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एकदिवसीय कार्यशाला, संस्कारों का पतन ही राष्ट्र की मृत्यु है: रवि शास्त्री

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याद दिलाया कि, कभी यह वही भारत है, जहां द्रौपदी के वस्त्रहरण पर सभ्यता का सिर झुक गया था और एक स्त्री की लज्जा भंग करने की कोशिश ने महाभारत जैसी भीषण युद्ध गाथा को जन्म दिया था।

बडौत, 25 मई 2026 (यूटीएन)। आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत  द्वारा आयोजित होने वाले आवासीय संस्कार शिविर के कार्यक्रम स्थल चौधरी केहर सिंह दिव्या पब्लिक स्कूल बड़ौत में एक दिवसीय संस्कार कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें सभा मंत्री रवि शास्त्री ने कहा कि, संस्कारों का पतन ही राष्ट्र की मृत्यु है। याद दिलाया कि, कभी यह वही भारत है, जहां द्रौपदी के वस्त्रहरण पर सभ्यता का सिर झुक गया था और एक स्त्री की लज्जा भंग करने की कोशिश ने महाभारत जैसी भीषण युद्ध गाथा को जन्म दिया था। पर आज? --- आज वही भारत है, जहाँ स्त्रियाँ स्वयं अपनी लज्जा के वस्त्र फैशन और आधुनिकता के नाम पर उतार रही हैं और समाज उसे ग्लैमर कहकर ताली बजा रहा है।

उन्होंने आगे कहा,यह वही देश है जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने स्त्री के सम्मान के लिए राज–सिंहासन तक त्याग दिया था पर आज उसी राम के देश में मर्यादा अब एक मीम बनकर रह गई है। जहाँ कभी पंडित किसी स्त्री को तिलक लगाने से भी हिचकते थे,वहाँ अब विवाह जैसे पवित्र मौके पर साड़ी पहनाने, ब्लाउज फिट करने मेकअप करने और टैटू बनाने तक के कार्य पुरुष कर रहे हैं।

दुख इस बात का नहीं कि, यह सब हो रहा है,बल्कि इस बात का है कि समाज के प्रगति समझकर गर्व महसूस कर रहा है। कभी माँ–बहनों के चरण धोकर पुत्र देवता बनते थे, अब वही पुत्र जिम और सैलून में खड़े होकर अर्धनग्न महिलाओं की देह छूने को प्रोफेशन मानते हैं।

कैंसर विशेषज्ञ डॉ तरुण तोमर ने कहा ,संस्कार शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है। जिसमें बच्चे जीवन जीने की कला सीखते हैं। इस अवसर पर डॉ मनीष तोमर, डॉ गीतांजलि तोमर, डॉ शश्या तोमर, प्रधानाचार्य जेपी सिंह, रामपाल तोमर, धर्मपाल त्यागी, कपिल आर्य आदि उपस्थित रहे।

वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )







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