Sunday, January 11, 2026

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अरुणाचल सरकार ने पर्यटकों को लुभाने के लिए शुरू किया ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल

कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में सशक्त वृद्धि दर्ज की गई है, वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक पर्यटक आगमन दर्ज किया गया, जो महामारी-पूर्व वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026 (यूटीएन)। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने पर्यटकों को लुभाने के लिए मंगलवार को एक नये अभियान की शुरुआत की जिसे ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ नाम दिया गया है। यह अभियान राज्य को भारत की खोज, सांस्कृतिक आत्मीयता और अनुभवात्मक पर्यटन की अंतिम सीमा के रूप में स्थापित करता है। राज्य की नवीन ब्रांड पहचान “बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स” पर आधारित यह अभियान यात्रियों को सुंदर घाटियों और मठों से आगे बढ़कर उन समृद्ध कहानियों और मानवीय अनुभवों की खोज के लिए आमंत्रित करता है, जो अरुणाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित स्थलों—तवांग, जीरो, अनिनी, नामसाई, डोंग और मेचुका—को परिभाषित करते हैं। यह कथा इस बात को रेखांकित करती है कि अरुणाचल में यात्रा केवल गंतव्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अप्रत्याशित पलों, स्थानीय संवादों और गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव का अनुभव है। अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पसांग दोरजी सोना ने यहां अरुणाचल भवन में इस अभियान की शुरुआत की। अभियान के वीडियो में छह गंतव्यों तवांग, जीरो, अनिनी, नामसाई, डोंग और मेचुका के मनोरम दृश्यों और वहां पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को दिखाया गया है।
सांग ने कहा कि अरुणाचल सबसे अलग राज्य है। उन्होंने कहा, “बहुत से गंतव्यों पर एक ही तरह का पर्यटन उपलब्ध होता है। अरुणाचल में एडवेंचर से जुड़ा पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और आरोग्य से जुड़ा पर्यटन सब एक साथ उपलब्ध है। वहां उष्णकटिबंधीय वन, एल्पाइन और हिमाच्छादित पर्वत भी मिलेंगे। इस समय कहीं बहुत अधिक हिमपात हो रहा है तो कहीं बहुत ही सुहावना मौसम है। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में अरुणाचल में सांस्कृतिक विविधता भी सबसे अधिक है।” पासांग दोरजी सोना ने कहा,“अरुणाचल प्रदेश एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी विरासत इतिहास जितनी पुरानी है। यहां ऊँचे पर्वत शिखर, रंग-बिरंगी वनस्पतियाँ, बौद्ध विरासत, हिमाच्छादित परिदृश्य, विविध जनजातीय संस्कृतियाँ और अद्भुत जैव-विविधता विद्यमान है। विरासत और वन्यजीवन से लेकर रोमांच, प्रकृति, विशिष्ट त्योहारों और अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं तक—यहाँ एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनने के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद हैं।
अरुणाचल प्रदेश की अवधारणा में ही एक विशेष भव्यता निहित है, और इस भूमि का अनुभव उसी भावना को प्रतिबिंबित करता है। मंत्री ने बताया कि कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में सशक्त वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक पर्यटक आगमन दर्ज किया गया, जो महामारी-पूर्व वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी से पहले साल 2019 में अरुणाचल प्रदेश में 5.66 लाख घरेलू पर्यटक आये थे। यह संख्या साल 2023 में बढ़कर 10.45 लाख पर पहुंच गयी। साल 2024 में यह 9.83 लाख रही और 2025 में भी 10 लाख से ऊपर रहने की उम्मीद है। सांग ने कहा कि यह वृद्धि रणनीतिक ब्रांडिंग, बेहतर कनेक्टिविटी और अनुभवात्मक पर्यटन पेशकशों को एकीकृत करने वाले समग्र दृष्टिकोण का परिणाम है। राज्य सरकार की नई पर्यटन नीति सड़क और हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने, पर्यटक सुविधाओं के विकास तथा आवासीय क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत विस्तार को प्राथमिकता देती है। इसके साथ ही नीति फार्म टूरिज़्म, आध्यात्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, इको-टूरिज़्म, जनजातीय पर्यटन और सीमावर्ती पर्यटन जैसे विविध क्षेत्रों पर विशेष जोर देती है, जिससे अरुणाचल प्रदेश एक बहुआयामी पर्यटन गंतव्य के रूप में और अधिक सशक्त रूप से उभरता है।
