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रक्षाबंधन हमारी प्राचीन उपासना और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा: राष्ट्रपति मुर्मु

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नई दिल्ली,28 अगस्त  2026  (यूटीएन)।  देशभर में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व श्रद्धा, उल्लास और भाई-बहन के प्रेम के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में राष्ट्रपति ने रक्षाबंधन को भारत की प्राचीन उपासना और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मीयता, सम्मान, विश्वास और परस्पर उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने वाला अवसर भी है।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रद्धापूर्वक हाथ पर बांधे जाने वाले धागे को रक्षा के लिए पवित्र सूत्र-बंधन यानी रक्षाबंधन माना गया है। उन्होंने बताया कि अनेक श्लोकों और मंत्रों में ‘रक्षे, मा चल, मा चल’ शब्दों के माध्यम से यह प्रार्थना की जाती है कि हे रक्षा रूपी बंधन, तुम सदैव अचल रहो।

राष्ट्रपति के इस संदेश में रक्षाबंधन के धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्वरूप को एक साथ रेखांकित किया गया।

प्राचीन परंपरा से आधुनिक सामाजिक पर्व तक

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि समय के साथ रक्षाबंधन बहन द्वारा भाई की कलाई पर राखी बांधने के भावपूर्ण सामाजिक पर्व के रूप में लोकप्रिय हुआ। हालांकि इसका मूल भाव रक्षा और मंगलकामना से जुड़ा रहा, लेकिन समय के साथ यह भाई-बहन के बीच प्रेम और विश्वास का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।

आज रक्षाबंधन के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुखी, स्वस्थ एवं सफल जीवन की कामना करती हैं। भाई भी बहन के प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी को व्यक्त करता है।

राष्ट्रपति ने इस परंपरा को व्यापक सामाजिक संदर्भ देते हुए कहा कि यह पर्व परिवार और समाज के अलग-अलग सदस्यों के बीच आत्मीयता और सम्मान की भावना को मजबूत करता है।

विश्वास और संवेदनशीलता पर आधारित रिश्तों का संदेश

राष्ट्रपति के संदेश में रिश्तों की बुनियाद को भी विशेष महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि जीवन के हर रिश्ते की नींव विश्वास, संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग पर आधारित होती है।

आज के तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार और रिश्तों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे त्योहार लोगों को एक-दूसरे के करीब आने, पुराने संबंधों को मजबूत करने और आपसी स्नेह व्यक्त करने का अवसर देते हैं।

रक्षाबंधन का धागा इसी भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बनकर सामने आता है।

समाज और देश की रक्षा का भी लिया संकल्प

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रक्षाबंधन को केवल पारिवारिक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए देशवासियों से समाज और देश की रक्षा के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की भावना के साथ सभी को विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ते रहना चाहिए।

इस संदेश के जरिए उन्होंने रक्षा की भावना को व्यापक अर्थ दिया। इसमें केवल किसी व्यक्ति की रक्षा ही नहीं, बल्कि समाज, देश, मूल्यों और आपसी विश्वास की रक्षा का भाव भी शामिल है।

विकसित भारत के निर्माण का संदेश

राष्ट्रपति ने रक्षाबंधन के अवसर पर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उनका कहना था कि जिस तरह राखी रिश्तों में सुरक्षा और विश्वास की भावना का प्रतीक है, उसी भावना को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित से जोड़ने की आवश्यकता है।

देश के विकास के लिए नागरिकों के बीच सहयोग, जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और आपसी सम्मान जरूरी हैं। रक्षाबंधन का अवसर इन मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा दे सकता है।

उपराष्ट्रपति ने भी दी शुभकामनाएं

रक्षाबंधन के अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पर अपने संदेश में कहा कि रक्षाबंधन का यह खुशी का अवसर प्यार, स्नेह और आपसी जुड़ाव के बंधन को मजबूत करे।

उन्होंने लोगों को दया, सद्भाव और आपसी सम्मान के मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित होने की कामना की। उपराष्ट्रपति ने सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना भी की।

