नई दिल्ली,18 अगस्त 2026 (यूटीएन)। युवा मामले और खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा कर दी है। इस बार अलग-अलग खेलों में देश का नाम रोशन करने वाले 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनमें एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, शतरंज, हॉकी, कबड्डी, शूटिंग, पैरा-एथलेटिक्स और रोइंग सहित कई खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। मंत्रालय की ओर से जारी पुरस्कार प्रक्रिया में अर्जुन पुरस्कार के अलावा अर्जुन पुरस्कार लाइफटाइम, द्रोणाचार्य पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार लाइफटाइम और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए भी नाम तय किए गए हैं।
इस साल की सूची में तेजस्विन शंकर, विदित गुजराती, दिव्या देशमुख, त्रिशा जॉली, प्रियंका गोस्वामी और लालरेमसियामी जैसे चर्चित खिलाड़ियों को जगह मिली है। विभिन्न खेलों से खिलाड़ियों का चयन यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में केवल पारंपरिक खेलों के साथ-साथ शतरंज, पैरा-स्पोर्ट्स और अन्य खेल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन को भी महत्व दिया जा रहा है।
17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार
अर्जुन पुरस्कार 2025 के लिए चुने गए खिलाड़ियों में तेजस्विन शंकर और मुहम्मद अजमल वी को एथलेटिक्स, प्रियंका गोस्वामी को एथलेटिक्स, त्रिशा जॉली और पुलेला गायत्री गोपीचंद को बैडमिंटन, नरेंद्र को बॉक्सिंग तथा विदित गुजराती और दिव्या देशमुख को शतरंज के लिए चुना गया है।
इसके अलावा धनुष श्रीकांत को बधिर शूटिंग, लालरेमसियामी और राजकुमार पाल को हॉकी, सुरजीत और पूजा को कबड्डी, रुद्रांश खंडेलवाल को पैरा-शूटिंग, एकता भ्यान को पैरा-एथलेटिक्स, अरविंद सिंह को रोइंग और अखिल श्योरण को शूटिंग के लिए अर्जुन पुरस्कार दिया जाएगा।
इस तरह पुरस्कार सूची में ओलंपिक और पैरालंपिक से जुड़े खेलों के साथ शतरंज और बधिर खेलों को भी प्रतिनिधित्व मिला है।
शतरंज में दिव्या देशमुख और विदित गुजराती का सम्मान
इस साल अर्जुन पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों में शतरंज के दो बड़े नाम विदित गुजराती और दिव्या देशमुख शामिल हैं। शतरंज भारत में लगातार लोकप्रिय हो रहा है और भारतीय खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन ने इस खेल को नई पहचान दी है।
दिव्या देशमुख का नाम विशेष रूप से नई पीढ़ी की महिला शतरंज प्रतिभाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं विदित गुजराती लंबे समय से भारतीय शतरंज के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।
एथलेटिक्स को भी मिला बड़ा प्रतिनिधित्व
एथलेटिक्स से तेजस्विन शंकर, मुहम्मद अजमल वी और प्रियंका गोस्वामी को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। इससे ट्रैक एंड फील्ड में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने की बात सामने आती है।
एथलेटिक्स में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्तर लगातार ऊंचा हुआ है। ऐसे में इन खिलाड़ियों का सम्मान देश के युवा एथलीटों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगा।
हॉकी के दो खिलाड़ियों को अर्जुन सम्मान
भारतीय हॉकी से लालरेमसियामी और राजकुमार पाल को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। हॉकी भारत के सबसे सफल टीम खेलों में से एक रहा है और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम की वापसी के बीच खिलाड़ियों को मिले ऐसे सम्मान से खेल को और प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पैरा खिलाड़ियों को भी मिला सम्मान
इस बार राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में पैरा-स्पोर्ट्स को भी महत्वपूर्ण जगह मिली है। रुद्रांश खंडेलवाल को पैरा-शूटिंग और एकता भ्यान को पैरा-एथलेटिक्स के लिए अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है।
पैरा खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों में बढ़ती पहचान खेलों में समावेशिता की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। इससे दिव्यांग खिलाड़ियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
बधिर शूटिंग में धनुष श्रीकांत को सम्मान
धनुष श्रीकांत को बधिर शूटिंग के लिए अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह चयन विशेष श्रेणी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने वाला है। ऐसे पुरस्कार खिलाड़ियों के साथ-साथ देश में विशेष खेल प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकते हैं।
अर्जुन पुरस्कार क्यों दिया जाता है?
