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जिला पंचायत अध्यक्ष ने यमुना में छोड़ीं 50 हजार मछली फिंगरलिंग्स

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मथुरा,16 सितम्बर  2026  (यूटीएन)। यमुना नदी को स्वच्छ बनाने, उसके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और मत्स्य संपदा के संवर्धन के उद्देश्य से गोकुल बैराज पर विशेष ‘रिवर रैंचिंग’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान यमुना नदी में 50 हजार मछली फिंगरलिंग्स (मछली के बच्चों) को प्रवाहित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने नाव के माध्यम से नदी में मत्स्य बीज छोड़कर किया।

इस अवसर पर सहायक निदेशक मत्स्य (मथुरा) श्रीमती आकांक्षा ने मुख्य अतिथि का स्वागत बुग्गे देकर किया। कार्यक्रम के दौरान विभागीय अधिकारियों ने रिवर रैंचिंग के उद्देश्य और यमुना के जलीय पर्यावरण के संरक्षण में इसके महत्व की जानकारी भी दी।

250 पैकेट में लाए गए 50 हजार मत्स्य बीज

रिवर रैंचिंग अभियान के लिए मत्स्य बीज को विशेष सुरक्षा एवं तकनीकी व्यवस्था के साथ गोकुल बैराज तक लाया गया। कुल 250 पैकेटों में 50 हजार फिंगरलिंग्स नदी में छोड़ी गईं। प्रत्येक पैकेट में 200 मछली के बच्चे शामिल थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन्हें नदी के उपयुक्त स्थान पर प्रवाहित किया गया, ताकि इनके जीवित रहने और प्राकृतिक वातावरण में विकसित होने की संभावना बढ़ सके।

मत्स्य विभाग के अनुसार, इस तरह की पहल का उद्देश्य नदी में जलीय जीवों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ जलीय खाद्य शृंखला और जैव विविधता को मजबूत करना है। मछलियों के प्राकृतिक रूप से विकसित होने से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

नाइट्रोजन युक्त प्रदूषण कम करने का प्रयास

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि नदी में मत्स्य संपदा को बढ़ावा देने के साथ नाइट्रोजन युक्त प्रदूषण को कम करने और जैव नियंत्रण के माध्यम से नदी के पर्यावरण में सुधार की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में मछलियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विभिन्न जलीय जीवों की मौजूदगी नदी की प्राकृतिक खाद्य शृंखला को सक्रिय रखने में मदद करती है।

अधिकारियों का कहना था कि केवल मछली बीज छोड़ना ही नदी संरक्षण का एकमात्र उपाय नहीं है, बल्कि इसके साथ नदी में प्रदूषण की रोकथाम, गंदे पानी के प्रवाह पर नियंत्रण, जलीय जीवों के संरक्षण और जनभागीदारी जैसे प्रयास भी जरूरी हैं। रिवर रैंचिंग को इसी व्यापक संरक्षण प्रक्रिया का एक हिस्सा माना जा रहा है।

‘यमुना को स्वच्छ और संतुलित बनाना सामूहिक जिम्मेदारी’

मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने कहा कि यमुना को स्वच्छ, निर्मल और संतुलित बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। केंद्र और प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप नदी के संरक्षण और जलीय जीवन को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की पहल की जा रही है।

उन्होंने कहा कि नदी में छोड़ी गई मछलियां बड़ी होकर जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में योगदान देंगी। इसके साथ ही मत्स्य संपदा में वृद्धि होने पर स्थानीय मछुआरों और मत्स्य पालकों को भी इसका लाभ मिल सकता है। उन्होंने यमुना संरक्षण के लिए विभागीय प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।

जलीय जैव विविधता बढ़ने की उम्मीद

सहायक निदेशक मत्स्य श्रीमती आकांक्षा ने बताया कि रिवर रैंचिंग कार्यक्रम का उद्देश्य यमुना के जलीय पर्यावरण और जैव विविधता को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि नदी में मत्स्य बीज प्रवाहित किए जाने से समय के साथ मछलियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इससे मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ मत्स्य आधारित गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नदी में जलीय जीवों का संतुलित विकास पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए नियमित रूप से संरक्षण संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने और नदी के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

मछुआरों की आजीविका को भी मिलेगा संभावित लाभ

यमुना नदी से लंबे समय से स्थानीय मछुआरों की आजीविका जुड़ी हुई है। मत्स्य संसाधनों में वृद्धि होने पर इसका सीधा लाभ मत्स्य पालन और मछली पकड़ने से जुड़े परिवारों को मिल सकता है। विभाग की ओर से मत्स्य संपदा को बढ़ावा देने की पहल को इसी दृष्टि से पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

रिवर रैंचिंग के माध्यम से नदी में मत्स्य संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। हालांकि, मछलियों के बेहतर विकास के लिए नदी के पानी की गुणवत्ता, पर्याप्त प्राकृतिक भोजन और अनुकूल जलीय वातावरण बनाए रखना भी जरूरी होगा।

यमुना संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और उपस्थित लोगों ने यमुना नदी के संरक्षण, मत्स्य संपदा के संवर्धन और जलीय जीवन को सुरक्षित रखने का संकल्प दोहराया। वक्ताओं ने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि क्षेत्र की पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। इसलिए नदी को प्रदूषण से बचाने और उसके जलीय जीवन को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में फिश इंस्पेक्टर मुकेश कुमार, भाजपा ब्रज क्षेत्र मंत्री विनोद चौधरी, गौरव अग्रवाल सहित प्रशासनिक अधिकारी, मत्स्य विभाग के कर्मचारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

एक नजर में

  • स्थान: गोकुल बैराज, मथुरा
  • कार्यक्रम: रिवर रैंचिंग
  • नदी: यमुना
  • मत्स्य बीज: 50,000 फिंगरलिंग्स
  • कुल पैकेट: 250
  • प्रति पैकेट: 200 मछली के बच्चे
  • मुख्य उद्देश्य: जलीय जीवन एवं जैव विविधता का संवर्धन
  • संभावित लाभ: मत्स्य संसाधनों में वृद्धि और मछुआरों की आजीविका को संबल
  • मुख्य अतिथि: जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी
  • आयोजन स्थल: गोकुल बैराज






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