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वायुमंडल को शुद्ध रखने के लिए अग्निहोत्र जरूरी: अरविंद शास्त्री

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बिनौली,02 सितम्बर  2026  (यूटीएन)। बरनावा के महाभारतकालीन इतिहास से जुड़े लाक्षागृह स्थित श्री महानंद संस्कृत विद्यालय गुरुकुल परिसर में बुधवार को राष्ट्र कल्याण स्वस्ति यज्ञ का आयोजन श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ किया गया। यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञकुंड में आहुतियां अर्पित कीं। वातावरण में गूंजते वैदिक मंत्रों और यज्ञ की सुगंध से पूरा गुरुकुल परिसर भक्तिमय हो गया।

यज्ञ के ब्रह्म प्रधानाचार्य अरविंद शास्त्री ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण कराते हुए श्रद्धालुओं को यज्ञ की महत्ता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अग्निहोत्र और यज्ञ भारतीय वैदिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यज्ञ के माध्यम से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ प्रकृति और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध भी होता है। उन्होंने कहा कि वायुमंडल को शुद्ध एवं संतुलित बनाए रखने के लिए अग्निहोत्र की परंपरा को आगे बढ़ाना जरूरी है।

अरविंद शास्त्री ने वेदोपदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में परोपकार के कार्य करते हुए अपनी सोच को व्यापक बनाना चाहिए। केवल अपने लिए जीने के बजाय समाज, परिवार और राष्ट्र के हित में कार्य करना ही मानव जीवन की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करता है, उसका समाज में सम्मान बढ़ता है और उसकी यश-कीर्ति दूर तक फैलती है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार की जिम्मेदारियां होती हैं। परिवार के प्रति कर्तव्य निभाने के साथ ही मनुष्य को पर्यावरण, वायुमंडल, अपनी इंद्रियों और परमात्मा के प्रति भी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। जब व्यक्ति इन सभी दायित्वों का निष्ठापूर्वक पालन करता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक सुख और शांति का अनुभव होता है।

विद्वान आचार्य ने कहा कि वेदों में बताए गए सिद्धांतों के अनुरूप आचरण करना ही वास्तविक पारदर्शिता और सदाचार है। मनुष्य को अपने व्यवहार में सत्य, संयम, ईमानदारी और परोपकार को स्थान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भौतिक जीवन में रहते हुए भी व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया और अनावश्यक बंधनों से स्वयं को मुक्त करने का प्रयास करना चाहिए। परमात्मा की कृपा और सद्कर्मों के माध्यम से ही मनुष्य मोक्ष एवं मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे धार्मिक आयोजनों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखें, बल्कि इनके माध्यम से प्राप्त होने वाली शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में भी उतारें। उन्होंने कहा कि यज्ञ में दी गई प्रत्येक आहुति के साथ व्यक्ति को समाज और प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने का संकल्प भी लेना चाहिए।

यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञकुंड में घी, हवन सामग्री और औषधीय सामग्री की आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञमान के रूप में अभिषेक गोयल और ऋचा गोयल ने विधि-विधान के साथ यज्ञ में भाग लिया। आचार्यों ने वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति कराई और सभी के सुख, शांति एवं राष्ट्र कल्याण की कामना की।

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरुकुल परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया। वक्ताओं ने कहा कि गुरुकुल भारतीय संस्कृति, संस्कार और वैदिक शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जोड़ने में भी सहायता मिलती है।

इस अवसर पर पूनम, आलोक गुप्ता, सुनील गोयल, संध्या गोयल, त्रिशला शर्मा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने यज्ञ में आहुति देकर राष्ट्र, समाज और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन के समापन पर श्रद्धालुओं को वैदिक जीवन पद्धति, सदाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।

वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।







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