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यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, एसएचओ से तीखी नोकझोंक

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पीलीभीत,09 सितम्बर  2026  (यूटीएन)। यूजीसी के कथित नियमों को लेकर पीलीभीत के बिलसंडा में सवर्ण समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। घनश्याम स्थित एक बारात घर में समाज के दर्जनों लोग एकत्र हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए बिलसंडा के कमल पार्क पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के खिलाफ नारे लगाए और संबंधित नियमों को वापस लेने की मांग की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की ओर से बीसलपुर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।

प्रदर्शन के दौरान कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनका विरोध उन नियमों को लेकर है, जिन्हें वे सवर्ण समाज के खिलाफ एकतरफा मान रहे हैं। उनका कहना था कि यदि किसी वर्ग के लिए अलग या कथित तौर पर पक्षपातपूर्ण व्यवस्था लागू की जाती है तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

बारात घर में जुटे समाज के लोग

बताया गया कि बिलसंडा क्षेत्र के घनश्याम स्थित एक बारात घर में सवर्ण समाज के लोग एकत्र हुए। बैठक के दौरान वक्ताओं ने यूजीसी से जुड़े नियमों पर अपनी आपत्ति जताई और कहा कि इस मुद्दे पर समाज को एकजुट होकर अपनी बात सरकार और प्रशासन तक पहुंचानी चाहिए।

बैठक के बाद सभी लोग एकजुट होकर कमल पार्क की ओर रवाना हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘यूजीसी वापस लो’ जैसे नारे लगाए। कमल पार्क पहुंचने के बाद प्रदर्शन सभा में तब्दील हो गया, जहां वक्ताओं ने यूजीसी के कथित नियमों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

प्रदर्शनकारियों ने कहा—किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है आंदोलन

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उनका कहना था कि समाज ने अलग-अलग समय पर सरकारों और राजनीतिक दलों का समर्थन किया है, लेकिन यदि किसी नीति या नियम से उनके समाज के हित प्रभावित होते हैं तो वे अपनी आवाज उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सवर्ण समाज के लिए एकतरफा नियम लागू किए जाने से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने सरकार से मामले पर पुनर्विचार करने और कथित नियम को वापस लेने की मांग की।

बोले प्रदर्शनकारी—सरकार बनाने में दिया सहयोग

प्रदर्शन के दौरान समाज के नेताओं ने राजनीतिक भागीदारी का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों ने गांव-गांव जाकर राजनीतिक दलों के पक्ष में प्रचार किया, लोगों को जागरूक किया और मतदान के माध्यम से सरकार बनाने में योगदान दिया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार बनने के बाद यदि उन्हीं लोगों को लगता है कि उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है तो स्वाभाविक रूप से समाज में नाराजगी पैदा होगी। उन्होंने सरकार से कहा कि किसी भी वर्ग की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

एसएचओ से हुई तीखी नोकझोंक

प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के नेताओं और बिलसंडा थाना प्रभारी (एसएचओ) के बीच तीखी नोकझोंक भी हो गई। बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान किसी बात को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस बढ़ गई।

मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। हालांकि इस दौरान हुई नोकझोंक से कुछ समय के लिए मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।

पुलिस और प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई और प्रदर्शन को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया गया।

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद समाज के लोगों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन बीसलपुर एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी से संबंधित कथित नियम को वापस लेने और सवर्ण समाज की आपत्तियों पर विचार करने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो समाज आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।

सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने रखी बात

प्रदर्शन के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि समाज को अपने अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहने की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि किसी भी नीति या नियम को लागू करने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी वर्ग में किसी व्यवस्था को लेकर असंतोष है तो सरकार को बातचीत के माध्यम से उसका समाधान निकालना चाहिए।

प्रशासन ने संभाला मोर्चा

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद रहा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रदर्शनकारी वहां से लौट गए।

प्रशासन की ओर से ज्ञापन को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और प्रदर्शनकारियों की मांगों को शासन स्तर तक भेजने की प्रक्रिया अपनाए जाने की बात कही गई।

आगे भी आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांग पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज अपने मुद्दों को लेकर एकजुट है और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाता रहेगा।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं हैं, बल्कि अपनी मांगों और कथित भेदभावपूर्ण नियमों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

यूजीसी नियम को लेकर बढ़ी बहस

बिलसंडा में हुए इस प्रदर्शन के बाद यूजीसी से जुड़े नियमों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार उनकी आपत्तियों को गंभीरता से सुने और जिस नियम को लेकर समाज में नाराजगी है, उसे वापस लिया जाए या उसमें आवश्यक बदलाव किए जाएं।

फिलहाल प्रशासन को ज्ञापन सौंप दिया गया है और अब प्रदर्शनकारियों की नजर सरकार और संबंधित अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर है। वहीं प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारी से हुई तीखी नोकझोंक भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने दोहराया कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने समाज से जुड़े मुद्दे और कथित एकतरफा नियम के विरोध में है। अब देखना होगा कि सरकार और यूजीसी की ओर से इस मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।

पीलीभीत- स्टेट ब्यूरो, (अरुण मिश्रा) |







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