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भारत ने शुरू किया चिनाब-ब्यास प्रोजेक्ट पर काम,बेचैन हो उठा पाकिस्तान?

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जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत इस प्रोजेक्ट का निर्माण इसी साल अगस्त से शुरू होने की उम्मीद है, जल शक्ति मंत्रालय सूत्रों ने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार है, भारत के लिए इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य भी दो साल का है इसकी अधिकतम सीमा 2029 तक होने की उम्मीद है।

नई दिल्ली, 04 जून 2026 (यूटीएन)। भारत सरकार एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुकी है जो अगले कुछ साल में दिल्ली के साथ साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान में पानी के संकट की तस्वीर बदल सकता है। यह है चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट। करीब 2,352 करोड़ रुपये की लागत वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में लगभग 9 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इस सुरंग के जरिए चिनाब नदी की सहायक चंद्रा नदी का अतिरिक्त पानी ब्यास नदी में पहुंचाया जाएगा। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत इस प्रोजेक्ट का निर्माण इसी साल अगस्त से शुरू होने की उम्मीद है। जल शक्ति मंत्रालय सूत्रों ने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार है। भारत के लिए इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य भी दो साल का है। इसकी अधिकतम सीमा 2029 तक होने की उम्मीद है।
 
*लाहौल-स्पीति में बनाया जाएगा बैराज*
सूत्रों ने बताया कि लाहौल-स्पीति के कोकसर इलाके में चंद्रा नदी पर एक बैराज बनाया जाएगा। गर्मियों में जब ग्लेशियर पिघलते हैं तो नदी में पानी का प्रवाह बहुत बढ़ जाता है। इसी अतिरिक्त पानी को भूमिगत सुरंग के जरिए ब्यास नदी की ओर मोड़ा जाएगा। सरल शब्दों में कहें तो जो पानी अभी बिना इस्तेमाल आगे बह जाता है, उसे देश के उन हिस्सों तक पहुंचाने की कोशिश होगी जहां पानी की ज्यादा जरूरत है। दरअसल, हर साल गर्मियों में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के कई इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ जाती है।
 
*पाकिस्तान क्यों बेचैन ?*
सूत्रों ने बताया कि चिनाब नदी सिंधु नदी प्रणाली का हिस्सा है और इसका पानी आगे पाकिस्तान में भी जाता है। लंबे समय से पाकिस्तान इस नदी के प्रवाह पर निर्भर है। भारत का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग करना चाहता है। चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट का मकसद अतिरिक्त पानी को भारत के भीतर इस्तेमाल करना है। इससे वह पानी, जो पहले बिना उपयोग के पाकिस्तान की ओर बह जाता था, उसका एक हिस्सा भारत की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। सूत्रों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट सिंधु जल संधि के दायरे में रहकर बनाया जा रहा है, लेकिन पाकिस्तान इसे रणनीतिक नजरिए से देख रहा है क्योकि इससे भारत अपनी जल क्षमता को पहले से अधिक मजबूत बना सकेगा।
 
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।






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