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त्रिलोकतीर्थ में संतों के संदेश से गूंजा धर्म और अध्यात्म का स्वर

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खेकड़ा,06 सितम्बर  2026  (यूटीएन)। बड़ागांव स्थित त्रिलोकतीर्थ धाम रविवार को धर्म, अध्यात्म और मानव सेवा के संदेश से सराबोर नजर आया। क्षुल्लक योगभूषण महाराज के मंगलमय अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मति धर्मयोग महोत्सव में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। सर्वधर्म समभाव सम्मेलन में देश के विभिन्न संतों और धर्माचार्यों का पावन सानिध्य रहा। संतों के आध्यात्मिक संदेशों से त्रिलोकतीर्थ धाम का वातावरण भक्तिमय हो उठा।

महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया और प्रवचनों के माध्यम से धर्म, साधना, सेवा तथा मानव कल्याण के संदेश को आत्मसात किया। कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया।

संतों और धर्माचार्यों का रहा पावन सानिध्य

सम्मति धर्मयोग महोत्सव में आचार्य त्रिलोकभूषण महाराज, आचार्य लोकेश मुनि, आचार्य विवेक मुनि, जगद्गुरु सतीश आचार्य, महामंडलेश्वर भैयादास महाराज सहित साध्वी आर्यिका माता का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ।

विभिन्न संतों और धर्माचार्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आशीर्वाद लिया तथा उनके विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित सम्मेलन में सर्वधर्म समभाव की भावना भी प्रमुखता से दिखाई दी।

धर्म को सेवा और समर्पण से जोड़ने का संदेश

महोत्सव में संतों ने अपने प्रवचनों के माध्यम से आध्यात्मिक जागरण, साधना, सेवा और मानव कल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। धर्म का वास्तविक स्वरूप मानव सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और समाज के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन में भी दिखाई देता है।

संतों ने श्रद्धालुओं से जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और मानवता के हित में कार्य करना भी है। सेवा, त्याग, संयम और सद्भावना जैसे गुण व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आध्यात्मिक जागरण पर दिया जोर

प्रवचनों के दौरान संतों ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागरण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक सोच विकसित होती है और वह अपने जीवन के साथ-साथ समाज के प्रति भी जिम्मेदार बनता है।

संतों के विचार सुनकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कार्यक्रम के दौरान कई श्रद्धालु संतों के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते दिखाई दिए। धार्मिक वातावरण में भक्ति और अध्यात्म की अनुभूति पूरे कार्यक्रम के दौरान बनी रही।

बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

सम्मति धर्मयोग महोत्सव में क्षेत्र के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर संतों का आशीर्वाद लिया। सुबह से ही त्रिलोकतीर्थ धाम में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन किए और उनके प्रवचनों को सुना। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच धार्मिक आस्था और उत्साह देखने को मिला। आयोजन स्थल पर संतों के संदेश सुनने के लिए श्रद्धालु काफी देर तक मौजूद रहे।

धर्म, सेवा और समर्पण को जन-जन तक पहुंचाने का उद्देश्य

आयोजकों ने बताया कि सम्मति धर्मयोग महोत्सव का उद्देश्य धर्म, सेवा और समर्पण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना के साथ मानव सेवा और आपसी सद्भाव की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।

आयोजकों के अनुसार धर्म का संदेश तभी सार्थक होता है, जब उसके मूल सिद्धांतों को व्यक्ति अपने व्यवहार और जीवन में उतारे। जरूरतमंदों की सहायता, समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानव कल्याण के कार्यों को बढ़ावा देना भी धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वात्सल्य भोज में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान धार्मिक कार्यक्रम के साथ सेवा और आतिथ्य की भावना भी देखने को मिली।

वात्सल्य भोज के माध्यम से श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से भोजन कराया गया। इससे कार्यक्रम का समापन भी सेवा और सद्भावना के संदेश के साथ हुआ।

आयोजन में इनका रहा विशेष सहयोग

सम्मति धर्मयोग महोत्सव को सफल बनाने में महेंद्र जैन, त्रिलोक चंद जैन, अभिषेक जैन आदि का विशेष सहयोग रहा। आयोजकों और सहयोगियों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में योगदान दिया। संतों के आध्यात्मिक संदेश, श्रद्धालुओं की बड़ी सहभागिता और सेवा-समर्पण की भावना के बीच त्रिलोकतीर्थ धाम में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण की यादगार छाप छोड़ गया।

वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।







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