अर्जुन पुरस्कार खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिया जाता है। पुरस्कार के लिए केवल पदक या एक प्रतियोगिता में प्रदर्शन को ही आधार नहीं बनाया जाता, बल्कि खिलाड़ी के प्रदर्शन के साथ नेतृत्व क्षमता, खेल भावना और अनुशासन जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जाता है।
सरकारी पुरस्कार व्यवस्था के अनुसार अर्जुन पुरस्कार का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करना है।
अर्जुन पुरस्कार लाइफटाइम
अर्जुन पुरस्कार लाइफटाइम 2025 के लिए आई. अरुमनायगम का चयन किया गया है। यह श्रेणी ऐसे खिलाड़ियों के लंबे समय तक खेलों में योगदान और खेल से जुड़े रहने को सम्मानित करने के लिए है।
लाइफटाइम पुरस्कार उन खिलाड़ियों के योगदान को रेखांकित करता है जिन्होंने सक्रिय खेल जीवन के बाद भी किसी न किसी रूप में खेलों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए तीन कोच
खिलाड़ियों के साथ उनके प्रशिक्षकों को भी राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में सम्मानित किया गया है। द्रोणाचार्य पुरस्कार 2025 के लिए परवीर सिंह को एथलेटिक्स, छोटे लाल यादव को बॉक्सिंग और नेहा नंदकुमार चव्हाण को शूटिंग के लिए चुना गया है।
द्रोणाचार्य पुरस्कार उन प्रशिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने लगातार बेहतरीन और उल्लेखनीय कार्य करते हुए खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया है।
खेलों में खिलाड़ी की सफलता के पीछे कोच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। प्रशिक्षण की रणनीति, फिटनेस, तकनीक, मानसिक तैयारी और प्रतियोगिता के दौरान सही मार्गदर्शन में कोच अहम भूमिका निभाते हैं।
द्रोणाचार्य पुरस्कार लाइफटाइम
द्रोणाचार्य पुरस्कार लाइफटाइम 2025 के लिए धर्मेंद्र सिंह यादव को बॉक्सिंग और वीरेंद्र कुमार को कुश्ती के लिए चुना गया है।
लाइफटाइम श्रेणी में ऐसे प्रशिक्षकों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने लंबे समय तक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने और संबंधित खेल को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।
राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार
राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2025 के लिए आर्मी पैरालंपिक नोड, पुणे का चयन किया गया है। यह सम्मान खेलों के विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने में संस्थागत योगदान को पहचान देता है।
आर्मी पैरालंपिक नोड द्वारा पैरा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रतिस्पर्धी स्तर पर आगे बढ़ने के लिए सहायता उपलब्ध कराने की भूमिका को इस सम्मान के माध्यम से पहचान मिली है।
इस बार खेल रत्न नहीं
राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में सबसे प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के लिए इस बार किसी खिलाड़ी का चयन नहीं किया गया है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार 2025 में खेल रत्न नहीं दिया जाएगा। यह 1991-92 में पुरस्कार शुरू होने के बाद केवल तीसरी बार है जब किसी खिलाड़ी को यह सर्वोच्च खेल सम्मान नहीं मिलेगा। इससे पहले 2008 और 2014 में भी ऐसा हुआ था।
हालांकि खेल रत्न नहीं दिए जाने के बावजूद अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कारों के माध्यम से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है।
चयन समिति ने तय किए नाम
राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और संस्थाओं के नाम चयन प्रक्रिया के बाद तय किए जाते हैं। 2025 के पुरस्कारों के लिए मंत्रालय ने आवेदन आमंत्रित किए थे और विभिन्न पात्र खिलाड़ियों, कोचों तथा संस्थाओं से नामांकन मांगे गए थे।
मंत्रालय की खेल पुरस्कार व्यवस्था में अर्जुन पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार लाइफटाइम, द्रोणाचार्य पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार लाइफटाइम, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार जैसी श्रेणियां शामिल हैं।
युवा खिलाड़ियों के लिए बनेगा प्रेरणा का आधार
राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का महत्व केवल सम्मान तक सीमित नहीं है। इन पुरस्कारों से देशभर के युवा खिलाड़ियों को अपने खेल में बेहतर प्रदर्शन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की प्रेरणा मिलती है।
खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार यह संदेश देते हैं कि लगातार मेहनत और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन के जरिए देश का सर्वोच्च खेल सम्मान हासिल किया जा सकता है।
कई खेलों को मिला प्रतिनिधित्व
इस बार पुरस्कारों की सूची में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, शतरंज, बधिर शूटिंग, हॉकी, कबड्डी, पैरा-शूटिंग, पैरा-एथलेटिक्स, रोइंग और शूटिंग जैसे खेल शामिल हैं। इससे खेल पुरस्कारों में विविधता दिखाई देती है।
विशेष रूप से शतरंज और पैरा-स्पोर्ट्स को मिले प्रतिनिधित्व से यह संकेत मिलता है कि भारतीय खेल व्यवस्था में अब अलग-अलग खेल विधाओं के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को व्यापक स्तर पर पहचान मिल रही है।
पुरस्कारों से खेल संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। खिलाड़ी जब राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होते हैं तो उनके प्रदर्शन की पहचान के साथ-साथ उस खेल की ओर युवाओं का ध्यान भी आकर्षित होता है।
सरकार की ओर से खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को सम्मानित करने का उद्देश्य खेलों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना और देश में उच्च स्तर के प्रदर्शन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
इस साल 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार, एक खिलाड़ी को अर्जुन पुरस्कार लाइफटाइम, तीन प्रशिक्षकों को द्रोणाचार्य पुरस्कार, दो प्रशिक्षकों को द्रोणाचार्य पुरस्कार लाइफटाइम और आर्मी पैरालंपिक नोड, पुणे को राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चुना गया है।