उनके संदेश में रक्षाबंधन को सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों से जोड़ने की भावना दिखाई दी।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने दी बधाई

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी रक्षाबंधन के पावन पर्व पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा कि भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और रक्षा के संकल्प का यह पर्व भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक बंधनों को और मजबूत करता है।

नितिन नवीन ने कामना की कि यह पावन अवसर सभी के जीवन में प्रेम, खुशियां और सुख-समृद्धि लेकर आए।

उन्होंने रक्षाबंधन को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं से जोड़ते हुए पर्व की शुभकामनाएं दीं।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी दी शुभकामनाएं

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने इसे भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का पावन पर्व बताया।

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह पवित्र बंधन जीवन में प्रेम, खुशियों और आपसी विश्वास को सदैव बनाए रखे।

चिराग पासवान की शुभकामना में भी रक्षाबंधन के पारिवारिक और भावनात्मक पक्ष को प्रमुखता दी गई।

राखी बांधने की परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव

रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। इसके बाद भाई-बहन एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं और परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं।

कई परिवारों में बहनें अपने भाइयों के घर जाती हैं, जबकि कई जगह भाई अपनी बहनों के घर पहुंचकर राखी बंधवाते हैं। दूर रहने वाले भाई-बहन फोन, वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए भी एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।

इस तरह आधुनिक तकनीक ने भी इस पर्व के पारिवारिक जुड़ाव को बनाए रखने में नई भूमिका निभाई है।

बाजारों में भी दिखा रक्षाबंधन का उत्साह

रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर के बाजारों में भी उत्साह देखने को मिलता है। रंग-बिरंगी राखियों, मिठाइयों, उपहारों और पूजा सामग्री की दुकानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है।

बच्चों और युवाओं के बीच अलग-अलग डिजाइन और थीम वाली राखियों का आकर्षण देखने को मिलता है। वहीं परिवारों में बहनों के लिए उपहार खरीदने की परंपरा भी तेजी से लोकप्रिय हुई है।

हालांकि पर्व का मूल भाव उपहारों से ज्यादा रिश्तों की आत्मीयता और स्नेह से जुड़ा है।

सैनिकों के साथ भी मनाया जाता है रक्षाबंधन

रक्षाबंधन के सामाजिक स्वरूप का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि देश के कई हिस्सों में लोग सैनिकों और सुरक्षा बलों के जवानों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

कई सामाजिक संगठन और स्कूल इस अवसर पर सैनिकों के लिए राखी भेजते हैं या विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसका उद्देश्य देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले लोगों के प्रति सम्मान और भाईचारे की भावना व्यक्त करना होता है।

इससे रक्षाबंधन का संदेश परिवार से निकलकर समाज और राष्ट्र तक पहुंचता है।

विभिन्न समुदायों में भी पर्व का उत्साह

रक्षाबंधन भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की विधि में अंतर हो सकता है, लेकिन भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा की भावना व्यापक रूप से दिखाई देती है।

कई जगह धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पर्व मनाया जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसे पारिवारिक मिलन और सामाजिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

महिलाओं और बहनों के सम्मान का संदेश

रक्षाबंधन भाई-बहन के संबंध में आपसी सम्मान की भावना को भी मजबूत करता है। आधुनिक समय में इस पर्व को महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों से जुड़े व्यापक सामाजिक संदेशों के साथ भी जोड़ा जाता है।

राष्ट्रपति के संदेश में आत्मीयता, सम्मान, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व जैसे शब्दों का उल्लेख इसी व्यापक मानवीय भावना को सामने लाता है।

रिश्तों को मजबूत करने का अवसर

आज की व्यस्त जीवनशैली में परिवार के सदस्यों को एक साथ समय बिताने के अवसर कम होते जा रहे हैं। ऐसे में रक्षाबंधन जैसे त्योहार परिवार को एक साथ आने का अवसर प्रदान करते हैं।

