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अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर कृष्ण कुटीर में विधिक जागरूकता एवं सम्मान शिविर

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मथुरा, 01 अक्टूबर  2026  (यूटीएन)। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, उनके विधिक अधिकारों और उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा की ओर से सुनरख बांगर, नगला रामताल, वृंदावन स्थित उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम द्वारा संचालित कृष्ण कुटीर महिला आश्रय सदन में विधिक जागरूकता एवं सम्मान शिविर आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य आश्रय सदन में निवासरत वृद्ध माताओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के साथ उनके प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने आश्रय सदन में रह रहीं माताओं से आत्मीय संवाद किया और उनकी दैनिक आवश्यकताओं तथा उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

जनपद न्यायाधीश ने माताओं से आत्मीयता से किया संवाद

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री विकास कुमार ने की। उन्होंने कृष्ण कुटीर में निवासरत सभी माताओं से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की और उनका कुशलक्षेम जाना।

जनपद न्यायाधीश ने माताओं से उनके खान-पान, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि आश्रय सदन में रहने के दौरान उन्हें किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं है और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएं उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं या नहीं।

इसके बाद उन्होंने पूरे आश्रय सदन का निरीक्षण भी किया। इस दौरान साफ-सफाई, रहने की व्यवस्था तथा उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया गया।

वरिष्ठजन समाज की अमूल्य धरोहर : जनपद न्यायाधीश

शिविर को संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश श्री विकास कुमार ने कहा कि वरिष्ठजन समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके जीवन के अनुभव, संघर्ष और सीख आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और संवेदनशील व्यवहार समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने आश्रय सदन में निवासरत माताओं को आश्वस्त किया कि उनकी गरिमा, सुरक्षा और आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या या आवश्यकता होने पर संबंधित अधिकारियों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को इसकी जानकारी दी जा सकती है।

उन्होंने वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि वृद्धावस्था में लोगों को भावनात्मक सहयोग के साथ-साथ आवश्यक सुविधाओं और कानूनी संरक्षण की जानकारी भी मिलनी चाहिए।

वरिष्ठ नागरिकों को बताए गए उनके विधिक अधिकार

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अनीता सिंह ने वृद्ध माताओं को उनके विधिक अधिकारों और उपलब्ध विधिक सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के महत्वपूर्ण प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया।

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण और संरक्षण से जुड़े मामलों में विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। किसी व्यक्ति को अपने अधिकारों से संबंधित कानूनी समस्या का सामना करना पड़ रहा हो तो वह विधिक सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है।

सचिव ने निःशुल्क विधिक सहायता और विधिक परामर्श की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से अपील की कि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या होने पर वे परेशानी को अपने तक सीमित न रखें, बल्कि उपलब्ध विधिक सहायता व्यवस्था का लाभ उठाएं।

NALSA हेल्पलाइन 15100 की दी जानकारी

शिविर के दौरान NALSA हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी वरिष्ठ नागरिकों को जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि विधिक सहायता की आवश्यकता होने पर संबंधित माध्यम से सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।

वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों और कानूनी सहायता के साधनों के बारे में जानकारी देने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि वे किसी कानूनी समस्या की स्थिति में उचित मंच तक पहुंच सकें। कार्यक्रम में सरल भाषा में कानून की जानकारी देकर वरिष्ठजनों को जागरूक किया गया।

325 वृद्ध माताओं का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के अंत में जनपद न्यायाधीश श्री विकास कुमार और उपस्थित न्यायिक अधिकारियों द्वारा कृष्ण कुटीर महिला आश्रय सदन में निवासरत 325 वृद्ध माताओं को सम्मानपूर्वक साड़ी और शॉल भेंट किए गए।

वृद्ध माताओं को सम्मानित करने के दौरान कार्यक्रम का वातावरण आत्मीय और भावपूर्ण रहा। न्यायिक अधिकारियों ने माताओं का आशीर्वाद भी प्राप्त किया। सम्मान स्वरूप वस्त्र मिलने से आश्रय सदन में निवासरत माताओं में भी प्रसन्नता दिखाई दी।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि वरिष्ठ नागरिक केवल सहायता के पात्र व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज के अनुभव और परंपरा के महत्वपूर्ण वाहक हैं। उनका सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना समाज की जिम्मेदारी है।

