खेकड़ा,09 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। कस्बे के प्रतिष्ठित शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुधवार को भगवान शांतिनाथ की परमकृपा से वेदी पर विराजमान भगवान की प्रतिमाओं के पावन मंजन एवं शुद्धि सेवा का धार्मिक आयोजन श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मावलंबियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और प्रतिमा मंजन सेवा में सहभागी बनकर पुण्यलाभ अर्जित किया।
धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं में भगवान की प्रतिमाओं की मंजन सेवा में सहभागी बनने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूजा-अर्चना और धार्मिक मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
महावीर वंदना और णमोकार मंत्र से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह करीब 11 बजे महावीर वंदना और णमोकार मंत्र के मंगलोच्चार के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान का स्मरण किया और धार्मिक विधि-विधान के साथ आयोजन की शुरुआत की।
इसके उपरांत मंदिर की वेदी पर विराजमान भगवान की प्रतिमाओं का विधि-विधानपूर्वक पावन मंजन एवं शुद्धि सेवा की गई। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ सेवा में सहभागिता की।
मंजन सेवा से निखरी भगवान की वीतरागी छवि
पावन मंजन के बाद भगवान की प्रतिमाओं की वीतरागी छवि और अधिक निखर उठी। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। मंदिर में मौजूद धर्मावलंबियों ने भक्तिभाव से भगवान की आराधना की और परिवार तथा समाज के सुख-शांति एवं मंगल की कामना की।
मंदिर परिसर में धार्मिक मंत्रोच्चार और भक्ति के वातावरण के बीच श्रद्धालुओं के चेहरे पर विशेष प्रसन्नता दिखाई दी। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने शांत भाव से धार्मिक क्रियाओं में हिस्सा लिया और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
प्रतिमा मंजन सेवा का धार्मिक महत्व
जैन धार्मिक परंपरा में जिन प्रतिमाओं की सेवा और पूजा को श्रद्धा एवं भक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। प्रतिमा मंजन एवं शुद्धि सेवा के दौरान श्रद्धालु भगवान के प्रति अपनी आस्था और समर्पण व्यक्त करते हैं। ऐसी धार्मिक सेवाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, संयम और वीतरागता के भावों को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है।
मंदिर के प्रधान नितिन जैन ने बताया कि भगवान की प्रतिमाओं के पावन मंजन की सेवा में सहभागी बनने का अवसर श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यकारी रहा। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की सेवा और धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव होता है। मंजन सेवा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का भाव देखने को मिला।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
आयोजन में जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। श्रद्धालुओं ने भगवान की प्रतिमाओं के दर्शन किए और मंजन सेवा में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और धार्मिक गतिविधियों के कारण पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा दिखाई दी। आयोजन के दौरान श्रद्धालु भगवान शांतिनाथ की भक्ति में लीन नजर आए।
श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा मंदिर परिसर
पावन मंजन एवं शुद्धि सेवा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण बना रहा। महावीर वंदना, णमोकार मंत्र के मंगलोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा।
श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन को लेकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में धार्मिक संस्कारों को मजबूती मिलती है और नई पीढ़ी को भी अपनी धार्मिक परंपराओं एवं संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
ये रहे मौजूद
धार्मिक आयोजन में शिखर चंद जैन, मनोज जैन, सुमेर जैन, अंकुश जैन, सचिन जैन, अंकित जैन, नानू जैन, पुनीत जैन समेत बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मावलंबी मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे अनुशासन और भक्तिभाव के साथ धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता की। पावन मंजन एवं शुद्धि सेवा के सफल आयोजन से जैन समाज में भी उत्साह का माहौल रहा।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

