीमाओं से आगे जाने में मदद करेगा और अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों में अधिक विश्वसनीय और निरंतर डेटा उपलब्ध कराएगा।
 
*नई हाइब्रिड प्राणाली पर करता है काम*
दृष्टि मिशन का मूल आधार ऑप्टोसार नामक एक नवीन हाइब्रिड प्रणाली है, जो एक ही प्लेटफॉर्म पर ऑप्टिकल इमेजिंग और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) को संयोजित करने वाली तकनीक है। परंपरागत रूप से उपग्रह या तो ऑप्टिकल सेंसर या फिर रडार पर निर्भर करते हैं।
 
*फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से की गई लॉन्चिंग*
इस सैटेलाइट में एक ही उपग्रह पर मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरा और सिंथेटिक एपर्चर रडार इमेजर लगा हुआ है। 190 किलो के इस सैटेलाइट को स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से कैलिफोर्निया में लॉन्च किया गया। लॉन्चिंग से पहले 5 साल तक स्वदेशी रिसर्च और डेवलपमेंट के साथ पर्यावरणीय परीक्षण और प्रदर्शन का सत्यापन किया गया।
 
*रेडियों तरंगों का इस्तेमाल करते हैं रडार*
इस सैटेलाइट में लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया। बता दें कि ऑप्टिकल सिस्टम तस्वीरों के समान विस्तृत और कलर्ड फोटो कैप्चर करते हैं, लेकिन बादल छाए रहने और अंधेरे से ये जमीनी तस्वीर स्पष्ट नहीं मिलती। दूसरी तरफ, रडार सिस्टम बादलों के पार देखने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करते हैं और रात में भी काम करते हैं, हालांकि वे आमतौर पर कम स्पष्ट तस्वीरें जनरेट करते हैं।
 
*बादल होने के बाद भी मिलती है क्लीयर तस्वीरें*
ऑप्टोसार एक ही उपग्रह में दोनों तकनीकों को एकीकृत करके इस अंतर को पाटता है। यह एक ही बार में ऑप्टिकल और रडार डाटा को एक साथ कैप्चर करता है, फिर आउटपुट को एक एकीकृत छवि में मिला देता है। परिणामस्वरूप हर मौसम में बादलों के रहते हुए भी पृथ्वी की अत्यंत विस्तृत तस्वीरें मिल सकेंगी। 
यह भारत के सबसे उच्च-रिजॉल्यूशन वाले उपग्रहों में से एक है।
 
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।









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