न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में अपर जिला जज श्री राजेश पाराशर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री नितिन कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अनीता सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी श्री विकास चन्द्र तथा कृष्ण कुटीर महिला आश्रय सदन की प्रशासनिक अधिकारी सुश्री शिल्पा मुरगई सहित आश्रय सदन का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।

अधिकारियों की मौजूदगी में आश्रय सदन की व्यवस्थाओं और वरिष्ठ माताओं की आवश्यकताओं को लेकर भी जानकारी ली गई।

सम्मान के साथ सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी भी जरूरी

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में केवल सम्मान तक ही गतिविधियां सीमित नहीं रहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों और कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि वृद्धजनों के लिए सम्मान के साथ सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन का वातावरण तैयार करना आवश्यक है।

कानूनी जागरूकता के अभाव में कई बार वरिष्ठ नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम उन्हें अपने अधिकारों और सहायता के विकल्पों से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं।

मांट के वृद्धजन आश्रय सदन में भी हुआ कार्यक्रम

इसी क्रम में वृद्धजन आश्रय सदन, कालिंदी कुंज, मांट, मथुरा में भी विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। यहां भी वृद्ध महिला और पुरुषों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सेवाओं की जानकारी दी गई।

शिविर का आयोजन पराविधिक स्वयंसेवक श्री विनेश कुमार सनवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में 130 से अधिक वृद्ध महिला-पुरुषों को सम्मानपूर्वक वस्त्र एवं मौसमी फल भेंट किए गए।

भरण-पोषण कानून और विधिक सहायता की दी जानकारी

मांट स्थित आश्रय सदन में आयोजित शिविर के दौरान भी माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। वरिष्ठ नागरिकों को उनके भरण-पोषण और संरक्षण से संबंधित अधिकारों के बारे में सरल भाषा में समझाया गया।

इसके साथ ही नालसा (वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2016 के संबंध में भी जानकारी दी गई। वरिष्ठजनों को निःशुल्क विधिक सहायता तथा विधिक परामर्श की सुविधा के बारे में बताया गया।

शिविर में NALSA हेल्पलाइन 15100 के संबंध में भी जानकारी दी गई और वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध विधिक सहायता सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।

कल्याणकारी योजनाओं के प्रति भी किया जागरूक

विधिक साक्षरता शिविर में वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों के साथ-साथ उपलब्ध कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। उन्हें बताया गया कि सरकारी स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पात्र व्यक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की सामाजिक और कानूनी जरूरतें भी बदलती हैं। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी होना जरूरी है।

दोनों आश्रय सदनों में दिखा सम्मान और अपनत्व का भाव

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर मथुरा और मांट के दोनों आश्रय सदनों में आयोजित कार्यक्रमों में विधिक जागरूकता के साथ सम्मान और अपनत्व का वातावरण देखने को मिला। कृष्ण कुटीर में 325 वृद्ध माताओं को साड़ी और शॉल भेंट किए गए, जबकि मांट के आश्रय सदन में 130 से अधिक वृद्ध महिला-पुरुषों को वस्त्र और मौसमी फल वितरित किए गए।

कार्यक्रमों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को यह संदेश दिया गया कि वे समाज से अलग नहीं हैं और उनकी समस्याओं तथा अधिकारों के प्रति संस्थागत स्तर पर भी संवेदनशीलता आवश्यक है।

विधिक जागरूकता से मजबूत होगा भरोसा

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम वरिष्ठ नागरिकों को कानून की जानकारी देने के साथ उनके भीतर उपलब्ध सहायता व्यवस्था के प्रति भरोसा पैदा करने का भी माध्यम बनते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को यह जानकारी दी गई कि कानूनी परेशानी की स्थिति में वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और उपलब्ध हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आयोजित दोनों कार्यक्रमों में सम्मान, संवाद, विधिक जागरूकता और सहायता—इन सभी पहलुओं को एक साथ जोड़ा गया। इससे वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और गरिमापूर्ण जीवन की आवश्यकता का संदेश भी सामने आया।







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