खेकड़ा,29 अगस्त 2026 (यूटीएन)। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जब अधिकांश घरों में भाई-बहन के प्रेम और स्नेह की खुशियां मनाई जा रही थीं, उसी समय खेकड़ा कस्बे में एक परिवार पर अचानक मुसीबत टूट पड़ी। बाजार में खरीदारी करने पहुंचे परिवार से तीन वर्षीय मासूम बेटा बिछड़ गया। मासूम के लापता होते ही परिवार में हड़कंप मच गया और उसकी बहनों की रक्षाबंधन की खुशियां चिंता और आंसुओं में बदल गईं। लेकिन पुलिस की तत्परता ने कुछ ही घंटों में परिवार की खुशियां वापस लौटा दीं।
मासूम के सकुशल मिलने के बाद उसकी बहनों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई। भाई को सामने देखते ही बहनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। इसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई की कलाई पर राखी बांधी और रक्षाबंधन का पर्व मनाया। बेटे को सुरक्षित पाकर माता-पिता ने राहत की सांस ली और पुलिस की कार्यशैली की जमकर सराहना की।
बाजार में खरीदारी करने पहुंचे थे पिता-पुत्र
कस्बा निवासी राहुल कुमार शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर अपने तीन वर्षीय बेटे दिव्यांश के साथ बाजार में खरीदारी करने पहुंचे थे। त्योहार के कारण बाजार में पहले से ही काफी भीड़ थी। दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ और सड़क पर लोगों की आवाजाही के बीच राहुल अपने बेटे के साथ खरीदारी कर रहे थे।
इसी दौरान भीड़ में किसी तरह दिव्यांश अपने पिता से अलग हो गया। राहुल ने कुछ देर बाद बेटे को अपने पास नहीं देखा तो उन्होंने आसपास नजर दौड़ाई। पहले उन्हें लगा कि बच्चा आसपास ही कहीं होगा, लेकिन काफी तलाश करने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला।
बेटे के लापता होते ही मची अफरा-तफरी
राहुल ने बाजार की दुकानों, आसपास की गलियों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बेटे को तलाश किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से भी बच्चे के बारे में पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
बेटे का काफी देर तक पता न चलने पर राहुल की चिंता बढ़ गई। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। रक्षाबंधन के दिन मासूम के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई और बच्चे की तलाश शुरू कर दी गई।
घर में रोने लगीं बहनें
दिव्यांश के लापता होने की खबर जैसे ही उसके घर पहुंची, वहां रक्षाबंधन की खुशियां चिंता में बदल गईं। मासूम की बहनें भाई के लापता होने की खबर सुनकर रोने-बिलखने लगीं।
बहनें बार-बार यही कह रही थीं कि “अब राखी किसे बांधेंगे।” उनकी इस मासूम बात ने परिवार के लोगों को भी भावुक कर दिया। जिस घर में कुछ देर पहले रक्षाबंधन की तैयारियां चल रही थीं, वहां अचानक मातम जैसा माहौल हो गया।
परिवार के लोग भी बच्चे के सकुशल मिलने की प्रार्थना करते हुए उसकी तलाश में जुट गए।
पुलिस ने शुरू किया सघन तलाशी अभियान
सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मासूम की तलाश शुरू कर दी। पुलिस टीम ने बाजार और उसके आसपास के संभावित स्थानों पर बच्चे को ढूंढना शुरू किया।
त्योहार के कारण बाजार में भीड़ अधिक थी, इसलिए पुलिस के सामने चुनौती भी बड़ी थी। टीम ने बाजार की दुकानों, गलियों और आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई। लोगों से पूछताछ की गई और बच्चे के हुलिए के आधार पर उसकी तलाश की गई।
पुलिस की तत्परता से तलाश अभियान लगातार जारी रहा। परिवार के लोगों की बेचैनी के बीच पुलिस टीम बच्चे को सुरक्षित खोजने के लिए प्रयास करती रही।
चंद घंटों में मिल गया मासूम दिव्यांश
कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को आखिरकार सफलता मिल गई। पुलिस ने तीन वर्षीय दिव्यांश को सकुशल बरामद कर लिया। मासूम के मिलने की सूचना जैसे ही उसके परिजनों को मिली, उनकी चिंता खुशी में बदल गई।
परिजन तत्काल पुलिस के पास पहुंचे। सामने अपने बच्चे को सकुशल देखकर माता-पिता की आंखों में भी राहत के आंसू आ गए। पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मासूम को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
भाई को देखते ही खिल उठे बहनों के चेहरे
जिस भाई के लापता होने के बाद बहनें रो रही थीं, उसे सकुशल सामने देखकर उनके चेहरे खिल उठे। बहनों ने अपने छोटे भाई को गले लगाया और उसकी कलाई पर राखी बांधी।
कुछ समय पहले तक घर में गम और चिंता का माहौल था, लेकिन भाई के वापस लौटते ही वही घर रक्षाबंधन की खुशियों से भर गया। बहनों ने भाई को मिठाई खिलाई और भगवान का शुक्रिया अदा किया कि उनका भाई सकुशल घर लौट आया।
पुलिस बनी परिवार की खुशियों की वजह
दिव्यांश की सकुशल बरामदगी के बाद परिवार ने पुलिसकर्मियों का आभार जताया। परिजनों ने कहा कि जिस समय उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था और पूरा परिवार परेशान था, उस समय पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चे की तलाश शुरू की।
कुछ ही घंटों में बच्चे के मिलने से परिवार की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई। परिजनों ने पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की।
रक्षाबंधन पर मिला सबसे बड़ा तोहफा
परिवार के लिए इस रक्षाबंधन का सबसे बड़ा उपहार कोई महंगा सामान या मिठाई नहीं, बल्कि दिव्यांश का सकुशल वापस मिलना रहा। भाई की कलाई पर राखी बांधने की बहनों की इच्छा पूरी हुई तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
बहनों के लिए भाई का वापस आना ही रक्षाबंधन की सबसे बड़ी सौगात बन गया। परिवार ने भी इसे जीवन भर याद रहने वाला रक्षाबंधन बताया।
पुलिस की तत्परता की हो रही सराहना
त्योहार के दिन बाजार में भीड़ के बीच तीन वर्षीय बच्चे के लापता होने के बाद पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई कर उसे सकुशल बरामद करने की घटना की क्षेत्र में भी चर्चा रही। लोगों ने पुलिस की तत्परता की सराहना की।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में छोटे बच्चों को लेकर परिवारों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर बाजारों में भीड़ बढ़ने के कारण बच्चों का हाथ पकड़कर रखना और उन्हें अकेला न छोड़ना बेहद जरूरी है।
दिव्यांश के सकुशल मिलने के बाद आखिरकार परिवार ने राहत की सांस ली और बहनों ने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन की खुशियां मनाईं। जिस त्योहार की शुरुआत परिवार के लिए चिंता और आंसुओं के साथ हुई थी, उसका अंत भाई-बहन के प्रेम और खुशी के साथ हुआ।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

