बिनौली,26 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल में सीबीएसई की ओर से एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे 52 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों, नई शिक्षा पद्धति, बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं और कक्षा में शिक्षक की प्रभावी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक डॉ. अनिल आर्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों का समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है, ताकि वे बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से शिक्षित कर सकें।
शिक्षा को विद्यार्थी केंद्रित बनाने पर जोर
कार्यशाला में सीबीएसई प्रशिक्षक डॉ. आशा शर्मा एवं डॉ. गुंजन अत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षकों ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को अधिक समग्र, व्यावहारिक, कौशल आधारित, विद्यार्थी-केंद्रित और रचनात्मक बनाना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना ही शिक्षक की भूमिका नहीं है। शिक्षक को विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता, सीखने की गति और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए शिक्षण की रणनीति तैयार करनी चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता अलग होती है, इसलिए एक ही पद्धति सभी विद्यार्थियों के लिए प्रभावी नहीं हो सकती।
प्रशिक्षकों ने शिक्षकों को बताया कि कक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने से सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है। इसके लिए प्रश्नोत्तर, समूह कार्य, गतिविधि आधारित शिक्षण और अनुभवों से सीखने जैसी पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया।
अनुभवात्मक अधिगम और कौशल विकास पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान अनुभवात्मक अधिगम, कौशल विकास, आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बताया गया कि विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर सीखने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।
प्रशिक्षकों ने कहा कि जब विद्यार्थी किसी विषय को स्वयं अनुभव करके समझते हैं तो उनकी समझ अधिक स्थायी होती है। इसलिए कक्षा शिक्षण में गतिविधियों और प्रयोगों का समावेश किया जाना चाहिए।
आलोचनात्मक चिंतन पर चर्चा करते हुए शिक्षकों को बताया गया कि विद्यार्थियों को किसी विषय को केवल याद करने के बजाय उसके बारे में प्रश्न करने, तर्क करने, विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने और स्वयं निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
मातृभाषा और तकनीक के उपयोग पर भी मंथन
कार्यशाला में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा, तकनीक के प्रभावी उपयोग और नई मूल्यांकन प्रणाली पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षकों ने बताया कि विद्यार्थियों को किसी विषय की मूल अवधारणा समझाने में उनकी परिचित भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इसके साथ ही शिक्षण में तकनीक के उचित उपयोग पर भी जोर दिया गया। डिजिटल संसाधनों, स्मार्ट कक्षा और अन्य तकनीकी साधनों का उपयोग विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। हालांकि तकनीक को शिक्षक का विकल्प नहीं बल्कि शिक्षण को बेहतर बनाने वाले माध्यम के रूप में उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
मूल्यांकन की नई अवधारणाओं की दी जानकारी
प्रशिक्षण में मूल्यांकन की बदलती अवधारणाओं पर भी चर्चा की गई। शिक्षकों को बताया गया कि विद्यार्थी की क्षमता का आकलन केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उसके सीखने की प्रक्रिया, सहभागिता, कौशल, रचनात्मकता और व्यवहारिक समझ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रशिक्षकों ने शिक्षकों को ऐसे तरीकों से परिचित कराया जिनके माध्यम से विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित आकलन किया जा सके और आवश्यकता के अनुसार शिक्षण पद्धति में बदलाव किया जा सके।
गतिविधियों के माध्यम से समझे नई शिक्षा नीति के पहलू
कार्यशाला को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इसमें शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और गतिविधियों के माध्यम से नई शिक्षा नीति के व्यावहारिक पक्षों को समझा।
शिक्षकों ने आपसी संवाद और समूह गतिविधियों के माध्यम से अपने अनुभव भी साझा किए। इस दौरान शिक्षण से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों पर चर्चा की गई और विद्यार्थियों को बेहतर सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रशिक्षण से कक्षाओं में आएगा बदलाव
विद्यालय के प्रबंधक डॉ. अनिल आर्य ने कहा कि शिक्षकों को समय के साथ अपने ज्ञान और शिक्षण कौशल को निरंतर विकसित करते रहना चाहिए। प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त जानकारी तभी सार्थक होगी, जब उसे कक्षा-कक्ष में व्यवहारिक रूप से लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और नई शिक्षण तकनीकों को कक्षाओं में लागू करने से विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से कार्यशाला में प्राप्त अनुभवों को अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों के हित में उपयोग करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षकों का किया सम्मान
कार्यशाला के दौरान विद्यालय प्रबंधन की ओर से सीबीएसई प्रशिक्षकों का सम्मान किया गया। प्रबंधक डॉ. अनिल आर्य ने प्रशिक्षकों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कार्यशाला के लिए प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नई शिक्षा प्रणाली के अनुरूप स्वयं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य पवन कुमार त्यागी ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक जितना अधिक सीखता और स्वयं को अपडेट करता है, विद्यार्थियों को उतना ही बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।
इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य डॉ. सुशील वत्स, नितिन जैन, जितेंद्र उज्ज्वल, करुणा शर्मा सहित विद्यालय के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले शिक्षकों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं को व्यवहारिक उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बदलती शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप तैयार करना और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