उन्होंने बताया कि अरुणाचल में आध्यात्मिक पर्यटन और एडवेंचर पर्यटन काफी लोकप्रिय है। राज्य में पांच नदियां हैं। यहां राफ्टिंग और ट्रेकिंग लोगों को खूब भाते हैं। अभी राज्य में एडवेंचर रेसिंग और माउंटेन बाइकिंग की भी शुरुआत की गयी है। मंत्री ने बताया कि अभी गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से ज्यादा पर्यटक आ रहे हैं। दूसरे राज्यों से लोगों को आकर्षित करने के प्रयास चल रहे हैं। दिल्ली में और बेंगलुरु में रोड शो भी किये गये हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश काफी बड़ा राज्य है। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण अपनी चुनौतियां हैं। सड़कें काफी अच्छी हैं, लेकिन फिर भी एक जगह से दूसरी जगह जाने में समय लगता है। पर्यटक एक सप्ताह में भी राज्य के सभी पर्यटक स्थलों को नहीं देख सकते।
उन्होंने कहा कि दिल्ली और कोलकाता से अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए हवाई संपर्क काफी अच्छा है। मुंबई और बेंगलुरु से संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता है। टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ यात्रा को पारंपरिक दर्शनीय स्थलों से आगे बढ़कर कहानियों को देखने का आमंत्रण देता है—केवल दृश्य नहीं, बल्कि अनुभव। अभियान में शामिल प्रत्येक प्रमुख गंतव्य एक कथा-स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया गया है:
• तवांग: आध्यात्मिक विरासत और हिमालयी दृश्य
• जीरो: सांस्कृतिक लय और स्वदेशी परिदृश्य
• अनिनी: झीलों और झरनों की धरती
• नामसाई: आध्यात्मिकता और नदी-आधारित संस्कृति
• डोंग: भारत का प्रथम सूर्योदय और अप्रभावित प्राकृतिक सौंदर्य
• मेचुका: जहाँ रोमांच और शांति का संगम होता है
इन अनुभवों को अभियान की फिल्मों और प्रिंट विज़ुअल्स के माध्यम से जीवंत किया गया है, जो मानवीय आत्मीय क्षणों, स्वाभाविक अनुभवों और प्रामाणिक स्थानीय संवादों को दर्शाते हैं—और अरुणाचल की मूल भावना को सुदृढ़ करते हैं: जीवंत अनुभवों के माध्यम से खोज।
पिछले वर्ष हमने ‘बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स’ के साथ अपने लोगो और ब्रांडिंग को नया स्वरूप दिया था। यह अभियान उसी आधार को आगे बढ़ाता है। हमें विश्वास है कि यह पहल राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यटन बाज़ारों में डेस्टिनेशन अरुणाचल की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करेगी और आने वाले वर्षों में इसे भारत के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल करने में सहायक सिद्ध होगी। इस दृष्टि के अनुरूप, राज्य पर्यटन विभाग ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स और टूर ऑपरेटर्स के साथ साझेदारियाँ भी स्थापित कर रहा है, ताकि विशेष रूप से अब तक अप्रयुक्त स्रोत बाज़ारों में अरुणाचल की पहुँच को बढ़ाया जा सके, साथ ही यात्रियों की सुगमता और जमीनी अनुभवों को और बेहतर बनाया जा सके।
*अरुणाचल प्रदेश पर्यटन के बारे में*
अरुणाचल प्रदेश, जिसे प्रायः “उगते सूरज की पहाड़ियों की धरती” कहा जाता है, भारत का उत्तर-पूर्वी सीमांत राज्य है। यह राज्य अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृतियों, निर्मल जैव-विविधता और विशिष्ट यात्रा अनुभवों के लिए जाना जाता है। एक प्रगतिशील पर्यटन रणनीति के अंतर्गत, राज्य का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी उपस्थिति का सतत और संतुलित विस्तार करना है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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अरुणाचल सरकार ने पर्यटकों को लुभाने के लिए शुरू किया ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल

कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में सशक्त वृद्धि दर्ज की गई है, वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक पर्यटक आगमन दर्ज किया गया, जो महामारी-पूर्व वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026 (यूटीएन)। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने पर्यटकों को लुभाने के लिए मंगलवार को एक नये अभियान की शुरुआत की जिसे ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ नाम दिया गया है। यह अभियान राज्य को भारत की खोज, सांस्कृतिक आत्मीयता और अनुभवात्मक पर्यटन की अंतिम सीमा के रूप में स्थापित करता है। राज्य की नवीन ब्रांड पहचान “बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स” पर आधारित यह अभियान यात्रियों को सुंदर घाटियों और मठों से आगे बढ़कर उन समृद्ध कहानियों और मानवीय अनुभवों की खोज के लिए आमंत्रित करता है, जो अरुणाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित स्थलों—तवांग, जीरो, अनिनी, नामसाई, डोंग और मेचुका—को परिभाषित करते हैं। यह कथा इस बात को रेखांकित करती है कि अरुणाचल में यात्रा केवल गंतव्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अप्रत्याशित पलों, स्थानीय संवादों और गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव का अनुभव है। अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पसांग दोरजी सोना ने यहां अरुणाचल भवन में इस अभियान की शुरुआत की। अभियान के वीडियो में छह गंतव्यों तवांग, जीरो, अनिनी, नामसाई, डोंग और मेचुका के मनोरम दृश्यों और वहां पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को दिखाया गया है।
सांग ने कहा कि अरुणाचल सबसे अलग राज्य है। उन्होंने कहा, “बहुत से गंतव्यों पर एक ही तरह का पर्यटन उपलब्ध होता है। अरुणाचल में एडवेंचर से जुड़ा पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और आरोग्य से जुड़ा पर्यटन सब एक साथ उपलब्ध है। वहां उष्णकटिबंधीय वन, एल्पाइन और हिमाच्छादित पर्वत भी मिलेंगे। इस समय कहीं बहुत अधिक हिमपात हो रहा है तो कहीं बहुत ही सुहावना मौसम है। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में अरुणाचल में सांस्कृतिक विविधता भी सबसे अधिक है।” पासांग दोरजी सोना ने कहा,“अरुणाचल प्रदेश एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी विरासत इतिहास जितनी पुरानी है। यहां ऊँचे पर्वत शिखर, रंग-बिरंगी वनस्पतियाँ, बौद्ध विरासत, हिमाच्छादित परिदृश्य, विविध जनजातीय संस्कृतियाँ और अद्भुत जैव-विविधता विद्यमान है। विरासत और वन्यजीवन से लेकर रोमांच, प्रकृति, विशिष्ट त्योहारों और अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं तक—यहाँ एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनने के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद हैं।
अरुणाचल प्रदेश की अवधारणा में ही एक विशेष भव्यता निहित है, और इस भूमि का अनुभव उसी भावना को प्रतिबिंबित करता है। मंत्री ने बताया कि कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में सशक्त वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक पर्यटक आगमन दर्ज किया गया, जो महामारी-पूर्व वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी से पहले साल 2019 में अरुणाचल प्रदेश में 5.66 लाख घरेलू पर्यटक आये थे। यह संख्या साल 2023 में बढ़कर 10.45 लाख पर पहुंच गयी। साल 2024 में यह 9.83 लाख रही और 2025 में भी 10 लाख से ऊपर रहने की उम्मीद है। सांग ने कहा कि यह वृद्धि रणनीतिक ब्रांडिंग, बेहतर कनेक्टिविटी और अनुभवात्मक पर्यटन पेशकशों को एकीकृत करने वाले समग्र दृष्टिकोण का परिणाम है। राज्य सरकार की नई पर्यटन नीति सड़क और हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने, पर्यटक सुविधाओं के विकास तथा आवासीय क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत विस्तार को प्राथमिकता देती है। इसके साथ ही नीति फार्म टूरिज़्म, आध्यात्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, इको-टूरिज़्म, जनजातीय पर्यटन और सीमावर्ती पर्यटन जैसे विविध क्षेत्रों पर विशेष जोर देती है, जिससे अरुणाचल प्रदेश एक बहुआयामी पर्यटन गंतव्य के रूप में और अधिक सशक्त रूप से उभरता है।
