नई दिल्ली, 05 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। भारत और रूस के बीच दशकों से चली आ रही मैत्रीपूर्ण एवं बहुआयामी साझेदारी अब औद्योगिक और प्रौद्योगिकी सहयोग के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस प्रतिष्ठित औद्योगिक मंच पर रूस की प्रमुख प्रौद्योगिकी शक्ति ‘रोसाटॉम’ अपनी अत्याधुनिक तकनीकों, विशेषज्ञता और भारत के साथ सहयोग की संभावनाओं को व्यापक रूप से प्रस्तुत करेगा।
9 से 11 सितंबर तक होने वाले इस आयोजन में रोसाटॉम का प्रतिनिधिमंडल न केवल अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा, बल्कि विभिन्न उच्चस्तरीय व्यावसायिक एवं विषयगत सत्रों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से भारत के साथ दीर्घकालीन औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में संवाद भी करेगा। ‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ का आयोजन रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय तथा भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से किया जा रहा है। ऐसे समय में जब भारत विश्व की प्रमुख और सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी भूमिका निरंतर सुदृढ़ कर रहा है, यह प्रदर्शनी दोनों देशों के उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान कर रही है।
*शीर्ष नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी*
रोसाटॉम की ओर से इस महत्वपूर्ण आयोजन में गवर्नमेंट कॉरपोरेशन के महानिदेशक अलेक्सी लिखाचेव, प्रथम उप-महानिदेशक तथा विकास एवं अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय इकाई के निदेशक किरिल कोमारोव सहित कंपनी के प्रमुख प्रभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भाग लेंगे। किरिल कोमारोव ‘रूस और भारत साझेदारी के नए दशक की ओर यात्रा’ विषयक पूर्ण अधिवेशन में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त वे भारतीय उद्योग परिसंघ के साथ आयोजित संयुक्त सत्र ‘भारत–रूस : व्यावसायिक सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और नई संभावनाएँ’ में भी विचार रखेंगे। इन उच्चस्तरीय चर्चाओं में भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और विस्तृत करने, विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा तथा उससे जुड़े उद्योगों में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर विशेष ध्यान रहेगा।
यह सहभागिता इस बात का संकेत है कि रूस-भारत संबंध अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, डिजिटल समाधान, नई सामग्री, लॉजिस्टिक्स और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी का स्वरूप ग्रहण कर रहे हैं।
*परमाणु ऊर्जा : साझेदारी का मजबूत आधार*
भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के दीर्घकालीन रणनीतिक संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। इस सहयोग का सबसे प्रमुख प्रतीक तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। कुडनकुलम परियोजना भारत में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में रूसी तकनीकी सहयोग का एक ऐतिहासिक उदाहरण है। इसकी आधारशिला 20 नवंबर 1988 को हुए भारत-रूस अंतर-सरकारी समझौते तथा 21 जून 1998 के उसके पूरक समझौते में निहित है।
कुडनकुलम की पहली और दूसरी इकाइयाँ क्रमशः 2013 और 2016 में भारतीय राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड से जुड़ीं। ये दोनों इकाइयाँ भारत में स्थापित सबसे शक्तिशाली परमाणु ऊर्जा इकाइयों में शामिल हैं। अप्रैल 2026 तक इन दोनों इकाइयों ने अपने परिचालन काल में 132 अरब किलोवाट-घंटे से अधिक बिजली का उत्पादन किया है। यह उपलब्धि केवल ऊर्जा उत्पादन का आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत-रूस परमाणु सहयोग की विश्वसनीयता, तकनीकी क्षमता और दीर्घकालीन उपयोगिता का प्रमाण भी है।
कुडनकुलम की तीसरी, चौथी, पाँचवीं और छठी इकाइयाँ परियोजना के दूसरे और तीसरे चरण का हिस्सा हैं। इनके माध्यम से आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिलने की संभावना है। सभी छह इकाइयों के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद कुडनकुलम तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा। लगभग 8.5 करोड़ की आबादी वाले तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य के लिए स्थिर, विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन आर्थिक विकास की आधारभूत आवश्यकता है।
