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कम सोते हैं तो हो जाएं अलर्ट! नींद की कमी से बढ़ जाता है डायबिटीज का खतरा

इसमें पाया गया कि जो लोग रोजाना तकरीबन सात से आठ घंटे सोते थे, उनकी तुलना में, जो व्यक्ति प्रतिदिन पांच घंटे सोते थे, उनको डायबिटीज का खतरा 16% अधिक था।

नई दिल्ली, 08 मार्च 2024 (यूटीएन)। अगर आप सोच रहे कि अनहेल्थी खाने या फिर भागमभाग वाली लाइफस्टाइल ही हेल्थ को प्रभावित करती है तो ऐसा नहीं है। अगर आप कम सोते हैं तो भी अलर्ट होने की जरूरत है। पूरी नींद नहीं लेना स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। जी हां, नींद की कमी डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है। एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है। ‘जामा नेटवर्ट ओपन’ जर्नल में प्रकाशित नए मेडिकल रिसर्च में इसका जिक्र किया गया है। शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च में दस साल से अधिक समय तक प्रतिभागियों पर नजर रखा। उनके स्वास्थ्य की जांच की गई। इसमें पाया गया कि जो लोग रोजाना तकरीबन सात से आठ घंटे सोते थे, उनकी तुलना में, जो व्यक्ति प्रतिदिन पांच घंटे सोते थे, उनको डायबिटीज का खतरा 16% अधिक था।
*नए रिसर्च में जानिए क्या है*
इस रिसर्च में दुनिया के सबसे बड़े जनसंख्या डेटाबेस में से एक, यूके बायोबैंक के डेटा का इस्तेमाल किया गया। इसमें यूके के लगभग आधे मिलियन जेनेटेकली मैप प्रतिभागियों से स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल पर सवाल किए गए, जिसके जवाब उन्होंने दिए। शोधकर्ताओं ने दस साल से अधिक समय तक प्रतिभागियों का हेल्थ अपडेट लिया। इसमें पाया गया कि जो लोग रोजाना 7-8 घंटे सोते थे उनकी तुलना में जो लोग 4 से 5 घंटे सोते थे उन्हें डायबिटीज का रिस्क ज्यादा था। वहीं जो लोग प्रतिदिन केवल तीन से चार घंटे की नींद लेते हैं उनमें डायबिटीजा का रिस्क 41 फीसदी ज्यादा था।
*इसलिए जरूरी है नींद पूरी करना*
रिसर्च में ये भी पता चला कि अगर आप कम सोते हैं लेकिन अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हेल्थी खाना खाते हैं तो डायबिटीज का रिस्क कुछ कम हो सकता है। अधिक उम्र के लोगों में टाइप-2 डायबिटीज आम है। ये शरीर में ग्लूकोज के प्रॉसेस की क्षमता को प्रभावित करता है, इंसुलिन अवशोषण में बाधा उत्पन्न करता है और परिणामस्वरूप हाई ब्लड शुगर हो सकता है। रिसर्च में कहा गया है कि नींद की कमी अलग-अलग वजहों डायबिटीज के बढ़ने में योगदान कर सकती है।
*पहले भी रिसर्च में हुआ है खुलासा*
2015 में, डायबेटोलोजिया में प्रकाशित एक और रिसर्च में भी नींद की कमी और डायबिटीज के बीच संबंध की जांच की गई थी। शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि तीन रातों तक केवल चार घंटे की नींद लेने पर खून में फैटी एसिड का स्तर काफी ऊपर पहुंच गया। ये सुबह लगभग 4 बजे से 9 बजे तक बढ़ा हुआ रहता है। जब तक फैटी एसिड का स्तर ऊंचा बना रहा, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन की क्षमता कम हो गई थी।
*इन वजहों से बढ़ता है डायबिटीज का खतरा*
ऐसे में नींद की कमी से वास्तव में टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ने का जोखिम ज्यादा होता है। हालांकि, इसमें अन्य वजहें भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए आनुवंशिक प्रवृत्ति, भागमभाग लाइफस्टाल और अनहेल्थी खाना। हालांकि आनुवंशिकी को बदला नहीं जा सकता है, लेकिन पर्याप्त नींद, खाना और एक्सरसाइज से डायबिटीज के जोखिम को निश्चित रूप से कम किया जा सकता है।
*डायबिटीज से बचना है तो इन बातों का रखें ख्याल*
पिछले साल यूके मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ में प्रकाशित एक आईसीएमआर रिसर्च में दावा किया गया था कि भारत में 2019 के दौरान 70 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित थे। वहीं अब ये आंकड़ा 101 मिलियन से ज्यादा पहुंच गया है। शहरी क्षेत्रों में अक्सर लोगों को काम के चलते समय, तनाव, वित्तीय दबाव के चलते नींद की कमी का सामना करना पड़ता है। वहीं सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल के कारण भी लोग नींद की कमी का सामना करते हैं। डॉक्टर डायबिटीज और संभावित न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम समेत स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए नींद।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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