Breaking News
आम महोत्सव के बाद बवाल: सफाई कर्मचारियों से मारपीट के आरोप पर ठप्प हुई सफाई व्यवस्था   | लूट के मुकदमे में समझौते का दबाव, पीड़ित ने मांगी पुलिस सुरक्षा   | अमित शाह ने पत्तन सुरक्षा को लेकर दिए कई अहम निर्देश, बंदरगाहों से लेकर फिश लैंडिंग सेंटर्स तक सुरक्षा होगी और सख्त   | न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय के बीच भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- "25-30 साल पहले मिला मफलर आज भी संभालकर रखा है, यह सिर्फ उपहार नहीं, आपके स्नेह की निशानी है"   | युवाओं को पढ़ने की संस्कृति से जोड़ने का आह्वान, अमित शाह ने दिया पुस्तकालय आंदोलन का संदेश   | पीएम मोदी और क्रिस हिपकिंस की मुलाकात: भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई मजबूती, व्यापार, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी पर हुई व्यापक चर्चा   | 2027 की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी, पीडीए पंचायतों के जरिए बूथ स्तर तक संगठन होगा मजबूत : रवि बैसला   | आँखें' के पर्यावरण रक्षको ने नाथ सम्प्रदाय की समाधी में रोपे बरगद व पीपल के पौधें   | सपा का 'हर घर पौधा अभियान' तेज, सुभानपुर में 251 पौधों का रोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश   | तीन दिनों से सड़क पर पड़ा उखड़ा पेड़, दर्जनभर गांवों का संपर्क प्रभावित, बड़े वाहनों की आवाजाही ठप   |
मल्टी डिजिटल मीडिया, पत्रकारिता के क्षेत्र में तुरंत आवश्यकता है देश एवं प्रदेश के सभी जगह से अनुभव गैर अनुभवी पुरुष एवं महिलाएं, देश एवं प्रदेश के सभी जिला एवं राज्य में युवक / महिलाएं संपर्क करें मल्टीमीडिया उज्जवल टाइम्स न्यूज़ में जोड़ने के लिए आपको मिल रहा है सुनहरा मौकाआप हमें अपने समाचार एवं विज्ञापन, कविता, लेख प्रकाशित करने के लिए संपर्क कर सकते हैं . E-mail- ujjwaltimesnewsnetwork@gmail.com

100% प्राकृतिक और शाकाहारी वाले दावों पर एफएसएसएआई सख्त

1783511007_1.jpg
सॉफ्ट और फ्रेश क्रीम बन अनानास पर "100% प्राकृतिक" और "कोई संरक्षित , रंग और फ्लेवर"नहीं जैसे दावे किए गए हैं, लेकिन लेबल पर प्रिजर्वेटिव (आईएनू 282), सिंथेटिक रंग (आईएनएस 110) और फ्लेवरिंग पदार्थ होने की जानकारी दी गई थी.

नई दिल्ली, 08 जुलाई 2026 (यूटीएन)। पैकेज्ड फूड पर भ्रामक दावे और गलत लेबलिंग करने वाली कंपनियों के लिए बुरी खबर है. दरअसल, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ऐसी कंपनियों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. देश में खाद्य उत्पादों पर किए जा रहे दावों और लेबलिंग को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में एफएसएसएआई ने पैकेज्ड फूड पर भ्रामक दावे और गलत लेबलिंग करने के आरोप में कई कंपनियों को नोटिस भेज कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है. इन कंपनियों से एफएसएसएआई ने पूछा है कि आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए? एफएसएसएआई ने लोट्टे इंडिया, फर्न्स एन पेटल्स, डीआइए फूड्स, सिप्ज़र और कुबेरा फूड्स को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। नियामक संस्था का कहना है कि इन कंपनियों के कुछ खाद्य उत्पादों पर ऐसे दावे किए गए हैं, जो उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं। साथ ही कई मामलों में लेबलिंग नियमों का भी पालन नहीं किया गया। एफएसएसएआई ने कहा है कि यदि कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
 
संस्था के अनुसार, यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और खाद्य उत्पादों की सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है। हाल के समय में एफएसएसएआई लगातार ऐसे मामलों में स्वत: संज्ञान और उपभोक्ताओं की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई कर रहा है। जिन कंपनियों को नोटिस भेजा गया है. उन सभी पर अलग-अलग तरह के आरोप हैं. लोटे इंडिया कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड पर पुराने और नियमों के खिलाफ प्री-प्रिंटेड लेबल इस्तेमाल करने का आरोप है. वहीं, कुबेर फूड्स पर नरम और ताजा क्रीम बन अनानास पर "100% प्राकृतिक" और "कोई संरक्षक रंग नहीं, " जैसे दावे किए गए है, जो  नियमों के अनुरूप नहीं हैं और उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं. इसके अलावा, फर्न्स एन पेटल्स प्राइवेट लिमिटेड के भुना हुआ बादाम चॉकलेट पर "प्रीमियम चॉकलेट"" लिखा गया है, जबकि उत्पाद में हाइड्रोजनीकृत वनस्पति वसा का उपयोग किया गया था. साथ ही लेबल पर यह अनिवार्य जानकारी नहीं दी गई कि उत्पाद में वनस्पति वसा का इस्तेमाल हुआ है या नॉन वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल किया गया है. 
 