*अगली पीढ़ी की परमाणु तकनीक : वीवीईआर-1200*
‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ में रोसाटॉम की प्रस्तुति का एक महत्वपूर्ण आकर्षण रूस की उन्नत परमाणु तकनीक वीवीईआर-1200 होगी। वीवीईआर-1200 को रूस की आधुनिक पीढ़ी के अत्याधुनिक एवं उच्च दक्षता वाले परमाणु रिएक्टरों में गिना जाता है। वर्तमान में विश्व में इस तकनीक पर आधारित छह विद्युत इकाइयाँ परिचालन में हैं—चार रूस में और दो बेलारूस में। इसके अतिरिक्त वीवीईआर-1200 आधारित परियोजनाएँ बांग्लादेश, हंगरी, मिस्र, चीन और तुर्किये में निर्माणाधीन हैं। कजाखस्तान ने भी इसी प्रकार की इकाइयों को अपनाने का निर्णय लिया है।
भारत के संदर्भ में इस तकनीक का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि रूस भारत में इस प्रकार के रिएक्टरों पर आधारित नई परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए सहयोग जारी रखने का प्रस्ताव कर रहा है। भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं, औद्योगिक विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के बीच परमाणु ऊर्जा भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। ऐसे में वीवीईआर-1200 जैसी आधुनिक तकनीक दोनों देशों के बीच भविष्य की ऊर्जा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकती है।
*परमाणु ऊर्जा से आगे : एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग*
रोसाटॉम की भारत में उपस्थिति अब केवल परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग नए और उभरते क्षेत्रों तक तेजी से विस्तृत हो रहा है। इसका उल्लेखनीय उदाहरण एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग यानी औद्योगिक 3डी प्रिंटिंग है। ‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ के दौरान ‘एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग रूस-भारत साझेदारी के विकास की नई दिशा’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें दोनों देशों के विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि एडिटिव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में केवल अलग-अलग परियोजनाओं के बजाय एक व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र कैसे विकसित किया जा सकता है। यह क्षेत्र विनिर्माण की पारंपरिक अवधारणाओं को बदलने की क्षमता रखता है। जटिल संरचनाओं का निर्माण, प्रोटोटाइप तैयार करना, उत्पादन प्रक्रिया को तेज करना और विशिष्ट औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप पुर्जों का निर्माण—इन सभी क्षेत्रों में 3D प्रिंटिंग नई संभावनाएँ खोल रही है। भारत को अप्रैल 2026 में रोसाटॉम के ईंधन प्रभाग से जुड़ी एडिटिव टेक्नोलॉजी इकाई द्वारा रसबीम 2800 औद्योगिक 3डी प्रिंटर की आपूर्ति इस बढ़ते तकनीकी सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। अंतरराष्ट्रीय निविदा में सफलता के बाद हुई यह आपूर्ति विदेशों में रोसाटॉम निर्मित 3डी प्रिंटर की पहली आपूर्ति थी। बड़े आकार के पुर्जों के निर्माण में सक्षम यह तकनीक भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।
भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में भविष्य के अंतरिक्ष यान ‘गगनयान’ तथा प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशनों और ‘चंद्रयान’ जैसी परियोजनाओं से जुड़े प्रोटोटाइप और संरचनात्मक घटकों के निर्माण में ऐसी तकनीकें नई गति प्रदान कर सकती हैं। यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि रूस-भारत तकनीकी संबंध अब परमाणु ऊर्जा की परंपरागत सीमा से आगे निकलकर अंतरिक्ष, विनिर्माण और डिजिटल औद्योगिक प्रौद्योगिकी तक पहुँच रहे हैं।
*दुर्लभ मृदा तत्व : भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था*
आधुनिक तकनीकी उद्योगों के लिए दुर्लभ मृदा तत्व—दुर्लभ पृथ्वी तत्व का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, विद्युत वाहन, उन्नत मशीनरी, स्थायी चुंबक और अनेक रणनीतिक तकनीकों में इनकी आवश्यकता होती है। इसीलिए ‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ में रोसाटॉम के धातुकर्म व्यवसाय से जुड़े औद्योगिक एकीकरणकर्ता की ओर से दुर्लभ मृदा उद्योग के विकास पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में दुर्लभ मृदा चुंबकों के उत्पादन में औद्योगिक सहयोग, दुर्लभ मृदा उत्पादों के लिए संयुक्त मांग का निर्माण, सरकारी सहायता के उपाय तथा नई उत्पादन क्षमताओं के विकास के लिए निवेश आकर्षित करने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