भाई-बहन पुराने दिनों को याद करते हैं, एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं और अपने रिश्ते को नए सिरे से महसूस करते हैं। कई परिवारों में इस अवसर पर पारिवारिक समारोह भी आयोजित किए जाते हैं।

बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का माध्यम

रक्षाबंधन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का भी माध्यम है। परिवारों में बच्चे राखी बांधने की परंपरा, पूजा-विधि और त्योहार से जुड़े सांस्कृतिक महत्व के बारे में सीखते हैं।

ऐसे पर्व सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति द्वारा रक्षाबंधन को प्राचीन उपासना और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताए जाने से इसके इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पक्ष को बल मिलता है।

प्राचीन मंत्रों में रक्षा की कामना

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ‘रक्षे, मा चल, मा चल’ का उल्लेख करते हुए बताया कि प्राचीन मंत्रों और श्लोकों में रक्षा सूत्र के स्थिर रहने की प्रार्थना की जाती है।

इस संदर्भ से पता चलता है कि रक्षा सूत्र की अवधारणा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में काफी पुरानी है। बाद में यही परंपरा सामाजिक स्तर पर भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के प्रतीक के रूप में व्यापक रूप से लोकप्रिय हुई।

सिर्फ भाई की नहीं, रिश्तों की रक्षा का पर्व

रक्षाबंधन का आधुनिक अर्थ केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा करने के वचन तक सीमित नहीं है। यह पर्व पारस्परिक सहयोग और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की भावना को भी व्यक्त करता है।

आज भाई और बहन दोनों एक-दूसरे की खुशी, सुरक्षा और सफलता की कामना करते हैं। जीवन के कठिन समय में एक-दूसरे का साथ देना भी इस रिश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राष्ट्रपति के संदेश का व्यापक अर्थ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संदेश रक्षाबंधन की धार्मिक और पारिवारिक परंपरा से आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारी पर केंद्रित रहा।

उन्होंने रिश्तों में विश्वास और संवेदनशीलता बनाए रखने के साथ-साथ समाज और देश की रक्षा का संकल्प लेने तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

इससे रक्षाबंधन को व्यक्तिगत रिश्तों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय भावना से जोड़ने का संदेश मिलता है।

देश के शीर्ष नेतृत्व ने दी शुभकामनाएं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई नेताओं ने रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

इन संदेशों में अलग-अलग शब्दों में प्रेम, स्नेह, विश्वास, सद्भाव, सम्मान, सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।

इससे स्पष्ट है कि रक्षाबंधन को देश के सार्वजनिक जीवन में भी पारिवारिक संबंधों के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के पर्व के रूप में देखा जाता है।

प्रेम और विश्वास की डोर को मजबूत करने का संदेश

कुल मिलाकर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रक्षाबंधन को भारत की प्राचीन उपासना और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताते हुए इसके मूल भाव को सामने रखा। उन्होंने रक्षा सूत्र की प्राचीन परंपरा से लेकर भाई-बहन के आधुनिक सामाजिक संबंध तक इसके विकास का उल्लेख किया।

उन्होंने देशवासियों से रिश्तों में विश्वास, संवेदनशीलता, सम्मान और परस्पर सहयोग को मजबूत करने की अपील की और समाज तथा देश की रक्षा के लिए संकल्प लेने का संदेश दिया।

वहीं उपराष्ट्रपति, भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ने भी अपने-अपने संदेशों में भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास को मजबूत करने की कामना की।

रक्षाबंधन का यह पर्व एक बार फिर यही संदेश देता है कि रिश्तों की असली ताकत केवल एक धागे में नहीं, बल्कि उस धागे से जुड़े विश्वास, जिम्मेदारी, स्नेह और जीवनभर साथ निभाने की भावना में होती है। यही भावना परिवार को मजबूत करती है और आगे चलकर समाज में सहयोग, सद्भाव और आपसी सम्मान की नींव भी मजबूत करती है।







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