उन्होंने बताया कि अरुणाचल में आध्यात्मिक पर्यटन और एडवेंचर पर्यटन काफी लोकप्रिय है। राज्य में पांच नदियां हैं। यहां राफ्टिंग और ट्रेकिंग लोगों को खूब भाते हैं। अभी राज्य में एडवेंचर रेसिंग और माउंटेन बाइकिंग की भी शुरुआत की गयी है। मंत्री ने बताया कि अभी गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से ज्यादा पर्यटक आ रहे हैं। दूसरे राज्यों से लोगों को आकर्षित करने के प्रयास चल रहे हैं। दिल्ली में और बेंगलुरु में रोड शो भी किये गये हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश काफी बड़ा राज्य है। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण अपनी चुनौतियां हैं। सड़कें काफी अच्छी हैं, लेकिन फिर भी एक जगह से दूसरी जगह जाने में समय लगता है। पर्यटक एक सप्ताह में भी राज्य के सभी पर्यटक स्थलों को नहीं देख सकते।
उन्होंने कहा कि दिल्ली और कोलकाता से अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए हवाई संपर्क काफी अच्छा है। मुंबई और बेंगलुरु से संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता है। टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ यात्रा को पारंपरिक दर्शनीय स्थलों से आगे बढ़कर कहानियों को देखने का आमंत्रण देता है—केवल दृश्य नहीं, बल्कि अनुभव। अभियान में शामिल प्रत्येक प्रमुख गंतव्य एक कथा-स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया गया है:
• तवांग: आध्यात्मिक विरासत और हिमालयी दृश्य
• जीरो: सांस्कृतिक लय और स्वदेशी परिदृश्य
• अनिनी: झीलों और झरनों की धरती
• नामसाई: आध्यात्मिकता और नदी-आधारित संस्कृति
• डोंग: भारत का प्रथम सूर्योदय और अप्रभावित प्राकृतिक सौंदर्य
• मेचुका: जहाँ रोमांच और शांति का संगम होता है
इन अनुभवों को अभियान की फिल्मों और प्रिंट विज़ुअल्स के माध्यम से जीवंत किया गया है, जो मानवीय आत्मीय क्षणों, स्वाभाविक अनुभवों और प्रामाणिक स्थानीय संवादों को दर्शाते हैं—और अरुणाचल की मूल भावना को सुदृढ़ करते हैं: जीवंत अनुभवों के माध्यम से खोज।
पिछले वर्ष हमने ‘बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स’ के साथ अपने लोगो और ब्रांडिंग को नया स्वरूप दिया था। यह अभियान उसी आधार को आगे बढ़ाता है। हमें विश्वास है कि यह पहल राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यटन बाज़ारों में डेस्टिनेशन अरुणाचल की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करेगी और आने वाले वर्षों में इसे भारत के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल करने में सहायक सिद्ध होगी। इस दृष्टि के अनुरूप, राज्य पर्यटन विभाग ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स और टूर ऑपरेटर्स के साथ साझेदारियाँ भी स्थापित कर रहा है, ताकि विशेष रूप से अब तक अप्रयुक्त स्रोत बाज़ारों में अरुणाचल की पहुँच को बढ़ाया जा सके, साथ ही यात्रियों की सुगमता और जमीनी अनुभवों को और बेहतर बनाया जा सके।
*अरुणाचल प्रदेश पर्यटन के बारे में*
अरुणाचल प्रदेश, जिसे प्रायः “उगते सूरज की पहाड़ियों की धरती” कहा जाता है, भारत का उत्तर-पूर्वी सीमांत राज्य है। यह राज्य अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृतियों, निर्मल जैव-विविधता और विशिष्ट यात्रा अनुभवों के लिए जाना जाता है। एक प्रगतिशील पर्यटन रणनीति के अंतर्गत, राज्य का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी उपस्थिति का सतत और संतुलित विस्तार करना है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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