भारत और रूस के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और उन्नत विनिर्माण के विस्तार के दौर में दुर्लभ मृदा उद्योग दोनों देशों के बीच नए औद्योगिक सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
*प्रदर्शनी में दिखाई देगी रूस की तकनीकी क्षमता*
‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ में रोसाटॉम का विशेष प्रदर्शनी स्टैंड आगंतुकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा। यहाँ भारत-रूस परमाणु सहयोग की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के साथ-साथ वीवीईआर-1200 रिएक्टर तकनीक को प्रदर्शित किया जाएगा। रूस में स्थित नोवोवोरोनेझ परमाणु ऊर्जा संयंत्र का मॉडल भी प्रदर्शित किया जाएगा, जहाँ वीवीईआर-1200 तकनीक पर आधारित इकाइयाँ संचालित हो रही हैं। इस प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और आम आगंतुकों को रूसी परमाणु तकनीक की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव को समझने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही स्टैंड पर एडिटिव टेक्नोलॉजी, कंपोजिट मैटेरियल्स, डिजिटल समाधान और लॉजिस्टिक्स जैसी नई प्रौद्योगिकियों को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। इस प्रकार रोसाटॉम की प्रदर्शनी केवल एक परमाणु ऊर्जा कंपनी की प्रस्तुति नहीं होगी, बल्कि आधुनिक औद्योगिक तकनीकों के व्यापक पोर्टफोलियो का परिचय भी कराएगी।
*साझेदारी का नया दशक*
भारत और रूस के संबंधों की विशेषता यह रही है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों ने दीर्घकालीन सहयोग के लिए नए रास्ते खोजे हैं। आज यह साझेदारी ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, विज्ञान, तकनीक, व्यापार और उद्योग जैसे अनेक क्षेत्रों में विस्तृत हो चुकी है। ‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ इस साझेदारी को एक नई औद्योगिक दिशा देने का अवसर प्रस्तुत कर रहा है। परमाणु ऊर्जा में स्थापित सहयोग को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, दुर्लभ मृदा तत्व, कंपोजिट सामग्री, डिजिटल प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देना दोनों देशों के उद्योगों के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर सकता है। विशेष रूप से भारत के ‘मेक इन इंडिया’, आत्मनिर्भरता और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लक्ष्यों के संदर्भ में रूसी तकनीकी विशेषज्ञता और भारतीय विनिर्माण क्षमता का संयोजन व्यापक परिणाम दे सकता है।
*तकनीक से विश्वास, सहयोग से विकास*
भारत और रूस की औद्योगिक साझेदारी की सबसे बड़ी शक्ति केवल व्यापारिक आंकड़ों में नहीं, बल्कि पारस्परिक विश्वास और दीर्घकालीन सहयोग की भावना में निहित है। कुडनकुलम से लेकर वीवीईआर-1200 तक और परमाणु ऊर्जा से लेकर 3डी प्रिंटिंग तक की यात्रा इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंध समय के साथ अधिक व्यापक, अधिक तकनीकी और अधिक भविष्य-केंद्रित होते जा रहे हैं। ‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ इसी यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है। नई दिल्ली में होने वाला यह आयोजन उद्योग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और रूस को एक-दूसरे के और निकट लाने का अवसर प्रदान करेगा। यहाँ होने वाली उच्चस्तरीय चर्चाएँ, व्यावसायिक बैठकें और तकनीकी प्रस्तुतियाँ आने वाले वर्षों की सहयोग-परियोजनाओं की नींव मजबूत कर सकती हैं। भारत की विशाल बाजार क्षमता, कुशल मानव संसाधन और बढ़ती औद्योगिक आवश्यकताओं के साथ रूस की उन्नत प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग क्षमता और ऊर्जा क्षेत्र की विशेषज्ञता का समन्वय दोनों देशों के लिए एक शक्तिशाली औद्योगिक मॉडल प्रस्तुत कर सकता है।
यही कारण है कि ‘इन्नोप्रोम. इंडिया’ में रोसाटॉम की भागीदारी को केवल एक प्रदर्शनी में सहभागिता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह भारत-रूस औद्योगिक संबंधों के अगले दशक की संभावनाओं को आकार देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है। परमाणु ऊर्जा से अंतरिक्ष तक, धातुकर्म से दुर्लभ मृदा तत्वों तक, और पारंपरिक औद्योगिक सहयोग से अत्याधुनिक डिजिटल एवं एडिटिव टेक्नोलॉजी तक—भारत और रूस के बीच साझेदारी का क्षितिज निरंतर विस्तृत हो रहा है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

