छपरौली, 29 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से बचाने और समाज में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। केटी विंग बागपत द्वारा संचालित अभियान में सहयोगी संस्था के रूप में आंखें मीडिया सोशल नेटवर्क की टीम ने क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया। विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। देश का भविष्य युवाओं की सोच, शिक्षा, स्वास्थ्य और चरित्र पर निर्भर करता है। यदि युवा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो इसका असर केवल उनके व्यक्तिगत जीवन पर ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति पर भी पड़ता है। इसलिए विद्यार्थियों को कम उम्र से ही नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करना और उन्हें सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
इस अवसर पर समाजसेवी आरआरडी उपाध्याय और प्रिया उपाध्याय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान पर विस्तार से विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि नशे से दूर रहना केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि यह परिवार की खुशहाली, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से भी जुड़ा हुआ है।
नशा स्वास्थ्य के साथ परिवार की अर्थव्यवस्था को भी करता है प्रभावित: आरआरडी उपाध्याय
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए समाजसेवी आरआरडी उपाध्याय ने कहा कि शराब, भांग, सुल्फा, तंबाकू सहित अन्य नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। नशे की आदत धीरे-धीरे व्यक्ति की दिनचर्या, सोचने-समझने की क्षमता, कार्यक्षमता और पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि नशे के कारण होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के उपचार पर परिवार को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता है और शिक्षा, पोषण, बच्चों की जरूरतों तथा अन्य जरूरी कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधन प्रभावित हो सकते हैं।
आरआरडी उपाध्याय ने कहा कि जब परिवार का कोई सदस्य नशे की लत से जूझता है, तो उसका असर परिवार के दूसरे सदस्यों पर भी पड़ सकता है। घर में तनाव बढ़ सकता है, आपसी संवाद प्रभावित हो सकता है और आर्थिक जिम्मेदारियों को निभाने में कठिनाइयां आ सकती हैं। इसलिए नशे को केवल एक व्यक्ति की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि इसके प्रभावों को समझते हुए समय रहते जागरूकता और सहायता के प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करें। युवाओं को अपने लक्ष्य, शिक्षा और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि वे अपने परिवार और समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकें।
नशा हमारी स्मृति, संस्कृति और संस्कारों को करता है प्रभावित: प्रिया उपाध्याय
प्रखर वक्तृत्व और तथ्यों के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए प्रिया उपाध्याय ने कहा कि नशा केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि व्यक्ति की स्मृति, सोच, व्यवहार, संस्कृति और संस्कारों को भी प्रभावित कर सकता है। नशे की आदत व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की नींव स्वस्थ व्यक्तियों और मजबूत संस्कारों से बनती है। जब युवा अपने स्वास्थ्य और भविष्य के प्रति जागरूक रहते हैं, तो वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में बेहतर योगदान दे सकते हैं। इसके विपरीत नशे की आदत पढ़ाई, करियर, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक संबंधों में बाधा बन सकती है।
प्रिया उपाध्याय ने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि वास्तविक मजबूती नशे में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन, अच्छे विचारों और सकारात्मक जीवनशैली में है। विद्यार्थियों को अपने जीवन में ऐसे लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए, जो उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दें और गलत आदतों से दूर रखें।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए नशामुक्त भारत अभियान को सार्थक करना बेहद आवश्यक है। इसके लिए केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है।
युवाओं को नशे से बचाना अभियान का प्रमुख उद्देश्य
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देना और उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा। शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी जीवन के ऐसे दौर में होते हैं, जब उनके विचार, आदतें और भविष्य की दिशा आकार ले रही होती है। इस समय सही मार्गदर्शन मिलने से वे बेहतर निर्णय लेने और गलत आदतों से बचने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, शिक्षक, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय को मिलकर प्रयास करने चाहिए। बच्चों और किशोरों के साथ खुलकर बातचीत करना, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
नशे के प्रति जागरूकता का संदेश केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे परिवारों और समाज के अन्य वर्गों तक भी पहुंचाने की आवश्यकता है। जब समाज में नशे के नुकसान पर खुलकर चर्चा होती है और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने को प्रोत्साहित किया जाता है, तो नशामुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है।
नशे के कारण सामाजिक समस्याओं पर भी जताई चिंता
आरआरडी उपाध्याय ने समाज में बढ़ती विभिन्न समस्याओं के संदर्भ में नशे की भूमिका पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशे का दुरुपयोग व्यक्ति के व्यवहार और पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे विवाद, आर्थिक संकट और घरेलू तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा, नशे या गलत रास्तों में नहीं, बल्कि समझदारी, संवाद और जिम्मेदार व्यवहार में है। युवाओं को अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, रचनात्मक गतिविधियों और समाजसेवा जैसे सकारात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में अपराध और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं के कई कारण होते हैं, इसलिए हर घटना को केवल नशे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी नशे के दुरुपयोग से होने वाले नुकसान को समझना और इससे बचाव के लिए जागरूकता फैलाना जरूरी है।
शिक्षा और जागरूकता से मजबूत होगा नशामुक्त समाज
शिक्षण संस्थानों में आयोजित ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपने स्वास्थ्य और भविष्य के प्रति जिम्मेदार बनाने में मदद कर सकते हैं। स्कूल और कॉलेज केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे अच्छे नागरिक, जिम्मेदार व्यक्ति और सामाजिक मूल्यों के प्रति सजग युवा तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने मित्रों और साथियों को भी सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि किसी साथी में नशे की समस्या दिखाई दे, तो उसका मजाक उड़ाने या उसे अलग-थलग करने के बजाय उसे सही मार्गदर्शन और जरूरत के अनुसार पेशेवर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
नशे की लत से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता रखना भी जरूरी है। नशे की समस्या का सामना करने वाले व्यक्ति को उचित चिकित्सा, परामर्श और परिवार के सहयोग से मदद मिल सकती है। जागरूकता का उद्देश्य लोगों को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि उन्हें नुकसान से बचाना और जरूरत पड़ने पर सहायता तक पहुंचाना होना चाहिए।
स्वस्थ युवा ही मजबूत राष्ट्र की नींव
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि राष्ट्र की प्रगति के लिए युवाओं का स्वस्थ, शिक्षित और जिम्मेदार होना आवश्यक है। युवा पीढ़ी यदि नशे से दूर रहकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करे, तो वह व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज के विकास में भी योगदान दे सकती है।
प्रिया उपाध्याय ने अपने संबोधन में नशामुक्त समाज को मजबूत संस्कृति, बेहतर संस्कार और स्वस्थ भविष्य से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नशे से दूर रहने का निर्णय व्यक्ति को अपने जीवन पर सकारात्मक नियंत्रण बनाए रखने और अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करने में मदद करता है।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और अच्छे आचरण को प्राथमिकता दें। साथ ही, वे अपने परिवार और आसपास के लोगों के बीच नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने में सहयोग करें।
नशा मुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
केटी विंग बागपत द्वारा संचालित नशा मुक्त भारत अभियान में सहयोगी संस्था के रूप में आंखें मीडिया सोशल नेटवर्क की टीम ने क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। अभियान के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देने और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं का संदेश रहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें शिक्षकों, अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हर व्यक्ति अपने स्तर पर जागरूकता फैलाकर और नशे से दूर रहने का संकल्प लेकर इस दिशा में योगदान दे सकता है।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, स्मृति, व्यवहार, पारिवारिक जीवन और सामाजिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए युवाओं को नशे से दूर रखना, उन्हें सही मार्गदर्शन देना और समाज में जागरूकता बढ़ाना स्वस्थ, संस्कारवान और मजबूत भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