*किस कंपनी पर क्या है आरोप*
*लोटे इंडिया कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड*
इस कंपनी पर पुराने और नियमों के अनुरूप नहीं होने वाले प्री-प्रिंटेड लेबल इस्तेमाल करने का आरोप है. इसके साथ ही कुछ चोको पाई उत्पादों पर लिखा "100% शाकाहारी" दावा भ्रामक पाया गया है. वहीं, पेपरो बिस्किट स्टिक पर पोषण संबंधी जानकारी तय नियमों के अनुसार पाई गई है. इसके अलावा, लॉली ब्लिस लॉलीपॉप में विटामिन संबंधी दावे नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए. साथ ही फ्रूट्ज़ एक्लेयर्स के नाम और पैकेजिंग को उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला बताया गया है. 
 
*कुबेरा फूड*
सॉफ्ट और फ्रेश क्रीम बन अनानास पर "100% प्राकृतिक" और "कोई संरक्षित , रंग और फ्लेवर"नहीं जैसे दावे किए गए हैं, लेकिन लेबल पर प्रिजर्वेटिव (आईएनू 282), सिंथेटिक रंग (आईएनएस 110) और फ्लेवरिंग पदार्थ होने की जानकारी दी गई थी. एफएसएसएआई के मुताबिक "शुद्ध",", "ताजा", "प्राकृतिक" और "100% प्राकृतिक" जैसे दावे नियमों के अनुरूप नहीं हैं और उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं. 
*फर्न्स एन पेटल्स प्राइवेट लिमिटेड*
इस कंपनी के भुना हुआ बादाम चॉकलेट पर "प्रीमियम चॉकलेट" लिखा गया है, जबकि उत्पाद में हाइड्रोजनीकृत वनस्पति वसा का उपयोग पाया गया है. इसके साथ ही लेबल पर यह अनिवार्य जानकारी नहीं दी गई कि उत्पाद में वनस्पति वसा का इस्तेमाल हुआ है या नॉन वेजिटेबल फैट का. साथ ही रेकमेंडेड डाइटरी अलाउंस  की जानकारी भी नहीं दी गई है. पैक पर बादाम की तस्वीर और "बादाम चॉकलेट" लिखा था, लेकिन सामग्री में बादाम की मात्रा का उल्लेख नहीं पाया गया. 
*डीआईए फूड्स पर क्या आरोप?*
डीआईए फूड्स को भी एफएसएसएआई की तरफ से नोटिस जारी किया गया है. कंपनी के प्रोडक्ट्स पर 'पूर्णतः प्राकृतिक', '100% जैविक' और 'शाकाहारी'' जैसे दावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं. एफएसएसएआई के मुताबिक, इन दावों के लिए कंपनी के लाइसेंस में जरूरी अनुमोदन मौजूद नहीं था.
*सिपज़र को किन दावों पर नोटिस?*
एफएसएसएआई ने सिपज़र से भी कई दावों को लेकर जवाब मांगा है. इनमें 'एफएसएसएआई स्वीकृत', 'अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा दें', 'विषाक्त पदार्थों को हटाएं' और 'जैविक सब्जियों से निर्मित' जैसे दावे शामिल हैं. रेगुलेटर ने इन्हें भ्रामक दावों की कैटेगरी में रखते हुए कंपनी से जवाब मांगा है.
*क्यों जरूरी है सही लेबलिंग?*
फूड प्रोडक्ट खरीदते समय ग्राहक अक्सर पैकेट पर लिखे दावों के आधार पर फैसला लेते हैं. अगर कोई कंपनी बिना आधार के हेल्थ बेनिफिट का दावा करे, ऑर्गेनिक बताकर बेचे या गलत अप्रूवल दिखाए तो ग्राहक गलत जानकारी के आधार पर खरीदारी कर सकते हैं. इसी वजह से फूड लेबलिंग से जुड़े नियम बनाए गए हैं.
*क्या 'एफएसएसएआई स्वीकृत' लिखना सही है?*
कई बार कंपनियां अपने प्रोडक्ट पर 'एफएसएसएआई स्वीकृत' जैसे शब्द इस्तेमाल करती हैं. लेकिन एफएसएसएआई लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन का मतलब यह नहीं होता कि रेगुलेटर ने किसी विशेष हेल्थ दावे या प्रोडक्ट को अलग से मंजूरी दी है. ऐसे शब्द ग्राहकों में गलत धारणा बना सकते हैं.
*ग्राहकों को ध्यान रखना चाहिए*
कोई भी फूड प्रोडक्ट खरीदते समय सिर्फ बड़े दावों पर भरोसा न करें. उसकी लेबल और सामग्री जरूर पढ़ें. साथ ही न्यूट्रिशन जानकारी देखें और जरूरत से ज्यादा बड़े हेल्थ दावों से सतर्क रहें.
*एफएसएसएआई लगातार बढ़ा रहा सख्ती
एफएसएसएआई का कहना है कि उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी मिलना जरूरी है। यदि किसी उत्पाद पर किए गए दावे और उसकी वास्तविक सामग्री में अंतर होगा तो इससे ग्राहक गुमराह हो सकते हैं। हाल ही में नियामक संस्था ने फ्रेश पनीर जैसे दावे को लेकर भी एक अन्य कंपनी को नोटिस जारी किया था। एफएसएसएआई अब सोशल मीडिया के जरिए भी अपनी कार्रवाई की जानकारी साझा कर रहा है। संस्था का कहना है कि वह उपभोक्ताओं की शिकायतों और स्वत: संज्ञान के आधार पर ऐसे मामलों की जांच जारी रखेगी, ताकि बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पाद निर्धारित मानकों का पालन करें।
 
 
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।






Breaking Update

🌐 Translate
🔔 हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें ×
📢 ताज़ा खबर WhatsApp पर पाएँ